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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

वैश्विक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में मछली धोखाधड़ी व्यापक, 20% व्यापार प्रभावित

15 फरवरी 2026, रोम: वैश्विक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में मछली धोखाधड़ी व्यापक, 20% व्यापार प्रभावित – संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर के बाजारों में मछली से संबंधित धोखाधड़ी (फिश फ्रॉड) व्यापक रूप से फैल रही है और इसे रोकने के लिए नई तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।

FAO द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट “मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में खाद्य धोखाधड़ी” संगठन के मत्स्य एवं जलीय कृषि विभाग तथा खाद्य एवं कृषि में परमाणु तकनीकों के संयुक्त FAO/IAEA केंद्र के सहयोग से तैयार की गई है। यह रिपोर्ट मछली धोखाधड़ी के विभिन्न रूपों और उनकी पहचान के लिए आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

20 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित होने की आशंका

करीब 195 अरब डॉलर मूल्य के वैश्विक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में धोखाधड़ी की वास्तविक सीमा का कोई आधिकारिक अनुमान उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि लगभग 20 प्रतिशत व्यापार किसी न किसी प्रकार की धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकता है। यह स्तर मांस, फल और सब्जियों की तुलना में अधिक है, जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र में प्रजातियों की अत्यधिक विविधता है।

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रिपोर्ट के अनुसार मछली धोखाधड़ी का अर्थ “दूसरों को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया जानबूझकर कार्य” है। यह जैव विविधता, मानव स्वास्थ्य और आर्थिक व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

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मछली धोखाधड़ी के प्रमुख प्रकार

रिपोर्ट में मछली धोखाधड़ी के कई प्रकार बताए गए हैं, जिनमें मिलावट (टूना को ताजा दिखाने के लिए रंग मिलाना), नकली उत्पाद (स्टार्च आधारित नकली झींगा), सिमुलेशन (सुरिमी को केकड़े के मांस के रूप में बेचना), गलत ब्रांडिंग, प्रजाति बदलकर बेचना (तिलापिया को रेड स्नैपर बताना), गलत लेबलिंग, अवैध वितरण, अधिक मछली पकड़ना और चोरी शामिल हैं।

बेहतर लेबलिंग और ट्रेसबिलिटी की जरूरत

रिपोर्ट में लेबलिंग मानकों को एकरूप बनाने, वैज्ञानिक नामों का उल्लेख अनिवार्य करने और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की गई है। धोखाधड़ी की पहचान के लिए एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट असे, स्थिर समस्थानिक विश्लेषण और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग प्रभावी बताया गया है। इसके अलावा पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरोसेंस और मशीन लर्निंग आधारित मॉडल भी निगरानी में सहायक हो सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर व्यापक समस्या

हालांकि दुनिया भर में हजारों अध्ययन मछली धोखाधड़ी की व्यापकता को दर्शाते हैं, लेकिन इसके वास्तविक स्तर का आकलन करना कठिन है। विश्व में 12,000 से अधिक समुद्री प्रजातियों का उपभोग, धोखाधड़ी के विभिन्न प्रकार और मानकीकृत नियमों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

कुछ अध्ययनों के अनुसार रेस्तरां में परोसे जाने वाले 30 प्रतिशत तक समुद्री उत्पाद गलत लेबल वाले हो सकते हैं। रिपोर्ट में लैटिन अमेरिका के बाजारों, चीन के समुद्री भोजन प्रतिष्ठानों और यूरोपीय संघ के डिब्बाबंद टूना उत्पादों सहित कई उदाहरणों का उल्लेख किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में बिकने वाले जलीय उत्पादों का लगभग एक-तिहाई पैकेज पर लिखे विवरण से अलग पाया गया, जबकि आयातित उत्पादों में से एक प्रतिशत से भी कम की जांच होती है।

स्वास्थ्य और आर्थिक जोखिम

कुछ समुद्री उत्पादों का गलत तरीके से उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, विशेष रूप से जब उन्हें कच्चा खाया जाए या बार-बार फ्रीज किया जाए। हालांकि आर्थिक लाभ मछली धोखाधड़ी का सबसे बड़ा कारण है। उदाहरण के लिए, अटलांटिक सैल्मन को पैसिफिक सैल्मन बताकर बेचने से प्रति किलोग्राम लगभग 10 डॉलर तक अतिरिक्त लाभ हो सकता है।

इसी तरह फार्म में पाली गई सीबास मछली को स्थानीय या जंगली बताकर अधिक कीमत पर बेचा जाता है। मछली का वजन बढ़ाने के लिए उसमें पानी मिलाना भी एक सामान्य धोखाधड़ी है। कुछ मामलों में उत्पाद के भौगोलिक स्रोत को छिपाने या निर्धारित सीमा से अधिक मछली पकड़ने को छिपाने के लिए भी ऐसी गतिविधियां की जाती हैं, जिससे मत्स्य संसाधनों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

धोखाधड़ी रोकने के प्रयास

रिपोर्ट में बताया गया है कि डीएनए बारकोडिंग जैसी तकनीकों से गलत लेबलिंग की पहचान की जा सकती है। लॉस एंजिल्स में किए गए एक अध्ययन में प्रसंस्करण इकाइयों में धोखाधड़ी कम, किराना दुकानों में मध्यम और सुशी रेस्तरां में अधिक पाई गई। शिक्षा अभियान और नियमित परीक्षण के माध्यम से एक स्थानीय पहल ने 10 वर्षों में गलत लेबलिंग को दो-तिहाई तक कम कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार मछली और अन्य खाद्य धोखाधड़ी को समाप्त करने के लिए रोकथाम, प्रभावी प्रवर्तन और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। FAO और कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग खाद्य धोखाधड़ी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित कर रहे हैं, जबकि FAO सदस्य देशों को परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है।

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