ICAR Selection Reform: ICAR में चयन प्रक्रिया बदली, जानिए क्या होंगे नए मानक
19 जनवरी 2026, नई दिल्ली: ICAR Selection Reform: ICAR में चयन प्रक्रिया बदली, जानिए क्या होंगे नए मानक – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता-आधारित बनाने के लिए बड़ा सुधार किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ICAR ने चयन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव लागू किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कृषि विज्ञान को सशक्त बनाते हुए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देना है।
सरकार का विज़न: मजबूत कृषि विज्ञान, आत्मनिर्भर भारत
ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि किसान और कृषि वैज्ञानिक आत्मनिर्भर भारत के असली निर्माता हैं। इसी सोच के तहत ICAR की चयन प्रणाली को पूरी तरह योग्यता, पारदर्शिता और पद की आवश्यकता के अनुरूप तैयार किया गया है।
उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशें लागू
डॉ. जाट ने बताया कि जुलाई 2025 में गठित एक उच्चस्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता UGC के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर वेद प्रकाश ने की थी, ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस समिति में देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक और चयन विशेषज्ञ शामिल थे। अब समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे चयन प्रक्रिया में गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
अब व्यक्ति नहीं, पद होगा चयन का आधार
नई चयन नीति के तहत अब प्रक्रिया ‘पद-केंद्रित’ होगी। यानी जिस पद के लिए चयन किया जाना है, उसी के अनुरूप योग्यता, अनुभव और विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी जाएगी। ICAR का मानना है कि इससे हर पद के लिए सबसे उपयुक्त प्रतिभा का चयन संभव हो सकेगा।
स्कोरकार्ड और इंटरव्यू में तय हुआ स्पष्ट अनुपात
चयन को और अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए स्कोरकार्ड और साक्षात्कार के बीच स्पष्ट संतुलन तय किया गया है—
– अनुसंधान प्रबंधन पद (RMPs): 70:30
– गैर-RMP पद (Heads/PCs): 75:25
– प्रधान एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक: 80:20
यह अनुपात चयन प्रक्रिया को अधिक वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी बनाएगा।
H-Index और नेतृत्व क्षमता पर फोकस
अब केवल शोध पत्रों की संख्या के बजाय H-Index के माध्यम से शोध के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा। साथ ही नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और प्रशासनिक दक्षता को भी चयन के महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल किया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने वाले वैज्ञानिकों को वेटेज
नई नीति के तहत उन वैज्ञानिकों को विशेष वेटेज दिया जाएगा, जिन्होंने देश के कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दी है। ICAR के अनुसार, यह उनके समर्पण और योगदान के प्रति सरकार की कृतज्ञता का प्रतीक है।
प्रवासी और बाहरी प्रतिभाओं के लिए खुले अवसर
ICAR ने चयन प्रक्रिया को भारतीय प्रवासी वैज्ञानिकों और अन्य संस्थानों की उत्कृष्ट प्रतिभाओं के लिए भी अधिक खुला और सुलभ बनाया है। हर स्तर पर चयन पूरी तरह योग्यता-आधारित और पारदर्शी होगा।
मनोमितीय विश्लेषण और इंटरव्यू प्रशिक्षण
चयन प्रक्रिया में अब Psychometric Analysis और साक्षात्कारकर्ताओं के लिए विशेष ओरिएंटेशन को भी शामिल किया गया है, ताकि निर्णय प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और त्रुटिरहित हो सके।
किसान और उद्योग से जुड़ेगा कृषि अनुसंधान
नए ढांचे में किसान-केंद्रित, उद्योग-उन्मुख और बहुविषयक अनुसंधान को प्राथमिकता दी गई है। इससे कृषि शोध का सीधा लाभ किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि उद्योग तक पहुंचेगा।
कार्यसंस्कृति में बदलाव की शुरुआत
DG डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि यह सुधार केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि ICAR की पूरी कार्यसंस्कृति में बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे वैज्ञानिक अपनी विशेषज्ञता के अनुसार शोध, शिक्षण और विस्तार कार्य में बेहतर योगदान दे सकेंगे।
‘विकसित भारत 2047’ की ओर निर्णायक कदम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ये सुधार ICAR को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय कृषि अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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