सरसों की कीमत गिरी तो भी मिलेगा पैसा: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए भावांतर भुगतान मंजूर
13 मार्च 2026, नई दिल्ली: सरसों की कीमत गिरी तो भी मिलेगा पैसा: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए भावांतर भुगतान मंजूर – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर राज्य के कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की।
बैठक में मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और केंद्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान सरसों और दलहन की खरीदी व्यवस्था, ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और राज्य में कृषि उत्पादन को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार किया गया।
सरसों खरीदी के लिए भावांतर भुगतान को मंजूरी
बैठक में मध्यप्रदेश में सरसों खरीदी से जुड़े लंबित मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरसों की खरीदी के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत भुगतान की अनुमति दी।
इसके साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि भुगतान प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए ताकि किसानों को समय पर लाभ मिल सके। इस निर्णय से राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है और किसानों को बाजार मूल्य और निर्धारित मूल्य के बीच अंतर की भरपाई मिल सकेगी।
तुअर की 100 प्रतिशत खरीदी का आश्वासन
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को तुअर (अरहर) की 100 प्रतिशत खरीदी से संबंधित स्वीकृति पत्र भी सौंपा।
इस निर्णय के बाद राज्य में तुअर की खेती करने वाले किसानों की पूरी उपज सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत खरीदी जा सकेगी। इससे किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम से राहत मिलेगी और उनकी आय में स्थिरता आने की संभावना है।
कृषि योजनाओं और लंबित मामलों की समीक्षा
बैठक में राज्य से जुड़ी कई प्रमुख कृषि योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें सरसों और सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान, राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत मूंग और उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम और मनरेगा के तहत लंबित मजदूरी व सामग्री भुगतान जैसे मुद्दे शामिल रहे।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि किसानों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
दलहन और तिलहन उत्पादन के लिए दीर्घकालिक रणनीति
बैठक में मध्यप्रदेश में दलहन और तिलहन उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य सरकार की टीमों को निर्देश दिए कि वे मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और ऑयल पाम जैसी फसलों के लिए फसलवार रणनीति तैयार करें। इसका उद्देश्य राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और देश में खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ाना है।
फसल बीमा में तकनीकी सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संदर्भ में भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोयाबीन जैसी फसलों के नुकसान का आकलन केवल सैटेलाइट आधारित आंकड़ों पर निर्भर होकर नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि फसल कटाई प्रयोगों और रिमोट सेंसिंग तकनीक को साथ में उपयोग कर वास्तविक उत्पादन का आकलन किया जाए, ताकि किसानों के बीमा दावों का सही मूल्यांकन हो सके और भुगतान में किसी तरह की कमी न आए।
मनरेगा के क्रियान्वयन पर चर्चा
बैठक में मनरेगा (MGNREGA) के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य में ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने, जॉब कार्ड की शुद्धता सुनिश्चित करने, सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने और लंबित कार्रवाई रिपोर्ट को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
इन कदमों से गांवों में जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना और रोजगार सृजन से जुड़े कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण पर जोर
प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 2018 की आवास प्लस सूची में शामिल सभी पात्र परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई।
बैठक में यह सहमति बनी कि डुप्लीकेट जॉब कार्ड और डेटा एंट्री से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर कर शेष पात्र परिवारों को भी जल्द आवास स्वीकृत किए जाएं।
ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता पर चर्चा
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और मानकों पर भी चर्चा हुई।
राज्य सरकार ने कुछ क्षेत्रों में भारी यातायात और खनन गतिविधियों के कारण सड़कों की चौड़ाई और मोटाई बढ़ाने की आवश्यकता बताई। केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया कि राज्य की इस मांग को तकनीकी और वित्तीय स्तर पर सकारात्मक दृष्टि से देखा जाएगा।
महिला स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा
बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत महिलाओं और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को ग्रामीण महिलाओं के लिए सूक्ष्म उद्यम, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके I
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