राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

एमपी के लिए गौरव की बात: गेहूं की दो नई किस्में इंदौर में हुई ईजाद

17 अगस्त 2024, भोपाल: एमपी के लिए गौरव की बात: गेहूं की दो नई किस्में इंदौर में हुई ईजाद – यह निश्चित ही मध्यप्रदेश और विशेषकर मालवांचल के किसानों के लिए गौरव की बात ही होगी कि गेहूं की जो नई किस्में सामने आई उनमें से दो किस्में सूबे के इंदौर में ही ईजाद हुई है। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसलों की 109 किस्मों को जारी किया था। इनमें से दो तरह की गेहूं की भी किस्में है और इन्हें इंदौर के भारतीय कृषि अनुसंधान के प्रमुख डॉ. जेबी सिंह ने ईजाद किया है। बता दें कि डॉ. सिंह संस्थान के क्षेत्रीय स्टेशन प्रमुख होने के साथ साथ प्रधान वैज्ञानिक भी है।

कम पानी मिलने पर भी उत्पादन प्रभावित नहीं होगा

उनका दावा है कि सिंचाई के लिए कम पानी मिलने पर भी गेहूं का उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। यही नहीं इसके उत्पादन पर कम या ज्यादा तापमान से भी बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसकी खास बात यह है कि इसमें से एक किस्म के गेहूं के खाने से शुगर कंट्रोल होगा। 

यह गेहूं की रोटी की किस्म

उच्च उपज देने वाली शरबती गेहूं की किस्म पूसा गेहूँ शरबती (HI 1665) में एच आई 1605 (पूसा उजाला) की तुलना में महत्त्वपूर्ण उपज का लाभ है। यह गेहूं की रोटी की किस्म है। इसमें कम ग्लूटेन इंडेक्स (44) है, जो मधुमेह रोगियों के रक्त शर्करा के स्तर को रोकने का बेहतर विकल्प है।  इस गेहूं की रोटी की गुणवत्ता उच्च है। आयरन, जिंक व प्रोटीन है। 

विशेष वैरायटी शुगर को कंट्रोल रखती है

आमतौर पर शुगर के मरीज को गेहूं खाने से रोका जाता है, लेकिन यह विशेष वैरायटी शुगर को कंट्रोल रखती है। यह किस्म एक पानी की सिंचाई में भी अच्छी उपज देती है। कहा जाता है कि तापमान बढ़ा तो उपज घटी, लेकिन इस किस्म पर असर नहीं है। ये 110 दिनों में पककर तैयार होने वाली किस्म है, जो प्रति हेक्टेयर 33 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है। इसके दाने में जिंक की मात्रा 40.0 प्रतिशत तक है, जो एक बायो फोर्टिफाइड किस्म है। 

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ड्यूरम कठिया गेहूं की किस्म

ड्यूरम कठिया गेहूं की किस्म पूसा गेहूँ गौरव (HI 8840) एक उच्च उपज देने वाली ड्यूरम गेहूं की किस्म है। रोटी के साथ ही यह बाफले, पास्ता और दलिया के लिए विशेष किस्म है। रोटी के साथ ही यह बाफले, पास्ता और दलिया के लिए विशेष किस्म है। प्रधान वैज्ञानिक के मुताबिक, यह गेहूं की किस्म अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड के पास्ता के लिए है। दावा किया गया है कि यह गेहूं भी कम सिंचाई होने की स्थिति में भी बेहतर उपज देने में सक्षम है। ज्यादा पानी होने पर उपज और बढ़ती है। इस गेहूं की रोटी नरम बनती है और पास्ता स्पेशल तरीके का बनता है। कुल मिलाकर दोनों किस्में किसानों के लिए फायदे का सौदा हैं।

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