राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

चक्रवाती तूफान दाना के दौरान मछुआरों के लिए स्वदेशी ट्रांसपोंडर बने जीवन रक्षा कवच

06 नवंबर 2024, नई दिल्ली: चक्रवाती तूफान दाना के दौरान मछुआरों के लिए स्वदेशी ट्रांसपोंडर बने जीवन रक्षा कवच – मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की एक अहम पहल के तहत मछुआरों को सुरक्षित रखने के लिए स्वदेशी ट्रांसपोंडर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो चक्रवाती तूफान दाना के दौरान जीवन रक्षक साबित हुई। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत शुरू की गई इस परियोजना में मछुआरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समुद्री संचार को मजबूत बनाया गया है।

तटीय राज्यों में मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश

30 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाराष्ट्र के पालघर से इस परियोजना का शुभारंभ किया गया था, जिसके तहत तेरह तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मछुआरों की नौकाओं में स्वदेशी ट्रांसपोंडर लगाए जा रहे हैं। इस योजना पर 364 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, और ट्रांसपोंडर सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

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ओडिशा में 1000 से अधिक ट्रांसपोंडर लगाए गए हैं, जिसने हाल ही में आए चक्रवाती तूफान दाना के दौरान मछुआरों के लिए जीवन रेखा का काम किया। राज्य राहत आयुक्त ने 20 अक्टूबर 2024 को तूफान की चेतावनी जारी की थी, जिसके बाद मत्स्य विभाग ने समुद्र में मछुआरों को समय रहते चेतावनी संदेश भेजे। इससे मछुआरों को सुरक्षित किनारे पर लौटने का मौका मिला और उनके संसाधनों की हानि से भी बचाव हुआ।

वास्तविक समय ट्रैकिंग और संचार के नए साधन

चक्रवात के दौरान पोत संचार और सहायक प्रणाली तथा नभमित्र एप्लिकेशन की मदद से मछुआरों की नावों की स्थिति, दिशा, और गति पर वास्तविक समय में नजर रखी गई। इससे अधिकारियों को मछुआरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में मदद मिली। यह प्रणाली संकट के दौरान प्रभावी संचार और तेजी से राहत प्रबंधन में कारगर साबित हुई। इस प्रणाली से मिले संदेश अंग्रेजी और ओडिया में भेजे गए ताकि सभी मछुआरे समय रहते समुद्री स्थिति को समझ सकें।

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इसरो द्वारा विकसित इस तकनीक ने मत्स्य विभाग, तटरक्षक और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय संभव बनाया। पारादीप तट के पास समुद्र में 126 नौकाओं की निगरानी कर उन्हें समय रहते सुरक्षित वापस लाया गया। इस तरह के संकट में स्वदेशी तकनीक की उपयोगिता भविष्य में मछुआरों की सुरक्षा के लिए एक स्थायी समाधान बन सकती है।

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