भारत में एथेनॉल मिश्रण ~20% के करीब, कच्चे तेल के आयात में ₹1.36 लाख करोड़ की बचत: आईएसएमए
17 मार्च 2026, नई दिल्ली: भारत में एथेनॉल मिश्रण ~20% के करीब, कच्चे तेल के आयात में ₹1.36 लाख करोड़ की बचत: आईएसएमए – भारतीय शुगर एवं बायो-एनर्जी निर्माता संघ (ISMA) ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में बायोफ्यूल की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया है।
संघ के मुताबिक, एथेनॉल मिश्रण का स्तर वर्ष 2014 में लगभग 1.5% से बढ़कर वर्ष 2025 में करीब 18–19% तक पहुंच गया है, और भारत ने 20% मिश्रण (Blending Target) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है। इसी अवधि में एथेनॉल की आपूर्ति (Ethanol Supply) भी 2014 के 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 660 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है।
इस कार्यक्रम का आर्थिक प्रभावभी काफी महत्वपूर्ण रहा है। आईएसएमए के अनुसार, इससे किसानों को लगभग ₹1.18 लाख करोड़ का भुगतान हुआ है, जबकि कच्चे तेल के आयात में कमी के चलते करीब ₹1.36 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से तेल आयात पर निर्भर देशों की संवेदनशीलता उजागर होती है। ऐसे में, गन्ने से उत्पादित एथेनॉल जैसे बायोफ्यूल आयात पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान प्रदान करते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने बायोफ्यूल इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि यह पहल न केवल ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण में सहायक होगी, बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक विकास के अवसर भी पैदा करेगी।
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