राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

अब दालें आयात नहीं, निर्यात करेगा भारत: अमलाहा से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान  

09 फरवरी 2026, नई दिल्ली: अब दालें आयात नहीं, निर्यात करेगा भारत: अमलाहा से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान  – मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से देश की दलहन नीति को नई दिशा मिली है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहाँ आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब भारत दालों का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक देश बनेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “दालें विदेश से मंगाना हमारे लिए आनंद की बात नहीं, यह शर्म की बात है। अब भारत दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा।”

अमलाहा से शुरू हुआ ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को जमीन पर उतारने का रोडमैप अमलाहा से तय किया गया है। इस राष्ट्रीय बैठक में केंद्रीय व राज्य सरकारों के मंत्री, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, ICAR–ICARDA के वैज्ञानिक, FPO, बीज कंपनियाँ, दाल मिल प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान एक मंच पर मौजूद रहे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह संकेत है कि अब दलहन नीति दिल्ली की फाइलों में नहीं, खेतों के बीच तय होगी।


किसान हित सर्वोपरि, विपक्ष की आशंका बेबुनियाद

भारत–अमेरिका समझौते को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर केंद्रीय मंत्री ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह भ्रम फैला रहा था कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से भारतीय किसान बर्बाद हो जाएगा, लेकिन आज के तथ्य साफ़ हैं कि किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू और कई संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। “अमेरिका से न मक्का आएगा, न गेहूँ, न चावल और न ही डेयरी उत्पाद- भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है,” उन्होंने दो टूक कहा।


निर्यात बढ़ेगा, किसानों की आय होगी मजबूत

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस समझौते से भारतीय निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। बासमती चावल, मसाले, टेक्सटाइल और अन्य कृषि आधारित उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।


उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास किसानों को लाभ होगा, वहां बासमती चावल के निर्यात से हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब के किसानों को फायदा मिलेगा।

दलहन उत्पादन बढ़ाने पर फोकस, MSP और बाजार की गारंटी

दलहन उत्पादन की स्थिति पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने माना कि किसान वही फसल बोता है जिसमें उसे अधिक लाभ दिखता है। इसलिए सरकार का फोकस उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर बीज देने, MSP सुनिश्चित करने और बाज़ार से जोड़ने पर है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले।

1,000 दाल मिलें लगेंगी, ₹25 लाख तक सब्सिडी

किसानों को वैल्यू एडिशन से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में 1,000 दाल मिलें स्थापित की जाएँगी। दाल मिल लगाने पर ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।
मध्य प्रदेश में ही अलग-अलग क्लस्टरों में 55 दाल मिलें लगाई जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

बीज नीति में बड़ा बदलाव: अब दिल्ली नहीं, किसान के बीच होगा बीज रिलीज़

बीज सुधार को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी बीज दिल्ली में बैठकर रिलीज़ नहीं किया जाएगा, बल्कि राज्यों में जाकर किसानों के बीच बीज जारी किए जाएँगे।

क्लस्टर मॉडल के तहत किसानों को बीज किट दी जाएगी और एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी, ताकि आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों से दलहन उत्पादन बढ़ाया जा सके।

वैज्ञानिक शोध से मिलेगा किसानों को सीधा लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने अमलाहा स्थित अनुसंधान केंद्र, ICAR और ICARDA के वैज्ञानिकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि चना, मसूर, मूंग, उड़द और अन्य दलहनों की उच्च उत्पादकता, जल्दी पकने वाली और रोग-मुक्त किस्मों पर तेज़ी से काम किया जा रहा है। इससे किसानों को दलहन की खेती में अधिक लाभ मिलेगा।

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अमलाहा से साफ़ संदेश: दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार दलहन में आत्मनिर्भरता को केवल नारा नहीं, बल्कि नीति, विज्ञान, MSP, बीज सुधार और बाज़ार के ज़रिए ज़मीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश के किसान देख रहे हैं कि उनके हितों की रक्षा करते हुए भारत आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में भारत दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनकर उभरेगा।

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