राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ICAR की बड़ी खोज: अब तैयार होंगी ज्यादा पैदावार देने वाली अरहर की बेहतर किस्में, किसानों को होगा फायदा

06 अगस्त 2026, नई दिल्ली: ICAR की बड़ी खोज: अब तैयार होंगी ज्यादा पैदावार देने वाली अरहर की बेहतर किस्में, किसानों को होगा फायदा – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने दलहन अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करते हुए अरहर (तूर) की किस्म ‘आशा’ का भारत का पहला पूर्ण रूप से एनोटेटेड टेलोमेयर-टू-टेलोमेयर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित किया है। इस उपलब्धि से अधिक उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल, रोग प्रतिरोधी और पोषक तत्वों से भरपूर नई अरहर किस्मों के विकास में तेजी आएगी। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

दलहन अनुसंधान में भारत की बड़ी उपलब्धि

अरहर भारत की सबसे महत्वपूर्ण दलहन फसलों में शामिल है और करोड़ों लोगों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में इसका पूर्ण T2T जीनोम तैयार होना दलहन अनुसंधान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-NIPB), नई दिल्ली के वैज्ञानिकों के वर्षों के अनुसंधान का परिणाम है।

आईसीएआर ने बताया कि वर्ष 2011 में इसी संस्थान ने दुनिया की पहली दलहन फसल का ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया था। यह भारत में पूरी तरह अनुक्रमित (सीक्वेंस) किया गया पहला फसल जीनोम भी था। इसके बाद वर्ष 2017 में इसका उन्नत संस्करण जारी किया गया और अब वैज्ञानिकों ने इसका पूर्ण टेलोमेयर-टू-टेलोमेयर (T2T) जीनोम तैयार कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

क्या है इस जीनोम की खासियत?

नए T2T जीनोम में 752.65 मिलियन बेस पेयर्स शामिल हैं, जिन्हें 92 कॉन्टिग्स में संयोजित किया गया है। यह अरहर के सभी 11 गुणसूत्रों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करता है। NIPB_CcT2T_4 नाम से तैयार इस जीनोम असेंबली को वैश्विक डेटाबेस NCBI में GCF_000230855.1 अभिगमन संख्या के साथ 20 अप्रैल 2026 को जमा किया गया।

इस जीनोम में सभी 11 सेंट्रोमियर और 22 टेलोमियर शामिल हैं, जो इसकी पूर्णता को दर्शाते हैं। वैज्ञानिकों ने इसमें 36,557 जीनों की पहचान की है, जिनसे 48,008 mRNA (कोडिंग अनुक्रम) प्राप्त हुए हैं। ट्रांसक्रिप्टोम (RNA) मैपिंग में 99.9 प्रतिशत से अधिक रीड अलाइनमेंट दर्ज किया गया, जिससे इसकी सटीकता और गुणवत्ता की पुष्टि हुई है।

नई किस्मों के विकास को मिलेगी रफ्तार

आईसीएआर के अनुसार, यह पूर्ण जीनोम भविष्य में उन्नत जीन विश्लेषण, पैन-जीनोम अध्ययन, महत्वपूर्ण कृषि एवं पोषण संबंधी गुणों से जुड़े जीनों की पहचान, आणविक प्रजनन (Molecular Breeding) और जीनोम संपादन (Genome Editing) तकनीकों के उपयोग के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इससे अधिक उपज देने वाली, जलवायु परिवर्तन का सामना करने वाली तथा बेहतर गुणवत्ता वाली अरहर किस्मों के विकास में तेजी आएगी।

परिषद का कहना है कि इस उपलब्धि से दलहन सुधार कार्यक्रम को नई गति मिलेगी। वैज्ञानिकों और प्रजनकों को नई किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ेगी। साथ ही देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस

आईसीएआर देशभर में उच्च उपज देने वाली, कीट प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल दलहन किस्मों के विकास, प्रजनक बीज उत्पादन की निगरानी, बहु-स्थानिक परीक्षण, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से उन्नत उत्पादन तकनीकों के प्रदर्शन तथा किसानों के प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता का कार्य कर रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने ‘दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन’ (2025-26 से 2030-31) शुरू किया है। मिशन का उद्देश्य दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना, आयात पर निर्भरता कम करना, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, खेती का रकबा बढ़ाना, सुनिश्चित खरीद और मजबूत फसलोत्तर अवसंरचना के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना है।

2030-31 तक 35 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य

सरकार ने इस मिशन के तहत वर्ष 2030-31 तक देश का दलहन उत्पादन लगभग 35 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज प्रणाली, आधुनिक तकनीक और प्रभावी विस्तार सेवाओं को एकीकृत रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

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