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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सोशल मीडिया में दूध में मिलावट पर झूठी खबर, उपभोक्ताओं में फैला रही दहशत: पशुपालन और डेयरी मंत्रालय

21 जनवरी 2023, नई दिल्ली: सोशल मीडिया में दूध में मिलावट पर झूठी खबर, उपभोक्ताओं में फैला रही दहशत: पशुपालन और डेयरी मंत्रालय – पशुपालन, डेयरी मंत्रालय के संज्ञान में आया हैं  कि भारत सरकार को WHO की एक सलाह के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि दूध और दूध उत्पादों में मिलावट की तुरंत जाँच नहीं की गई तो वर्ष 2025 तक 87% नागरिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होंगे। इस तरह की झूठी सूचनाओं के प्रसार से उपभोक्ताओं में अनावश्यक घबराहट पैदा हो रही है।

विभाग ने इस संबंध में सूचित किया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के परामर्श से विभाग में इस मामले की पहले ही जांच की जा चुकी है। भारत में WHO के देश कार्यालय ने FSSAI से पुष्टि की कि WHO द्वारा भारत सरकार को कभी भी ऐसी कोई सलाह जारी नहीं की गई है।

विभाग ने दोहराया है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर इस तरह की झूठी सूचनाओं को प्रसारित किया जा रहा है, इसे किसी भी तरह से महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) और FSSAI देश भर के उपभोक्ताओं को सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता वाले दूध की आपूर्ति में मदद करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।

इसके अलावा, विभाग द्वारा प्रकाशित बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2021 के अनुसार, 2018-19 के दौरान देश में दैनिक दूध उत्पादन 51.4 करोड़ किलोग्राम प्रति दिन था, न कि 14 करोड़ लीटर प्रति दिन, जैसा कि उपरोक्त  न्यूज रिपोर्ट में बताया गया है। विभाग ने 2019 के दौरान भारत में दूध और दुग्ध उत्पाद की मांग पर एक अध्ययन भी किया था। अध्ययन के अनुसार, 2019 में अखिल भारतीय स्तर पर दूध और दुग्ध उत्पादों की कुल खपत 162.4 मिलियन मीट्रिक टन (44.50 करोड़ किलोग्राम प्रति दिन) थी। इस प्रकार, देश में दुग्ध उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

बाजार में बेचे जाने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित और लागू मानकों द्वारा नियंत्रित होती है। FSSAI द्वारा किए गए पिछले राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय दुग्ध सुरक्षा और गुणवत्ता सर्वेक्षण (NMQS-2018) में, लिए गए दूध के 6,432 नमूनों में से केवल 12 नमूने (0.19%) मिलावटी पाए गए जो दूध को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित बनाते हैं। हालांकि, यह एक चिंता का विषय है लेकिन यह इस धारणा से बहुत दूर है कि देश में तरल दूध में बड़े पैमाने पर मिलावट होती है।

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