अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल की पकड़ मजबूत, टैरिफ घटा तो बढ़ेगा निर्यात
03 फरवरी 2026, नई दिल्ली: अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल की पकड़ मजबूत, टैरिफ घटा तो बढ़ेगा निर्यात – भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) ने अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर प्रस्तावित टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के संकेतों का स्वागत किया है। महासंघ के अनुसार, यदि यह निर्णय लागू होता है, तो भारतीय चावल को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और अमेरिका को होने वाले निर्यात में तेज़ी आने की संभावना है।
IREF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम गर्ग ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के हालिया सार्वजनिक बयानों के बाद यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क को हटाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारत का कुल टैरिफ बोझ 18 प्रतिशत तक सीमित रह जाएगा, जिससे थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर स्थिति बन जाएगी, जहां वर्तमान में लगभग 19 प्रतिशत टैरिफ लागू है।
महासंघ के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब भारत रिकॉर्ड लगभग 149 मिलियन मीट्रिक टन चावल उत्पादन के साथ नए सीज़न में प्रवेश कर रहा है। देश में उपलब्धता मजबूत है और घरेलू मांग स्थिर बनी हुई है। इसके बावजूद, ऊंचे शुल्कों के बीच भी भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय मांग बनी रही है, जो इसकी मज़बूत संरचनात्मक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।
अमेरिका को चावल निर्यात: वित्त वर्ष 2024–25
नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट है कि वित्त वर्ष 2024–25 में अमेरिका को भारत का बासमती और गैर-बासमती चावल निर्यात मात्रा और मूल्य, दोनों के लिहाज़ से मजबूत रहा।
| श्रेणी | मात्रा (मीट्रिक टन) | राशि (₹ करोड़) | औसत दर (₹) | मूल्य (USD मिलियन) | औसत दर (USD) |
|---|---|---|---|---|---|
| बासमती | 2,74,213 | 2,849.16 | 1,03,903 | 337.10 | 1,229.33 |
| गैर-बासमती | 61,341 | 462.50 | 75,398.89 | 54.64 | 890.73 |
अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 तक अमेरिका को निर्यात
50 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ने के बावजूद, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में भी भारत का निर्यात जारी रहा, हालांकि मूल्य और औसत दरों में कुछ दबाव देखने को मिला।
| श्रेणी | मात्रा (मीट्रिक टन) | राशि (₹ करोड़) | औसत दर (₹) | मूल्य (USD मिलियन) | औसत दर (USD) |
|---|---|---|---|---|---|
| बासमती | 1,99,558 | 1,749.17 | 87,652.16 | 201.13 | 1,007.86 |
| गैर-बासमती | 40,960 | 284.12 | 69,365.62 | 32.71 | 798.50 |
IREF का कहना है कि यदि टैरिफ को 18 प्रतिशत पर पुनः निर्धारित किया जाता है, तो लैंडेड कीमतों में सुधार होगा और बासमती तथा गैर-बासमती दोनों श्रेणियों में अमेरिका से मांग तेज़ी से बढ़ सकती है।
मासिक तुलना: 2025 बनाम 2024 (सभी प्रकार के चावल)
नीचे दी गई तालिका यह दर्शाती है कि 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भी 2025 में निर्यात मात्रा 2024 की तुलना में बेहतर बनी रही, हालांकि मूल्य में दबाव देखा गया।
| माह | 2025 मात्रा (MT) | 2025 मूल्य (USD मिलियन) | 2024 मात्रा (MT) | 2024 मूल्य (USD मिलियन) |
|---|---|---|---|---|
| सितंबर | 22,668 | 22.28 | 21,329 | 27.12 |
| अक्टूबर | 29,015 | 28.19 | 22,606 | 28.18 |
| नवंबर | 24,156 | 23.72 | 21,723 | 27.35 |
महासंघ के अनुसार, यह आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारतीय चावल अमेरिकी बाज़ार में उपभोक्ताओं और खरीदारों के लिए अनिवार्य बना हुआ है। टैरिफ समानता की स्थिति में निर्यात मात्रा और मूल्य, दोनों में तेज़ सुधार देखने को मिल सकता है।
ईरान से जुड़े व्यापार पर संभावित अतिरिक्त शुल्क के सवाल पर IREF ने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार ढांचे और संभावित मुक्त व्यापार समझौते केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि रणनीतिक संतुलन को भी दर्शाते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में भारत–ईरान चावल व्यापार में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है।
महासंघ के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि IREF सभी हितधारकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगा, ताकि निर्यातक किसी भी प्रक्रियात्मक बदलाव के लिए तैयार रहें और नियम-आधारित, स्थिर व्यापार व्यवस्था को मज़बूती मिले, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ताओं को लाभ हो।
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