Natural Farming Education: नेचुरल फार्मिंग बना करियर का नया विकल्प, कंपनियां दे रहीं इंटर्नशिप और प्लेसमेंट
30 जून 2026, नई दिल्ली: Natural Farming Education: नेचुरल फार्मिंग बना करियर का नया विकल्प, कंपनियां दे रहीं इंटर्नशिप और प्लेसमेंट – प्राकृतिक खेती अब केवल खेती का एक तरीका नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और करियर का नया विकल्प भी बनती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और रसायन मुक्त कृषि इकोसिस्टम के विजन को आगे बढ़ाते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा ने देश में एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय ने बी.एससी. (ऑनर्स) नेचुरल फार्मिंग का विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसके छात्रों को अब पढ़ाई के दौरान ही पेड इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर मिलने लगे हैं।
देश के पहले बैच को मिला उद्योगों का साथ
यह विशेष डिग्री कार्यक्रम सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, इम्फाल, आरएलबीसीएयू, झांसी और आरएलबीसीएयू, पूसा के संयुक्त प्रयास से शुरू किया गया है। शुरुआत में इस कोर्स को लेकर यह आशंका थी कि छात्रों को रोजगार मिलेगा या नहीं, लेकिन बदलते समय के साथ प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और ग्रीन एनर्जी से जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, पाठ्यक्रम को उद्योगों की जरूरतों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। साथ ही छात्रों को फील्ड आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव भी दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो रहे हैं।
छात्रों को मिली ₹15 हजार तक की पेड इंटर्नशिप
16 जून को आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2023-2027 बैच के सभी 15 छात्रों को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने ₹15 हजार प्रतिमाह तक की पेड इंटर्नशिप और प्लेसमेंट ऑफर लेटर सौंपे।
ये ऑफर कृषि, ग्रीन एनर्जी और ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रतिष्ठित संस्थाओं की ओर से दिए गए हैं। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने छात्रों की तकनीकी क्षमता और व्यावहारिक कौशल की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों के अनुरूप इन छात्रों को तैयार किया गया है।
इन परियोजनाओं पर करेंगे काम
चयनित छात्र गोवर्धन पहल, वेस्ट-टू-एनर्जी सिस्टम, प्राकृतिक खेती के मॉडल और ग्रामीण सतत विकास कार्यक्रमों से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करेंगे। इनका उद्देश्य किसानों के बीच रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करना है।
इसके साथ ही छात्रों को प्राकृतिक उत्पादों की मार्केटिंग और व्यावसायीकरण (कमर्शियलाइजेशन) का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे कृषि उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
इंटर्नशिप के बाद नौकरी का भी मिलेगा अवसर
विश्वविद्यालय के अनुसार, छात्र अपनी पेड इंटर्नशिप और शैक्षणिक आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद संबंधित संस्थानों में स्थायी रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे। प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई कंपनियों ने पूरे बैच को इंटर्नशिप के साथ आगे रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
रोजगारपरक कृषि शिक्षा की नई मिसाल
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, किसान, छात्र और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक खेती और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालय का मानना है कि फील्ड आधारित प्रशिक्षण, उद्योगों के सहयोग और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम के माध्यम से कृषि शिक्षा को नई दिशा दी जा सकती है। यही वजह है कि पूसा की इस पहल को अब देश के अन्य कृषि विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

