ICAR ने विकसित किया स्मार्ट फ्रूट फ्लाई ट्रैप, 120 दिन तक फलों की होगी सुरक्षा; कीटनाशक की नहीं पड़ेगी जरूरत
29 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR ने विकसित किया स्मार्ट फ्रूट फ्लाई ट्रैप, 120 दिन तक फलों की होगी सुरक्षा; कीटनाशक की नहीं पड़ेगी जरूरत – फलों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली फ्रूट फ्लाई की समस्या से किसानों को राहत दिलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरल इंसेक्ट रिसोर्सेज (NBAIR), बेंगलुरु ने ‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ विकसित किया है। यह स्मार्ट, पर्यावरण-अनुकूल और रीयूजेबल ट्रैप बिना कीटनाशकों के उपयोग के 120 दिनों से अधिक समय तक फ्रूट फ्लाई पर प्रभावी नियंत्रण करता है। इससे फलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और किसानों की उत्पादन लागत भी कम होती है।
120 दिनों तक असरदार, दोबारा भी किया जा सकता है इस्तेमाल
आईसीएआर के अनुसार, शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप विशेष आकर्षण तकनीक के जरिए फ्रूट फ्लाई को अपनी ओर खींचकर फंसा लेता है। यह ट्रैप 120 दिनों से अधिक समय तक प्रभावी रहता है और इसे दोबारा उपयोग में भी लाया जा सकता है। चूंकि इसमें रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना पड़ता, इसलिए फलों पर हानिकारक रासायनिक अवशेष नहीं रहते और सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
आम और अमरूद समेत कई फलों के लिए कारगर
आईसीएआर ने बताया कि यह ट्रैप देश के विभिन्न क्षेत्रों में सफल परीक्षणों के बाद प्रभावी पाया गया है। खासतौर पर Bactrocera dorsalis प्रजाति की फ्रूट फ्लाई के नियंत्रण में इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। यह कीट आम, अमरूद और कई अन्य फल फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को मजबूत करने के साथ-साथ रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम करेगी।
IIHR की तकनीक से भी मिल रही बेहतर सुरक्षा
इसी तरह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च (IIHR), बेंगलुरु ने भी फ्रूट फ्लाई नियंत्रण के लिए मेल एनीहिलेशन टेक्नीक (MAT) पर आधारित ट्रैप विकसित किया है। यह पर्यावरण-अनुकूल और रेसिड्यू-फ्री तकनीक कीटों के हमले को करीब 80 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है। वर्तमान में देशभर के 6,000 से अधिक किसान इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
आम के बागों में मिले बेहतर परिणाम
आईआईएचआर के अनुसार, आम के बागों में इस तकनीक के फील्ड ट्रायल के दौरान अच्छे नतीजे मिले हैं। ट्रैप में मिथाइल यूजेनॉल और डाइक्लोरवोस से उपचारित प्लाईवुड का टुकड़ा लगाया जाता है, जिसे पेड़ों पर टांग दिया जाता है। यह नर फ्रूट फ्लाई को आकर्षित कर नष्ट करता है, जिससे उनके प्रजनन चक्र पर असर पड़ता है और फलों को नुकसान कम होता है। बेहतर परिणाम के लिए प्रति एकड़ 6 से 8 ट्रैप लगाने की सलाह दी जाती है।
बढ़ेगी पैदावार और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रूट फ्लाई पर प्रभावी नियंत्रण मिलने से फलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार होता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ भारतीय फलों, विशेषकर आम, के निर्यात को भी मजबूती मिलेगी। अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में फ्रूट फ्लाई संक्रमण बड़ी चुनौती रहा है। नई तकनीक इस समस्या को कम कर निर्यात के अवसर बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
किसानों को अपनाने की सलाह
आईसीएआर ने फल उत्पादक किसानों से फलों की फसलों में फ्रूट फ्लाई के प्रभावी नियंत्रण के लिए इस तकनीक को अपनाने की अपील की है। वहीं, आईआईएचआर इस किसान-अनुकूल तकनीक के बड़े स्तर पर विस्तार के लिए इसके पेटेंट की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है।
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