ICAR की तकनीक से परती जमीन पर उगाया ‘असम नींबू’, सिर्फ 0.2 हेक्टेयर से किसान ने कमाए ₹36,000; अब करेंगे खेती का विस्तार
30 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR की तकनीक से परती जमीन पर उगाया ‘असम नींबू’, सिर्फ 0.2 हेक्टेयर से किसान ने कमाए ₹36,000; अब करेंगे खेती का विस्तार – अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले के बासर सर्किल के गोरी-II गांव के 53 वर्षीय प्रगतिशील किसान श्री मिनजो बासर ने वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक बागवानी अपनाकर वर्षों से परती पड़ी झूम भूमि को आय का जरिया बना दिया है। आईसीएआर-एपी सेंटर, बासर के तकनीकी सहयोग से उन्होंने असम नींबू की खेती शुरू की, जिससे उन्हें पहले ही उत्पादन वर्ष में अच्छा मुनाफा मिला है।
बाजार की मांग को देखते हुए शुरू की खेती
श्री मिनजो बासर ने देखा कि जिले में असम नींबू की मांग लगातार बढ़ रही है और यह फल असम से लाकर ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। इसके अलावा असम नींबू की खासियत यह है कि यह अन्य खट्टे फलों की तुलना में अधिक सहनशील होता है और लगभग पूरे वर्ष फल देता है। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने कई वर्षों से अनुपयोगी पड़ी अपनी पुरानी झूम भूमि पर इसकी खेती करने का निर्णय लिया।
ICAR से मिला तकनीकी सहयोग
खेती शुरू करने से पहले उन्होंने आईसीएआर-एपी सेंटर, बासर से संपर्क किया। यहां उन्हें जनजातीय उपयोजना (Tribal Sub-Plan – TSP) के तहत तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्तायुक्त पौधे उपलब्ध कराए गए। केंद्र ने 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में 3×3 मीटर की दूरी पर लगाने के लिए असम नींबू के 200 पौधे दिए। साथ ही जैविक तरीके से कीट एवं रोग प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे बाग की बेहतर देखभाल संभव हो सकी।
अंतरवर्तीय खेती से बढ़ाई आय
बाग के शुरुआती वर्षों में अतिरिक्त आय के लिए श्री बासर ने अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) अपनाई। उन्होंने नींबू के पौधों के बीच की खाली जगह में सोयाबीन जैसी अल्पावधि दलहनी फसलें और मौसमी सब्जियां उगाईं। इससे न केवल भूमि का बेहतर उपयोग हुआ, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी मिली।
पहले उत्पादन में ही मिला अच्छा मुनाफा
जुलाई 2026 में पांच वर्ष पुराने इस बाग से लगभग 1,200 किलोग्राम असम नींबू का उत्पादन हुआ। स्थानीय बाजार में ₹30 प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री करने पर उन्हें ₹36,000 की सकल आय प्राप्त हुई। उत्पादन पर करीब ₹14,000 का खर्च आया, जिसके बाद उन्हें ₹22,000 का शुद्ध लाभ हुआ। इस खेती में लाभ-लागत अनुपात (Benefit-Cost Ratio) 2.57 दर्ज किया गया, जो इसकी आर्थिक व्यवहार्यता को दर्शाता है।
आगे करेंगे खेती का विस्तार
सफलता से उत्साहित श्री मिनजो बासर अब असम नींबू के साथ-साथ एसिड लाइम (कागजी नींबू) की खेती का भी विस्तार करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य स्थानीय बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करना और बागवानी के माध्यम से अपनी आय में और वृद्धि करना है। आईसीएआर-एपी सेंटर, बासर का तकनीकी सहयोग उन्हें आगे भी मिलता रहेगा।
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
श्री मिनजो बासर की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो अनुपयोगी भूमि को भी लाभदायक खेती में बदला जा सकता है। उनका प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है।
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