राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि विज्ञान और AI तकनीक से किसानों को मिलेगा दूध उत्पादकता बढ़ाने में बड़ा फायदा

04 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: कृषि विज्ञान और AI तकनीक से किसानों को मिलेगा दूध उत्पादकता बढ़ाने में बड़ा फायदा – भारत सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने, पशुधन सुधारने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि आधुनिक प्रजनन तकनीक, जीनोमिक चयन, वैज्ञानिक आहार प्रबंधन और वित्तीय सहायता योजनाओं के जरिए किसानों को अधिक उत्पादक पशु उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उपरोक्त उत्तर राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह, केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री, भारत सरकार, ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दिया था। मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को पूरक बनाते हुए, खासकर सूखा-ग्रस्त और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में, व्यापक कदम उठा रही है।

उन्नत प्रजनन तकनीक से होगा मवेशियों का तेज आनुवंशिक सुधार

सरकार ने दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए देशभर में कई अत्याधुनिक तकनीकी कार्यक्रम लागू किए हैं:

1. कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम – राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत राष्ट्रव्यापी AI कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जहां AI कवरेज 50% से कम है, वहां किसानों को घर-घर जाकर मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान सेवा दी जा रही है। उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले सांडों के वीर्य का उपयोग कर बेहतर नस्लें तैयार की जा रही हैं।

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2. बोवाइन IVF तकनीक – IVF तकनीक की मदद से मवेशियों में तेज़ आनुवंशिक उन्नयन किया जा रहा है। सरकार किसानों को प्रति सफल गर्भधारण पर ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि दे रही है।

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3. सेक्स-सॉर्टेड वीर्य आधारित कार्यक्रम – मादा बछड़ों के उत्पादन हेतु सेक्स-सॉर्टेड वीर्य का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिसकी सटीकता 90% से अधिक है। किसान को प्रति सफल गर्भाधारण पर वीर्य लागत का 50% प्रोत्साहन दिया जाता है।

4. जीनोमिक चयन — गौ चिप और महिस चिप – उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के चयन के लिए विभाग ने दो जीनोमिक चिप विकसित की हैं— गौ चिप (देशी गायों के लिए), महिस चिप (देशी भैंसों के लिए) और जीनोमिक परीक्षण सुविधा एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से किसानों को उपलब्ध है।

5. डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए संरचनात्मक और वित्तीय सहायता – राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)- यह दो घटकों में लागू है। इनमें घटक A और B शामिल है। जो इस प्रकार है-  

घटक A

-गुणवत्तापूर्ण दूध परीक्षण उपकरण
-प्राथमिक दुग्ध शीतन सुविधाओं का निर्माण

लाभार्थी: सहकारी डेयरी संघ, जिला दुग्ध संघ, स्वयं सहायता समूह, दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ, किसान उत्पादक संगठन

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घटक B — कोऑपरेटिव्स के ज़रिए डेयरी

-किसानों को संगठित बाजार से जोड़ना
-डेयरी प्रसंस्करण का उन्नयन
-विपणन संरचना मजबूत करना
– किसान-स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना

6. राष्ट्रीय पशुधन मिशन—उद्यमिता विकास कार्यक्रम (NLM-EDP) – पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन— उद्यमिता विकास कार्यक्रम (NLM-EDP) संचालित कर रही है, जिसके तहत पशु प्रजनन और चारा उत्पादन से जुड़े विभिन्न उद्यमों की स्थापना के लिए व्यापक सहायता दी जाती है। इस कार्यक्रम में पोल्ट्री, भेड़, बकरी, सूअर, घोड़ा, ऊँट और गधा प्रजनन फार्म जैसे पशुधन आधारित यूनिट स्थापित करने वालों को महत्वपूर्ण समर्थन उपलब्ध कराया जाता है।

इसके अलावा, पशुओं के पोषण और चारा उपलब्धता में सुधार के लिए चारा और फीड इकाइयों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनमें  साइलेंज यूनिट, टोटल मिक्स्ड रेशन (TMR) यूनिट, फॉडर ब्लॉक यूनिट और बीज ग्रेडिंग यूनिट शामिल हैं। इन सभी इकाइयों के लिए सरकार उद्यमियों को 50% लागत (अधिकतम ₹50 लाख) तक की पूंजी अनुदान सहायता प्रदान करती है। इस सहायता का मकसद पशुधन आधारित व्यवसायों को मजबूत करना, ग्रामीण रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और पशुपालन क्षेत्र को अधिक संगठित और टिकाऊ बनाना है।

7. पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) – सरकार द्वारा पशुधन उत्पाद प्रसंस्करण एवं विविधीकरण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए AHIDF के तहत विशेषसहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना में निवेश करने वाले लाभार्थियों को 3% वार्षिक ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। इसका प्रमुख उद्देश्य देशभर में फैले असंगठित पशुपालकों और डेयरी उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ना, उनकी आय में स्थिरता लाना और प्रसंस्करण अवसंरचना को आधुनिक बनाना है, जिससे किसानों के दुग्ध और पशुधन उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके।

8. “1962 फार्मर्स ऐप” — डिजिटल आहार प्रबंधन समाधान – एनडीडीबी के सहयोग से विकसित ‘1962 फार्मर्स ऐप’ किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल साधन बनता जा रहा है। यह ऐप पशुओं के लिए राशन बैलेंसिंग पर परामर्श सेवा देता है और स्थानीय उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर प्रोटीन, ऊर्जा और खनिजों का एक संतुलित आहार तैयार करने के तरीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करता है। पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐप को अब फील्ड कार्यकर्ताओं तक भी विस्तारित किया जा रहा है, ताकि गाँव–स्तर पर वैज्ञानिक आहार प्रबंधन को प्रोत्साहन मिल सके और दूध उत्पादन क्षमता में तेजी से सुधार हो।

9. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) — वित्तीय पहुँच को मजबूत करने की पहल – पशुपालकों और मत्स्य किसानों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की पात्रता को विस्तृत किया है। इस सुविधा का लाभ अब व्यक्तिगत किसान, संयुक्त उधारकर्ता, स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देनदार समूह (JLG) और किराये/लीज पर शेड लेकर पशुपालन करने वाले किसान भी ले सकते हैं। KCC पशुपालन गतिविधियों के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी, जैसे चारा, दवाई, रखरखाव और अन्य खर्चों को पूरा करने में किसानों की बड़ी सहायता करता है।

10. LHDCP — पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम – पशुधन स्वास्थ्य को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत आवंटित और जारी धनराशि का विवरण परिशिष्ट-I और II में उपलब्ध है। केंद्र सरकार राज्यों को आवश्यक टीके और उपभोग्य सामग्रियाँ उपलब्ध कराती है, जबकि टीकाकरण का कार्य राज्यों के पशुपालन विभाग द्वारा किया जाता है। यह कार्यक्रम पशुओं में रोग प्रकोप रोकने और झुंड स्वास्थ्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से किसानों की रक्षा

राष्ट्रीय गोकुल मिशन (NGM)

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से देशी नस्लों का संरक्षण और विकास कर रही है। इस मिशन का उद्देश्य मवेशियों का आनुवंशिक उन्नयन करना और दूध उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाना है। देशी गायें ऊष्मा सहनशील, रोग प्रतिरोधक और चरम जलवायु परिस्थितियों में अधिक सक्षम मानी जाती हैं, इसलिए जलवायु परिवर्तन का प्रभाव इन पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।

ICAR की जलवायु-लचीली पहलें — NICRA कार्यक्रम

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) National Innovations on Climate Resilient Agriculture (NICRA) परियोजना चला रही है, जिसका उद्देश्य रणनीतिक अनुसंधान और तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से कृषि और पशुपालन को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित बनाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जलवायु-लचीले फसल और पशुधन मॉडल विकसित किए जा रहे हैं तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है।

चारा विकास — नमी तनाव-सहिष्णु किस्मों का प्रसार

ICAR–IGFRI, झांसी द्वारा विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए नमी तनाव-सहिष्णु, स्थान-विशिष्ट चारा किस्में विकसित की गई हैं, जिससे पशुपालकों को सूखा या जलवायु अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में भी पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन किस्मों का विस्तृत ब्योरा परिशिष्ट-III में दिया गया है।

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