भारत में जल्द शुरू होगा ग्रीन यूरिया उत्पादन, आंध्र प्रदेश में बनेगा पहला प्लांट
27 जून 2026, नई दिल्ली: भारत में जल्द शुरू होगा ग्रीन यूरिया उत्पादन, आंध्र प्रदेश में बनेगा पहला प्लांट – खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब देश में ग्रीन यूरिया (Green Urea) के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। उर्वरक मंत्रालय का कहना है कि इस क्षेत्र में निवेशकों और कंपनियों की बढ़ती रुचि से साफ है कि आने वाले समय में भारत में ग्रीन यूरिया का घरेलू उत्पादन शुरू हो सकता है। सरकार का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल उर्वरक उपलब्ध कराना, यूरिया आयात पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उत्पादन को बढ़ावा देना है।
आंध्र प्रदेश में बनेगा देश का पहला ग्रीन यूरिया प्लांट
ग्रीन यूरिया परियोजना के तहत आंध्र प्रदेश के पुडिमदाका (Pudimadaka) में प्रतिदिन 150 टन क्षमता वाला देश का पहला पायलट ग्रीन यूरिया प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना को एनटीपीसी (NTPC) की अनुसंधान एवं विकास इकाई NETRA विकसित करेगी।
यह प्लांट कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCUS) तकनीक और पानी से हाइड्रोजन उत्पादन तकनीक का उपयोग करेगा। इसे भविष्य में बड़े स्तर पर ग्रीन यूरिया उत्पादन के लिए तकनीकी मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
ग्रीन अमोनिया के कृषि परीक्षण जारी
ग्रीन यूरिया उत्पादन से पहले सरकार ग्रीन अमोनिया की उपयोगिता पर भी काम कर रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) पिछले रबी सीजन से धान, तिलहन और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों पर ग्रीन अमोनिया के परीक्षण कर रही है।
इन परीक्षणों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ग्रीन अमोनिया पारंपरिक उर्वरकों की तरह प्रभावी है या नहीं और किसानों को इसका कितना लाभ मिल सकता है।
बड़ी कंपनियों ने दिखाई रुचि
हाल ही में उर्वरक विभाग ने ग्रीन यूरिया उत्पादन को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। इसमें NTPC, SECI, प्रमुख उर्वरक निर्माता कंपनियां, तकनीकी संस्थान और इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माता शामिल हुए।
बैठक में ग्रीन यूरिया उत्पादन की तकनीक, निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई। मंत्रालय का मानना है कि उद्योग जगत की बढ़ती भागीदारी इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
सरकार देगी वित्तीय सहायता
ग्रीन यूरिया परियोजना को गति देने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से आर्थिक सहयोग भी उपलब्ध कराएगी। इस दिशा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को लगभग 19,744 करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि ग्रीन ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा मजबूत किया जा सके।
वहीं, उर्वरक विभाग ऐसा तंत्र विकसित करेगा, जिससे ग्रीन अमोनिया को देश की मौजूदा उर्वरक उत्पादन प्रणाली में आसानी से शामिल किया जा सके।
महंगा है ग्रीन अमोनिया, सरकार तैयार कर रही नई व्यवस्था
फिलहाल ग्रीन अमोनिया का उत्पादन पारंपरिक अमोनिया की तुलना में अधिक महंगा है। इसी वजह से सरकार लागत कम करने के लिए सब्सिडी और नई नीतियों पर काम कर रही है। योजना के तहत SECI ग्रीन अमोनिया की खरीद करेगी और उसे उर्वरक कंपनियों को समान कीमत पर उपलब्ध कराएगी, ताकि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
यूरिया आयात कम करने की दिशा में बड़ा कदम
भारत हर साल बड़ी मात्रा में यूरिया का आयात करता है। वर्ष 2025-26 के दौरान देश ने करीब 100 लाख टन यूरिया आयात किया था। सरकार का मानना है कि यदि देश में ग्रीन यूरिया का उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू हो जाता है, तो आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी और भारत उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
कार्बन डाइऑक्साइड का होगा उपयोग
ग्रीन यूरिया उत्पादन में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) एक महत्वपूर्ण कच्चा माल होगा। इसे थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट उद्योग और स्टील संयंत्रों से कैप्चर कर उपयोग में लाया जाएगा। एक बड़े ग्रीन यूरिया संयंत्र को सालाना करीब 10 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होगी। इससे औद्योगिक उत्सर्जन में कमी लाने और प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलेगी।
नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
केंद्र सरकार का मानना है कि ग्रीन यूरिया परियोजना देश के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके जरिए स्वच्छ ऊर्जा आधारित उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कृषि क्षेत्र में भी कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायता मिलेगी।
खेती और पर्यावरण दोनों को होगा फायदा
सरकार का मानना है कि ग्रीन यूरिया केवल उर्वरक उत्पादन का नया विकल्प नहीं है, बल्कि यह कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है। यदि आंध्र प्रदेश में बनने वाला पायलट प्लांट सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं। इससे किसानों को आधुनिक उर्वरक उपलब्ध होंगे, आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत स्वच्छ एवं आत्मनिर्भर उर्वरक उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाएगा।
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