राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

El-Nino से बढ़ी चिंता, 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश का खतरा; केंद्र ने बनाई मॉनिटरिंग सेल

24 जून 2026, नई दिल्ली: El-Nino से बढ़ी चिंता, 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश का खतरा; केंद्र ने बनाई मॉनिटरिंग सेल – अल नीनो और कमजोर मानसून की संभावित स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), आईसीएआर-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कर देशभर की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि, सिंचाई, बीज, उर्वरक, पशुधन और किसानों की वित्तीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

43 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई चिंता

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी देर से आगे बढ़ रहा है और अब तक देश में लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 2 जुलाई तक भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि पहले से वैज्ञानिक योजना और जमीनी तैयारी पर काम कर रही है, ताकि किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

12 राज्यों के 315 जिलों की पहचान

कृषि मंत्रालय और आईसीएआर द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 12 राज्यों के 315 जिलों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इन 315 जिलों में से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से कम है। 76 जिलों को मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां 25 से 50 प्रतिशत तक सिंचाई उपलब्ध है। वहीं 128 जिलों को निम्न प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां बांधों और अन्य स्रोतों से अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।

जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं होंगी लागू

संभावित संकट से निपटने के लिए आईसीएआर और आईसीएआर-CRIDA ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं (DACP) तैयार की हैं। इन योजनाओं में कम बारिश की स्थिति में वैकल्पिक फसलों का चयन, फसल बदलाव की रणनीति, जल प्रबंधन और किसानों की आय सुरक्षित रखने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि इन योजनाओं को केवल दस्तावेज तक सीमित न रखा जाए, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट कर जरूरत पड़ते ही लागू किया जाए।

जल संरक्षण को बनाया गया सर्वोच्च एजेंडा

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए जल संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पानी की हर बूंद कीमती है और उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि तालाब, जलाशय, खेत-तालाब, नाले, चेक डैम, स्टॉप डैम और बोरी बंधान जैसी संरचनाओं की तत्काल मरम्मत और मजबूती का काम किया जाए। मनरेगा तथा अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के तहत जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

संवेदनशील जिलों में पेयजल उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और जरूरत पड़ने पर अधिक पानी वाले क्षेत्रों से कम पानी वाले क्षेत्रों तक जल आपूर्ति की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

फसल रणनीति में होगा बदलाव

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल रणनीति बदलना समय की जरूरत है। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल किस्में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

उन्होंने फसल विविधीकरण, मिश्रित खेती और इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही, क्योंकि ये फसलें कम नमी की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बारिश में अत्यधिक देरी होती है तो राज्यों को तत्काल वैकल्पिक फसल योजनाएं लागू करनी होंगी। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि खेत खाली नहीं रहने दिए जाएंगे और उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार खेती जारी रखी जाएगी।

बीज और उर्वरकों का अतिरिक्त भंडार तैयार

खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। लगभग 1 प्रतिशत अतिरिक्त बीज विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए आरक्षित रखा गया है जहां पुनर्बुवाई की आवश्यकता पड़ सकती है।

उन्होंने बताया कि यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक है। कमजोर मानसून वाले जिलों में इनकी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अलग से निगरानी की जा रही है।

किसानों को दी गई महत्वपूर्ण सलाह

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। उन्होंने कहा कि कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर संचयी वर्षा होने और खेत में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए। कम बारिश में जल्दबाजी से बोया गया बीज खराब हो सकता है और पुनर्बुवाई की नौबत आ सकती है।

731 कृषि विज्ञान केंद्र देंगे मार्गदर्शन

कृषि मंत्री ने बताया कि देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि मौसम सलाह इकाइयों को किसानों तक लगातार वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि हर किसान को समय पर मौसम, फसल प्रबंधन और कृषि तकनीकों से जुड़ी जानकारी मिल सके।

पशुधन और चारे के लिए भी विशेष तैयारी

कमजोर मानसून की स्थिति में चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने पशुपालकों के लिए भी विशेष योजना बनाई है। जिन क्षेत्रों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां से जरूरत वाले क्षेत्रों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

चारा भंडारण, वैकल्पिक चारा स्रोत और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है। साथ ही चारे की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी तंत्र भी मजबूत किया जाएगा।

PMFBY, KCC और PM-Kisan बनेंगे सुरक्षा कवच

कृषि मंत्री ने कहा कि केवल फसल और पानी की तैयारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके। जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नहीं है, उनके कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की राशि का उपयोग किसान बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों के लिए कर सकते हैं। PMFBY, KCC और PM-Kisan मिलकर इस चुनौतीपूर्ण समय में किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेंगे।

केंद्र ने बनाई ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’

स्थिति की लगातार निगरानी के लिए दिल्ली में ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ का गठन किया गया है। ये इकाइयां मानसून की प्रगति, फसल बुवाई, फसलों की स्थिति, बीज-उर्वरक आपूर्ति और बाजार संकेतकों पर लगातार नजर रखेंगी।

राज्यों को भी कंट्रोल रूम स्थापित करने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकांश राज्यों ने अपने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सचिव स्तर पर हर सप्ताह समीक्षा बैठक हो रही है और वह स्वयं भी प्रत्येक मंगलवार को स्थिति की समीक्षा करते हैं।

खाद्य सुरक्षा पर तत्काल कोई खतरा नहीं

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में चावल और गेहूं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। 2026 खरीफ सीजन के लिए लगभग 176 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मजबूत बफर स्टॉक और बेहतर तैयारी के कारण खाद्य सुरक्षा को लेकर फिलहाल कोई तत्काल खतरा नहीं है।

किसानों से की अपील

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से घबराने के बजाय तैयारी पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान, जिला प्रशासन और किसान मिलकर काम करेंगे तो अल नीनो जैसी चुनौती का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकेगा। जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखा जाएगा और कृषि क्षेत्र को किसी बड़े संकट से बचाया जा सकेगा।

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