5 साल में 1 करोड़ हेक्टेयर पर माइक्रो इरिगेशन का लक्ष्‍य – श्री नरेंद्र सिंह तोमर

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3,805.67 करोड़ रू. ऋण की परियोजनाएं मंजूर

10 सितंबर 2020, नई दिल्ली। 5 साल में 1 करोड़ हेक्टेयर पर माइक्रो इरिगेशन का लक्ष्‍य – श्री नरेंद्र सिंह तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि केंद्र सरकार ने 5 वर्षों में सूक्ष्‍म सिंचाई के अंतर्गत 100 लाख हेक्टेयर भूमि कवर करने का लक्ष्‍य रखा है। कृषि में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई कवरेज पर आयोजित वेबिनार में श्री तोमर ने कहा कि वर्ष 2019-20 में ड्रिप व स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाने से 11 लाख किसानों को लाभ हुआ है। माइक्रो इरिगेशन फंड कॉर्पस की स्टियरिंग कमेटी व नाबार्ड ने राज्यों में 3,805.67 करोड़ रू. ऋण की परियोजनाओं को मंजूरी दी हैं, जिनका क्षेत्र कवरेज 12.53 लाख हेक्टेयर है।

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श्री तोमर ने कहा कि संबंधित विभागों/मंत्रालयों, राज्‍य कार्यान्‍वयन एजेंसियों, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विनिर्माताओं/आपूर्तिकर्ताओं जैसे विभिन्‍न हितधारकों के समन्‍वित एवं एकीकृत प्रयासों से 100 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर करने का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी और कृषक समुदाय के लाभ के लिए सूक्ष्‍म सिंचाई का कवरेज और अधिक बढ़ जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने खेतों में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए ड्रिप व स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि कृषि के लिए जल अतिमहत्‍वपूर्ण इनपुट होने के कारण सतत कृषि विकास एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्‍चित करने हेतु जल के विवेकपूर्ण उपयोग का अत्यधिक महत्‍व है, इसलिए अनुकूलतम फसल पद्धति अपनाने तथा पानी का समुचित उपयोग करने के साथ-साथ उपलब्‍ध जल संसाधनों का बड़ी ही दक्षता के साथ इस्तेमाल करने की आवश्‍यकता है। ड्रिप एवं स्‍प्रिंकलर सिंचाई सहित आधुनिक सिंचाई पद्धतियां ऐसे स्‍थानों पर काफी मददगार साबित हुई हैं, जहां जरूरत के आधार पर जल का उपयोग करते हुए फसलें उगाई जाती है या आवश्‍यकता आधारित प्रयोग के माध्‍यम से पौधों की जरूरत के अनुसार जल का उपयोग करना होता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला व श्री कैलाश चौधरी़ तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। वेबिनार के विभिन्न सत्र हुए, जिनमें श्री रूपाला व श्री चौधरी तथा नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद्र, कृषि मंत्रालय के सचिव श्री संजय अग्रवाल, राज्यों के प्रमुख सचिव (कृषि) तथा अन्य विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए।

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