चीन से आने वाले खरपतवारनाशी ग्लूफोसिनेट पर भारत में बढ़ सकती है एंटी-डंपिंग ड्यूटी, किसानों पर क्या होगा असर?
07 सितंबर 2026, नई दिल्ली: चीन से आने वाले खरपतवारनाशी ग्लूफोसिनेट पर भारत में बढ़ सकती है एंटी-डंपिंग ड्यूटी, किसानों पर क्या होगा असर? – भारत में चीन से आयात होने वाले ग्लूफोसिनेट और इसके साल्ट्स पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसका सीधा असर किसानों पर यह हो सकता है कि ग्लूफोसिनेट आधारित खरपतवारनाशी उत्पादों की कीमतों पर कुछ बढ़ोतरी का दबाव आए। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसानों को कितना अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने 1 सितंबर 2026 को जारी अपने अंतिम निष्कर्षों में मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी को बढ़ाकर 5,004 डॉलर प्रति मीट्रिक टन करने की सिफारिश की है। वर्तमान में यह ड्यूटी 2,998 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है।
पहले समझें—एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है?
सरल भाषा में, एंटी-डंपिंग ड्यूटी एक अतिरिक्त आयात शुल्क है, जिसे तब लगाया जाता है जब किसी देश से कोई उत्पाद ऐसी कीमत पर भारत में आ रहा हो जिससे घरेलू उद्योग को नुकसान होने का खतरा हो।
ग्लूफोसिनेट के मामले में भारत ने मई 2025 में चीन से आने वाले उत्पाद पर 2,998 डॉलर/टन की ड्यूटी लगाई थी। इसके बाद DGTR ने जांच की कि क्या चीनी निर्यातकों ने अपनी कीमतें इतनी कम कर दीं कि इस ड्यूटी का असर काफी हद तक खत्म हो गया।
DGTR ने ड्यूटी बढ़ाने की सिफारिश क्यों की?
जांच में DGTR ने पाया कि ग्लूफोसिनेट की भारत को वास्तविक निर्यात कीमत में लगभग 46% की गिरावट आई। वहीं, उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कुल कीमतों में लगभग 7.4% की ही कमी हुई।
यानी, DGTR के अनुसार ग्लूफोसिनेट की निर्यात कीमत में गिरावट कच्चे माल की लागत में आई गिरावट के अनुपात में नहीं थी। इसी आधार पर प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि चीन के निर्यातकों ने मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी का प्रभाव अपनी कम निर्यात कीमतों के जरिए काफी हद तक सोख लिया।
जांच में यह भी पाया गया कि डंपिंग मार्जिन 20-30% से बढ़कर 85-95% की रेंज में पहुंच गया।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह फैसला सीधे किसानों पर कोई नया शुल्क नहीं लगाता। ड्यूटी आयातित ग्लूफोसिनेट पर लागू होगी। लेकिन अगर आयातित तकनीकी ग्लूफोसिनेट की लागत बढ़ती है, तो इसका असर आगे चलकर खरपतवारनाशी बनाने वाली कंपनियों और बाजार में बिकने वाले तैयार उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि, किसान को कितना अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बढ़ी हुई आयात लागत को किस हद तक अपने ऊपर लेती हैं और किस हद तक उत्पाद की कीमत में शामिल करती हैं।
जांच के दौरान घरेलू उद्योग ने दावा किया था कि ड्यूटी का अंतिम उपभोक्ता पर प्रति यूनिट प्रभाव सीमित होगा, जबकि कुछ अन्य पक्षों ने चिंता जताई थी कि अधिक ड्यूटी से डाउनस्ट्रीम उद्योगों, किसानों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है।
अभी तुरंत कीमत बढ़ना जरूरी नहीं
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि DGTR ने केवल ड्यूटी बढ़ाने की सिफारिश की है। नई दर तभी प्रभावी होगी जब केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी।
इसके अलावा, नई ड्यूटी को पिछली तारीख से लागू करने की सिफारिश नहीं की गई है। यह केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने की तारीख से आगे के आयात पर लागू होगी।
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