AAHAR 2026: कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में भारत को वैश्विक नेता बनाने के लिए मजबूत सहयोग जरूरी – पीयूष गोयल
10 मार्च 2026, नई दिल्ली: AAHAR 2026: कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में भारत को वैश्विक नेता बनाने के लिए मजबूत सहयोग जरूरी – पीयूष गोयल – केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने खाद्य, कृषि और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया है, ताकि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुँचाया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित AAHAR 2026 – अंतरराष्ट्रीय फूड एवं हॉस्पिटैलिटी मेले के 40वें संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत के खाद्य एवं कृषि उत्पादों—जिसमें कृषि उपज और मत्स्य उत्पाद शामिल हैं—का निर्यात अब लगभग 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) वार्षिक हो गया है। इसके साथ ही भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन चुका है।
पीयूष गोयल ने बताया कि 2014 से 2025 के बीच भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना बढ़ा है, जबकि फल और दालों का निर्यात तीन गुना हुआ है। प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना, कोको का निर्यात तीन गुनाऔर अनाज का निर्यात दोगुना हुआ है। वहीं चावल का निर्यात 62 प्रतिशत बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस परिकल्पना के अनुरूप है, जिसमें भारत को “दुनिया का फूड बास्केट” बनाने की बात कही गई है।
मंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आए हैं। इन समझौतों के माध्यम से भारत को 38 विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ने में मदद मिलेगी और भारत निवेश के लिए भी आकर्षक गंतव्य बनेगा।
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इन समझौतों के दौरान सरकार ने किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की पूरी सुरक्षा की है। उन्होंने बताया कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, और विदेशी डेयरी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार पहुंच नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई प्रकार की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं चीनी क्षेत्र में भी आमतौर पर रियायतें नहीं दी गई हैं, ताकि भारतीय गन्ना किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।
मंत्री ने कहा कि इन उपायों से जहां एक ओर भारत की घरेलू कृषि व्यवस्था सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में नए अवसर भी खुलते हैं। उन्होंने उद्योग और व्यापार से जुड़े लोगों से आग्रह किया कि वे जमीनी स्तर पर यह जानकारी फैलाएं कि भारत के एफटीए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए व्यापार के अवसर बढ़ाते हैं।
पीयूष गोयल ने किसानों और उद्यमियों से 1 लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) का लाभ उठाने और फूड प्रोसेसिंग तथा वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने का भी आग्रह किया। उनके अनुसार इससे किसानों को वैश्विक बाजारों में बेहतर मूल्य मिल सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने AAHAR 2026 में इटली को पार्टनर देश बनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को इटली के फूड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के अनुभवों से सीखना चाहिए। साथ ही भारतीय कंपनियां इटली के साथ सहयोग कर भारतीय व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बना सकती हैं।
मंत्री ने कहा कि यूरोप कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है, जहां नए व्यापार समझौतों के तहत कई भारतीय उत्पादों पर बहुत कम या लगभग शून्य शुल्क लगता है। उन्होंने EFTA देशों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टाइन और आइसलैंड के साथ हुए समझौते का भी उल्लेख किया।
इसके अलावा भारत के न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया, आसियान देशों, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और मॉरीशस के साथ व्यापारिक सहयोग से भी नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि कनाडा के साथ बातचीत प्रगति पर है, जबकि मध्य पूर्व के जीसीसी देशों के साथ भी हाल ही में वार्ता शुरू की गई है।
पीयूष गोयल ने AAHAR 2026 को खाद्य और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण आयोजन बताते हुए आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस बार पहली बार इस आयोजन में पार्टनर देश के रूप में इटली शामिल हुआ है।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रदर्शनी को 13 मार्च की शाम और पूरे शनिवार को आम जनता के लिए भी खोला जाएगा, ताकि खासकर युवा वर्ग भारत और दुनिया के खाद्य एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग की क्षमताओं को करीब से देख सके।
उन्होंने प्रदर्शकों से आग्रह किया कि वे केवल अपने स्टॉल तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे आयोजन में घूमकर नए विचारों, तकनीकों, पैकेजिंग नवाचारों और व्यावसायिक अवसरों की तलाश करें।
अंत में मंत्री ने भरोसा जताया कि किसानों, मछुआरों, उद्यमियों और एमएसएमई के संयुक्त प्रयासों से भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, “मेड इन इंडिया” ब्रांड को दुनिया भर में पहचान दिलाएगा और किसानों की आय बढ़ाने के साथ नए व्यावसायिक अवसर भी पैदा करेगा।
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