केंद्र ने पांच राज्यों को दिए 1,283 करोड़ रुपये, सिंचाई और कृषि मशीनीकरण को मिलेगी रफ्तार
04 सितंबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र ने पांच राज्यों को दिए 1,283 करोड़ रुपये, सिंचाई और कृषि मशीनीकरण को मिलेगी रफ्तार – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद केंद्र सरकार ने पांच राज्यों के लिए 1,283.11 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी है। यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के अंतर्गत दूसरी किस्त के तौर पर स्वीकृत हुई है।
आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तराखंड और त्रिपुरा को यह राशि खेती से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों के लिए मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पांचों राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें सिंचाई, मशीनीकरण, उन्नत तकनीक और फसल विविधीकरण से जुड़े कामों पर चर्चा हुई। कृषि मंत्रालय के मुताबिक इसका मकसद खेती की लागत घटाना, उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है।
किस राज्य को कितनी राशि, किस काम के लिए
इस किस्त में सबसे ज्यादा 409.40 करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश को मिले हैं, जहां सूक्ष्म सिंचाई और कृषि मशीनीकरण पर जोर रहेगा। तमिलनाडु को 355.88 करोड़ रुपये मिले हैं और वहां सूक्ष्म सिंचाई के साथ तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर काम होगा।
ओडिशा को 219.65 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनसे मशीनीकरण और कृषि विस्तार सेवाएं मजबूत होंगी। उत्तराखंड को 106.67 करोड़ रुपये कृषि बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक खेती के लिए मिले हैं, जबकि त्रिपुरा को 91.51 करोड़ रुपये बांस मिशन, ऑयल पाम और मशीनीकरण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए आवंटित हुए हैं।
मंत्रालय का कहना है कि इन योजनाओं से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, आधुनिक कृषि यंत्रों तक किसानों की पहुंच बढ़ेगी और मिट्टी की जांच व डिजिटल कृषि सेवाएं मजबूत होंगी।
किसानों और कारोबार के लिए मायने
फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसान परंपरागत फसलों के अलावा दूसरी लाभकारी फसलों की तरफ बढ़ सकेंगे। यह मंजूरी दिखाती है कि केंद्र सरकार राज्यों के जरिए जमीनी स्तर पर सिंचाई और मशीनीकरण के बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखे हुए है।
बीज, उर्वरक और कृषि यंत्र क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए यह संकेत है कि आने वाले महीनों में इन पांच राज्यों में मांग बढ़ सकती है, खासकर सूक्ष्म सिंचाई उपकरण और छोटे कृषि यंत्रों की। भारत जैसे बड़े कृषि-निर्यातक देश में राज्य-स्तरीय निवेश का यह पैटर्न वैश्विक इनपुट कंपनियों के लिए भी बाजार के रुझान समझने में मददगार है।
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