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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में पशुधन प्रबंधन में बदलाव की पहल: 21वीं पशुधन गणना का हुआ शुभारंभ

28 अक्टूबर 2024, नई दिल्ली: भारत में पशुधन प्रबंधन में बदलाव की पहल: 21वीं पशुधन गणना का हुआ शुभारंभ – केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने देश की 21वीं पशुधन गणना का शुभारंभ किया। इस मौके पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और श्री जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में जी-20 शेरपा श्री अमिताभ कांत, पशुपालन विभाग की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिससे इसकी राष्ट्रीय अहमियत स्पष्ट हुई।

गणना का उद्देश्य और राष्ट्रीय महत्व

मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह गणना भारत के पशुधन क्षेत्र के विकास में नीतिगत निर्णयों के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण, रोजगार और आय का बड़ा स्रोत पशुधन क्षेत्र है, और इस गणना के आंकड़े रोग नियंत्रण, नस्ल सुधार, और ग्रामीण आजीविका में सुधार के लिए सहायक होंगे।

श्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि गणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए मोबाइल एप और वेब-आधारित डैशबोर्ड जैसे डिजिटल टूल का इस्तेमाल होगा। इससे डेटा संग्रह में सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी और इसे समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

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राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने बताया कि इस बार गणना में पशुधन पालन में महिलाओं की भूमिका पर भी डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।

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राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने बताया कि पशुधन क्षेत्र से लगभग 2.1 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका मिलती है, जो खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का प्रमुख स्रोत है। 21वीं पशुधन गणना से प्राप्त आंकड़े से उन जरूरतमंद क्षेत्रों की पहचान में मदद मिलेगी, जहां ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने के लिए योजनाओं की आवश्यकता है।

वैश्विक मानकों के अनुरूप पशुधन प्रबंधन

जी20 शेरपा श्री अमिताभ कांत ने इस गणना के महत्व पर बात करते हुए इसे सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह गणना देश में पशुधन प्रबंधन को वैश्विक मानकों और स्थायित्व लक्ष्यों के करीब लाने का एक जरिया बनेगी।

डेटा संग्रह की तैयारियाँ

डीएएचडी की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय ने बताया कि देशभर के 30 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुँचने के लिए लगभग एक लाख फील्ड कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस गणना में नए तकनीकी उपाय, जैसे नस्ल पहचान के लिए छवियों का उपयोग, ऑफलाइन डेटा कैप्चर और वास्तविक समय की निगरानी का प्रावधान किया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि यह गणना पूरे देश में कुशलता से की जा सके।

इस बार की पशुधन गणना में पशुधन में लिंग भूमिकाओं, नस्ल प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता जैसे अहम बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा। खानाबदोश समुदायों और चरवाहों के डेटा को भी शामिल कर, यह गणना पशुधन प्रथाओं की विविधता को दर्शाने में मदद करेगी।

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