राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी: तकनीक, शोध और किसानों से जुड़ाव पर जोर

26 अगस्त 2026, नई दिल्ली: कृषि शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी: तकनीक, शोध और किसानों से जुड़ाव पर जोर भारत में कृषि उच्च शिक्षा को अधिक आधुनिक, तकनीक आधारित और किसानों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में व्यापक सुधारों पर चर्चा शुरू हो गई है। कृषि विश्वविद्यालयों में शिक्षा, शोध, नवाचार और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नई दिल्ली में 25-26 अगस्त को 36वां कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन की थीम “विकसित भारत@2047 के लिए कृषि उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना” है। इसमें देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा की सफलता केवल प्रदान की गई डिग्रियों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि इससे कितने कुशल मानव संसाधन तैयार हुए और किसानों के जीवन में कितना वास्तविक बदलाव आया।

उन्होंने कृषि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, तकनीक आधारित और किसानों की जरूरतों से जुड़ा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), किसान उत्पादक संगठनों (FPO), उद्योग और किसानों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई, ताकि प्रयोगशालाओं में होने वाला शोध खेतों तक पहुंच सके।

युवाओं को कृषि से जोड़ने पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के लिए मजबूत कृषि क्षेत्र और सशक्त किसान जरूरी हैं। उन्होंने कृषि में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, शोध, उद्यमिता और कृषि व्यवसाय में नए अवसर विकसित करने की आवश्यकता बताई।

सम्मेलन में उद्योग-अकादमिक साझेदारी, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम में बदलाव तथा ड्यूल, ट्विनिंग और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

कृषि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। इसका उद्देश्य उद्योग और पेशेवर क्षेत्र के व्यावहारिक अनुभव को कृषि शिक्षा से जोड़ना है।

शोध को किसानों की जरूरतों से जोड़ने की तैयारी

DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कृषि उच्च शिक्षा को पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ाकर कौशल, नवाचार और तकनीक आधारित व्यवस्था में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग, मांग आधारित शोध, गुणवत्ता एवं मान्यता प्रणाली और डेटा आधारित निर्णय लेने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शिक्षा, शोध और विस्तार सेवाओं के बेहतर एकीकरण को भी जरूरी बताया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान को खेत स्तर के व्यावहारिक समाधानों में बदला जा सके।

सम्मेलन में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और सीनियर रिसर्च फेलोशिप (SRF) के शोध को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

कृषि शिक्षा में प्रवेश और अकादमिक सुधार

दो दिवसीय सम्मेलन में पांच सत्रों के तहत 14 एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है। इनमें छात्र-केंद्रित सुधार, उच्च शिक्षा, फैकल्टी विकास, संस्थागत मजबूती, गुणवत्ता सुधार, अकादमिक सुधार, शोध, नवाचार और संस्थागत उत्कृष्टता शामिल हैं।

प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं:

  • ICAR ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग और सत्यापन में तेजी
  • पशु चिकित्सा विज्ञान में अलग Ph.D. काउंसलिंग
  • कृषि योग्यता रखने वाले तथा हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए स्नातक स्तर पर पात्रता
  • शोध फेलोशिप और प्रवेश व्यवस्था में सुधार
  • मान्यता एवं गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करना
  • वित्तीय प्रबंधन और प्रदर्शन आधारित फंडिंग
  • कृषि एवं संबद्ध विज्ञान में डिग्री की समकक्षता
  • फैकल्टी प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की पहचान
  • UGC Ph.D. विनियम, 2016 का समान रूप से पालन
  • अकादमिक एक्सचेंज और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना

सम्मेलन में सीट आवंटन में राज्य/श्रेणीवार 40% प्रतिबंध और पिछले कुलपति सम्मेलन के निर्णयों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।

कृषि शिक्षा में डेटा और ग्रामीण अनुभव की भूमिका बढ़ेगी

कृषि विश्वविद्यालयों में योजना बनाने, निगरानी और निर्णय लेने के लिए व्यापक कृषि शिक्षा डेटा इकोसिस्टम विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

इसके साथ ही Monitoring, Evaluation, Learning and Impact Assessment (MELIA) को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।

रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस (RAWE) को भी कृषि छात्रों को ग्रामीण वास्तविकताओं से जोड़ने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया। इससे छात्रों को किसानों और ग्रामीण समुदायों के साथ सीधे काम करने का अवसर मिलता है और कृषि शिक्षा का ग्रामीण विकास से जुड़ाव मजबूत हो सकता है।

वैश्विक स्तर के कृषि विश्वविद्यालय बनाने पर फोकस

सम्मेलन में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए NIRF रैंकिंग मानकों, भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ (IAUA) के साझा एजेंडा, संस्थागत उत्कृष्टता और प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस के माध्यम से विशेषज्ञता साझा करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

कुल मिलाकर, सम्मेलन में कृषि विश्वविद्यालयों को तकनीक-सक्षम, नवाचार आधारित और परिणाम-केंद्रित संस्थानों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। शिक्षा, शोध, विस्तार सेवाओं, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच मजबूत संबंधों को भारत के कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य ऐसी कृषि शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप समाधान तैयार करे और आधुनिक कृषि के लिए कुशल, नवाचारी तथा तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन तैयार कर सके।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture