राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कपास किसानों के लिए HDPS योजना, सरकार दे रही ₹16,000 तक की सब्सिडी

08 मार्च 2025, नागपुर: कपास किसानों के लिए HDPS योजना, सरकार दे रही ₹16,000 तक की सब्सिडी – भारत में लगभग 1.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर कपास की खेती होती है, लेकिन अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में औसत उत्पादकता कम बनी हुई है। ये देश जैव-प्रौद्योगिकी और सटीक कृषि (Precision Agronomy) का भरपूर उपयोग कर रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्य, जहां 40 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होती है, अब भी उत्पादकता के मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं। इसी को देखते हुए वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं ने विज्ञान आधारित समाधानों को अपनाने पर जोर दिया है।

नागपुर में आयोजित आईसीएआर राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला आईसीएआर- केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR) द्वारा फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) और नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NSAI) के सहयोग से आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि एचडीपीएस तकनीक के जरिए प्रति एकड़ पौधों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जिससे न केवल उत्पादकता में सुधार होगा बल्कि मशीनीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।

आईसीएआर-सीआईसीआर, नागपुर के निदेशक डॉ. वाई. जी. प्रसाद ने कहा, “एचडीपीएस भारत के कपास क्षेत्र को बदलने की दिशा में एक अहम कदम है। यह कम उपज देने वाली भूमि में भी उच्च घनत्व वाली खेती को संभव बनाता है और साथ ही मशीनीकरण को बढ़ावा देकर श्रम लागत कम करता है। सरकार की वित्तीय सहायता इस तकनीक को बढ़ावा देने के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

16,000 एकड़ में एचडीपीएस खेती, 6,664 किसान जुड़ें

महाराष्ट्र में 16,000 एकड़ भूमि पर एचडीपीएस तकनीक को अपनाया जा चुका है, जिसमें 6,664 किसान सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह पहल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत चलाई जा रही है, जिसमें CICR, 10 निजी बीज कंपनियां और केंद्र सरकार के कृषि एवं कपड़ा मंत्रालय शामिल हैं। सरकार द्वारा ₹16,000 प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन राशि इस तकनीक को अपनाने में सहायक साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एचडीपीएस से प्रति एकड़ कपास उत्पादन में 30-50% की वृद्धि हो सकती है, साथ ही यह मशीनीकृत कटाई को भी संभव बनाता है। इस तकनीक में प्यूनमैटिक प्लांटर, बूम स्प्रेयर और मैकेनिकल पिकर जैसे उन्नत उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

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रासी सीड्स के चेयरमैन डॉ. एम. रामासामी ने कहा, “बीटी कपास ने उत्पादन को बनाए रखा है, लेकिन बदलती कीट समस्याओं को देखते हुए नवाचार की जरूरत है। वैश्विक कपास उद्योग ने उन्नत कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाया है और भारतीय किसानों को भी इन अवसरों तक पहुंच मिलनी चाहिए।”

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कपास उद्योग और टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन

महाराष्ट्र में तकनीकी वस्त्र मिशन (MTTM) राज्य के कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसमें 30-40 लाख कपास किसान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो इस मिशन के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कपास उत्पादन में वृद्धि न केवल कृषि बल्कि भारत के वस्त्र उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो महामारी के बाद कच्चे माल की कमी से जूझ रहा है।

एग्रीकल्चरल साइंटिस्ट्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (ASRB) के पूर्व चेयरमैन डॉ. सी. डी. मायि ने कहा, “एचडीपीएस कपास खेती को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाएगा। यह मशीनीकरण को बढ़ावा देकर और इनपुट लागत को कम करके आर्थिक एवं पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ खेती को संभव बनाएगा।”

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