राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी

29 मई 2025, नई दिल्ली: 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी – केन्द्र की मोदी सरकार ने देश के किसानों के लिए एक बार फिर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को मंजूरी देने का. निश्चित ही इस निर्णय से देश के किसान प्रसन्न होंगे क्योंकि किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज को बेचते है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सत्र 2025-26 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है.

सरकार ने विपणन सत्र 2025-26 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके. पिछले साल की तुलना में एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि नाइजर सीड (820 रुपये प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, इसके बाद रागी (596 रुपये प्रति क्विंटल), कपास (589 रुपये प्रति क्विंटल) और तिल (579 रुपये प्रति क्विंटल) के लिए एमएसपी में वृद्धि की गई है.

इस बार सबसे ज्यादा एमएसपी में बढ़ोतरी नाइजर सीड (रामतिल) में 820 रुपये प्रति क्विंटल की गई है. इसके बाद रागी में 596 रुपये, कपास में 589 रुपये और तिल में 579 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. सभी खरीफ फसलों की एमएसपी बढ़ाकर किसानों को लागत का कम से कम 1.5 गुना मुनाफा देने की नीति को मजबूत किया गया है.

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प्रेस ब्रीफिंग में सरकार ने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार में और बीजेपी सरकार में धान की कितनी खरीद हुई और किसानों को एमएसपी का कितना पैसा मिला. 2004 से 2014 तक 4590 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई जबकि 2014 से 2024-25 तक 7608 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई. तब की सरकार में 14 खरीफ फसलों की खरीद 4679 एलएमटी हुई जबकि अब की सरकार में यह खरीद 7871 लाख मीट्रिक टन हुई.

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कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2004-05 से 2013-14 तक धान की एमएसपी के लिए किसानों को 4.44 लाख करोड़ रुपये दिए गए जबकि 2014-15 से 2024-25 में 14.16 लाख करोड़ रुपये दिए गए. 14 खरीफ फसलों के लिए कांग्रेस सरकार ने किसानों को 4.75 लाख करोड़ रुपये दिए जबकि मौजूदा मोदी सरकार ने 16.35 लाख करोड़ रुपये दिए हैं.

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