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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

केंद्र सरकार लाई नई यूरिया निवेश नीति, देश में बढ़ेगा उत्पादन, किसानों को होगी समय पर खाद उपलब्ध

17 जुलाई 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार लाई नई यूरिया निवेश नीति, देश में बढ़ेगा उत्पादन, किसानों को होगी समय पर खाद उपलब्ध – किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने और आयात पर देश की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (National Investment Policy for Urea-2026 – NIPU-2026) को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में इस नीति को स्वीकृति दी गई।

नई नीति के तहत देश में नई गैस आधारित यूरिया निर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी और भविष्य में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर हो सकेगी।

सरकार का कहना है कि नई नीति निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक होगी। इसमें स्थायी और परिवर्ती लागत को अलग-अलग रखा गया है, निवेश पर 12 से 16 प्रतिशत तक प्रतिफल (Return on Equity) का प्रावधान किया गया है तथा विदेशी मुद्रा विनिमय दर के जोखिम को कम करने के लिए भी व्यवस्था की गई है। इन प्रावधानों से प्रत्येक नई परियोजना पर लगभग 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है।

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किसानों को क्या होगा लाभ?

देश में यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि घरेलू उत्पादन अभी भी पूरी आवश्यकता को पूरा नहीं कर पा रहा है। इसके कारण हर वर्ष बड़ी मात्रा में यूरिया का आयात करना पड़ता है। नई उत्पादन इकाइयों के स्थापित होने से भविष्य में देश में यूरिया की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे किसानों को बुवाई और फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में खाद मिलने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आने की उम्मीद है।

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घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों या आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी कम होगा।

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में देश में 33 यूरिया उत्पादन इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित एवं पुनर्मूल्यांकित क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी)है। इसके बावजूद मांग और उत्पादन के बीच अंतर बना हुआ है, जिसकी पूर्ति आयात के माध्यम से की जाती है।

नई नीति की जरूरत क्यों पड़ी?

उर्वरक विभाग ने बताया कि वर्ष 2012 में लागू नई निवेश नीति (NIP-2012) के तहत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए थे। इनमें चार सार्वजनिक उपक्रमों के संयुक्त उपक्रम तथा दो निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित किए गए थे। यह नीति वर्ष 2019 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद नए संयंत्र लगाने के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसके चलते नई निवेश नीति लाने की आवश्यकता महसूस की गई।

सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरक उत्पादन क्षमता बढ़ाने, किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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