राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कृषि की होगी अहम भूमिका

24 जून 2025, नई दिल्ली: भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कृषि की होगी अहम भूमिका – नीति आयोग की 10वीं संचालन परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया है। 2047 में देश अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ भी मनाएगा। कृषि क्षेत्र नवाचार, आर्थिक ताकत और पर्यावरणीय वहनीयता के माध्यम से इस लक्ष्य की पूर्ति में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं और इसने भारत को खाद्यान्न की कमी का सामना करने वाले देश से खाद्य अधिशेष राष्ट्र बना दिया है। पूरी दुनिया कृषि क्षेत्र में भारत की प्रगति का लोहा मान रही है। खाद्यान्न उत्पादन में शानदार प्रगति हुई है। 1950-51 में देश में खाद्यान्न उत्पादन 5.08 करोड़ टन था मगर 2024-25 में यह 35.39 करोड़ टन के साथ उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2023-24 में भारत से कृषि निर्यात 4.08 लाख करोड़ रुपये के बराबर पहुंच गया।

विशेषताएं और चुनौतियां

कृषि विस्तार की भूमिका देश को विकसित बनाने के लक्ष्य में काफी महत्त्वपूर्ण होगी। हालांकि, यह भी सच है कि कृषि क्षेत्र स्वयं इस समय कई चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें जोत का घटता आकार, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों का ह्रास, उपभोक्ता मांगों में बदलाव और तेजी से बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा आदि शामिल हैं। हालांकि, इसके साथ ही जैव-तकनीकी, परिशुद्ध कृषि, डिजिटल कृषि और टिकाऊ व्यवहारों में प्रगति से असंख्य संभावनाएं भी सामने आई हैं।

लचीलेपन और संपन्नता के लिए शोध

भारत में कृषि शोध कार्यों में जीनोमिक्स एवं जैव-तकनीकी, जलवायु में परिवर्तन सहन करने की क्षमता रखने वाली कृषि, परिशुद्ध एवं डिजिटल कृषि और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन प्राथमिकता में शामिल होने चाहिए। शोध प्राथमिकताओं में कृषि विविधता भी शामिल होना चाहिए जिसका इस्तेमाल बागवानी, मवेशी और मत्स्य क्षेत्रों में संभावनाओं का लाभ लेने के लिए किया जा सकता है। आवश्यकता आधारित कृषि यंत्रीकरण, कृषि-प्रसंस्करण और कटाई के बाद फसलों का नुकसान कम से कम रखने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अलावा कृषि-शोध नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचों के आधुनिकीकरण और अद्यतन बाजार पहुंच को भी समर्थन मिलना चाहिए। वैज्ञानिकों को शोध के लिए नई तकनीकों जैसे सीआरआईएसपीआर जीन एडिटिंग, रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना तंत्र, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) एवं मशीन लर्निंग आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।

नए नेतृत्वकर्ताओं का उद्भव

कृषि शिक्षा को केवल परंपरागत ढांचे तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए और इससे आगे निकलकर एक व्यापक एवं भविष्योन्मुखी नजरिया अपनाना चाहिए। कृषि में एआई, कृषि-उद्यमशीलता, जलवायु अनुकूल कृषि, पर्यावरण अनुकूल कृषि, कृषि-कारोबार प्रबंधन और कृषि निर्यात रणनीति जैसे विषयों को शामिल करने के लिए कृषि पाठ्यक्रम में सुधार किया जाना चाहिए। छात्रों की अगुवाई वाली स्टार्टअप इकाइयों के विकास के लिए कृषि-इन्क्यूबेटर विकसित किया जाना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालयों को वैश्विक विश्वविद्यालयों और शोध तंत्रों के साथ सहयोग कर विश्व-स्तरीय शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।

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नई तकनीक का प्रसार

तकनीक के जल्द एवं प्रभावी प्रसार के लिए विस्तार सेवाओं को मोबाइल ऐप्लिकेशन, किसान हेल्पलाइन, ऑनलाइन सलाहकार प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप ग्रुप और यूट्यूब ट्यूटोरियल्स का लाभ उठाना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्रों का आधुनिकीकरण जरूरी है और इसके लिए उन्हें उच्च कृषि-तकनीक एवं डेटा आधारित सलाहकार सेवाओं से जोड़ा जाना चाहिए। उन्हें नवाचार एवं कौशल विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने से कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा। किसान-उत्पादक संगठनों को विपणन एवं ज्ञान के प्रसार के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल, गैर-सरकारी संगठनों के जुड़ाव और ग्रामीण स्टार्टअप इकाइयों के साथ सहयोग से एक जीवंत कृषि विस्तार प्रणाली तैयार की जा सकती है।

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कृषि शोध एवं विकास में निवेश

इस समय कृषि शोध एवं विकास में पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा है और इस पर खर्च अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से काफी कम है। भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.65 फीसदी हिस्सा शोध एवं विस्तार पर खर्च करता है। कृषि शोध एवं विकास पर भारत के जीडीपी का कम से कम 1 फीसदी हिस्सा खर्च किया जाना चाहिए तभी कृषि क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और यह दुनिया में दूसरे देशों को टक्कर दे पाएगा।

जिस विकसित भारत की कल्पना की जा रही है वह ऐसा ही हो सकता है कि उसमें प्रत्येक किसान को श्रेष्ठ विज्ञान एवं तकनीक की सुविधा मिले और ग्रामीण युवा कृषि उद्यमी बनने का सपना देख पाएं। विकसित भारत में ग्राम संकुलों में नवाचार बढ़ेगा और कृषि सम्मानित, लाभकारी एवं प्रतिष्ठित पेशा बन पाएगा।
(लेखक : क्रमश: राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष हैं।)

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