राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसान आंदोलन: “हाईवे खाली करो या आंदोलन रोको, सुप्रीम कोर्ट ने कहा “शांतिपूर्ण समाधान ज़रूरी”

14 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: किसान आंदोलन: “हाईवे खाली करो या आंदोलन रोको, सुप्रीम कोर्ट ने कहा “शांतिपूर्ण समाधान ज़रूरी” – पंजाब-हरियाणा सीमा पर हाईवे जाम कर बैठे किसानों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसान कर्ज़ माफी, पेंशन और अन्य मांगों को लेकर चल रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। इसी बीच, किसान नेता जगजीत सिंह दलेवाल के 18 दिन से जारी अनशन ने इस आंदोलन को और गहरा बना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में बड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत द्वारा नियुक्त उच्च स्तरीय समिति को निर्देश दिया है कि वे किसानों को आंदोलन को अस्थायी रूप से रोकने या हाईवे से हटाने के लिए मनाने की कोशिश करें। अदालत ने साथ ही दलेवाल की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और उनकी 24×7 मेडिकल देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, “किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह गांधीवादी तरीकों से होना चाहिए। कोई बल प्रयोग न हो और शांति बनी रहे।”

पंजाब सरकार का आर्थिक पक्ष

पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने आंदोलन के चलते हो रहे आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हाईवे ब्लॉकेज, खासकर खनौरी-शंभू हाईवे पर, राज्य की वित्तीय स्थिति को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है।

हालांकि, अदालत ने सीधे निर्देश देने से परहेज करते हुए कहा कि आंदोलन की मूल समस्या का समाधान तलाशना जरूरी है। “हाईवे जाम की एक वजह है, और इसे समझने और हल करने की जरूरत है। हमारा उद्देश्य समिति के जरिए समाधान निकालना है। किसानों को उनकी मांगों पर कार्रवाई तक आंदोलन रोकने पर विचार करना चाहिए,” अदालत ने कहा।

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समिति को सौंपी गई जिम्मेदारी

अदालत द्वारा नियुक्त समिति, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति नवाब सिंह कर रहे हैं, किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता का काम करेगी। समिति के अध्यक्ष ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द प्रगति की रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

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अदालत ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि किसान अपना आंदोलन पूरी तरह खत्म करें। लेकिन उन्हें अस्थायी रूप से इसे रोकने या स्थानांतरित करने पर विचार करना चाहिए ताकि सरकार के फैसलों पर नजर रखी जा सके।”

जगजीत सिंह दलेवाल, जो 26 नवंबर से अनशन पर हैं, उनकी सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। अदालत ने पंजाब और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि उनकी जिंदगी बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। “उनकी जिंदगी अनमोल है। सरकारें उन्हें जबरन अनशन तोड़ने के लिए मजबूर न करें, लेकिन उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखें,” अदालत ने कहा।

किसानों की मुख्य मांगें

शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे किसान मुख्य रूप से निम्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं:

  • MSP की कानूनी गारंटी
  • किसान कर्ज़ माफी और पेंशन
  • 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा पीड़ितों को न्याय
  • बिजली दरों में स्थिरता
  • पुलिस केस की वापसी
  • भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की बहाली
  • 2020-21 आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा

किसानों का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार और किसानों के बीच संवाद पर जोर

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वे बिना किसी दमनकारी उपाय के किसानों से संवाद बढ़ाएं।

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अदालत ने कहा, “आंदोलनकारी किसानों को विश्वास में लेकर उनकी मांगों पर चर्चा की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदर्शन शांति और कानून व्यवस्था को बाधित न करे।”

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब-हरियाणा में इस आंदोलन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। अब देखना होगा कि अदालत द्वारा नियुक्त समिति इस गतिरोध को समाप्त करने में कितनी सफल होती है।

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