राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

केवीके निकोबार के मार्गदर्शन से किसानों ने अपनाई नई खेती, अब हर साल हो रही लाखों की कमाई

01 जुलाई 2026, नई दिल्ली: केवीके निकोबार के मार्गदर्शन से किसानों ने अपनाई नई खेती, अब हर साल हो रही लाखों की कमाई – वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों का सही मार्गदर्शन किसानों की आय में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसका उदाहरण अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कार निकोबार में देखने को मिला है, जहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), निकोबार के तकनीकी सहयोग से जनजातीय किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ समेकित कृषि प्रणाली अपनाई। इसका परिणाम यह हुआ कि कई किसानों की आय पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई और उनकी आजीविका भी अधिक मजबूत हुई।

पारंपरिक खेती से आगे बढ़े किसान

कार निकोबार के अधिकांश किसान वर्षों से वर्षा आधारित पारंपरिक खेती करते थे। वे मुख्य रूप से कंद फसलों पर निर्भर थे, जिससे आय सीमित रहती थी। आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, सिंचाई और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की जानकारी का अभाव होने के कारण खेती से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता था। परिवारों के भोजन में भी सब्जियों की कमी रहती थी, जिससे पोषण संबंधी चुनौतियां बनी रहती थीं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), निकोबार ने किसानों के बीच वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन, ऑन-फार्म ट्रायल (OFT), फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD) और तकनीकी मार्गदर्शन शुरू किया।

नई तकनीकों से बदली खेती की तस्वीर

केवीके ने किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कई आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा। इसके तहत उन्नत सब्जी किस्मों की खेती, समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस), रसोई एवं पोषण उद्यान, जल संचयन संरचनाएं, कम लागत वाले पॉलीहाउस, ‘द्वीप वर्टी-ग्रो’ तकनीक, जैविक इनपुट्स और छोटे कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया।

इसके साथ ही किसानों को सब्जी उत्पादन के अलावा शूकर पालन, कुक्कुट पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी खेती के साथ जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनकी आय के कई स्रोत विकसित हुए।

आय में हुआ बड़ा इजाफा

इन तकनीकों को अपनाने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। चयनित किसानों की औसत वार्षिक आय, जो पहले करीब ₹47,742 थी, बढ़कर लगभग ₹1,67,075 हो गई। वहीं लाभ-लागत अनुपात 1.75 से बढ़कर 2.92 पहुंच गया, जो खेती की बढ़ती लाभप्रदता को दर्शाता है।

कई किसानों ने बनाई सफलता की मिसाल

इस पहल से जुड़े किसान पैट्रिक जेरिमाह, एस्थर रेजिनल, लेस्ली, जैक्सन, मनोज निकोलस और जान मोहम्मद ने समेकित कृषि प्रणाली को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

इनमें किसान पैट्रिक जेरिमाह की वार्षिक आय ₹81,700 से बढ़कर ₹3,11,600 हो गई। उन्होंने उन्नत फसल किस्मों, पशुपालन, जैविक इनपुट्स और ‘द्वीप वर्टी-ग्रो’ जैसी तकनीकों का उपयोग कर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बनाया।

वहीं एस्थर रेजिनल ने सब्जी उत्पादन, पोषण उद्यान, जल संचयन और मधुमक्खी पालन को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार किया।

पोषण और जलवायु अनुकूल खेती को मिला बढ़ावा

इस पहल का लाभ केवल आय तक सीमित नहीं रहा। अब किसान अपने खेतों में बैंगन सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं और उन्हें अपने दैनिक भोजन में भी शामिल कर रहे हैं। रसोई उद्यान और वर्टी-ग्रो तकनीक की मदद से वर्षभर ताजी सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं। साथ ही समेकित कृषि प्रणाली अपनाने से किसानों की आय के स्रोत बढ़े हैं और वे मौसम तथा बाजार के उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से सामना कर पा रहे हैं।

दूसरे किसान भी अपना रहे यह मॉडल

केवीके की इस पहल से प्रेरित होकर अब तक 20 से अधिक किसान इन तकनीकों को अपना चुके हैं। आसपास के गांवों और निकोबार जिले के अन्य द्वीपों में भी इस मॉडल के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

कृषि विज्ञान केंद्र का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों, नियमित प्रशिक्षण और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि मॉडल अपनाकर जनजातीय क्षेत्रों में भी खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है। कार निकोबार का यह मॉडल आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है और यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन के साथ खेती को बेहतर आय का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।

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