बीज व्यापार – सील की ढील क्यों ?

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एक उक्ति है कि ”Certification is void without seal and Tag” प्रमाणीकरण बिना सील एवं टैग के अवैध है जाने-अनजाने इस अवैध एवं आपराधिक प्रवृत्ति का कार्य करने में ये तंत्र शामिल है। 

निजी बीज उत्पादक – बीज अधिनियम एवं न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण 2013 का उल्लंघन करते हुए बीज उत्पादन किया जा रहा है। प्रत्येक कट्टे, थैले, गास्टक, पाऊच पर मोहर लगाने का दायित्व बीज उत्पादक पर है। बीज नियम 17(द्ब1) में उल्लेख है कि कोई भी बीज तब तक नहीं बेचा जा सकता जब तक कि उस पर सील न लगी हो। बीज कानून का यह घोर उल्लंघन है। दूसरा पहलू है कि बीज पात्रों-कट्टों, थैलों, कोथलियों के लिए सील खरीदने और उस को प्रति थैले पर लगाने में श्रम लगता है तथा खर्च आता है जबकि बीज को बिना ऐसा खर्च करें, धड़ल्ले से बिके तो खर्चा करने की जहमत कौन ले? हो सकता है संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में यह विषय आए और आनन-फानन में बीज उत्पादकों पर सील लगाने के लिए दबाव बढ़ाये तो बीज उत्पादक आधे-अधूरे मन से थैलों पर कर्णफूल के रूप में सील को लटका देंगे और हाथ से या साधारण प्लास दे दबा दें। आज बीज के कट्टों थैलों पर कर्णफूल सील भी 10 प्रतिशत ही मिलेगी। परन्तु प्रमाणित थैलों पर प्रमाणीकरण संस्था के द्यशद्दश स्पष्ट छाप वाली एक भी सील नहीं मिलेगी।

सरकारी एवं सहकारी बीज उत्पादक :- ”हमाम में सब नंगे” कहावत को चरितार्थ करते हुए सरकारी निगमें एवं प्राइवेट उत्पादक बराबर है। उनके यहां भी कट्टों थैलों पर मोहर नहीं लगाई जाती है या यंू कहे कि बीज पात्रों पर सील लगाने का रिवाज ही नहीं रहा। हालांकि वे कृषि विज्ञान का ज्ञान रखते हैं परंतु उनकी दशा भी दयनीय है।

लेबल बीजोत्पादन :- उपरोक्त बिंदुओं में प्रमाणित बीज पर सील न लगाने का चित्रण किया गया है जो कुल उत्पादन का मात्र 25 प्रतिशत है शेष 75 प्रतिशत लेवल बीज उत्पादन एवं विक्रय होता है परंतु इस पर भी कोई सील नहीं लगी होती है। लेवल बीज उत्पादकों के संज्ञान में जब यह बात लाई जाती है कि लेबल बीज बिना सील लगाए नहीं बिना चाहिए तो वे अपनी मुखमुद्रा विस्मयकारी बना कर सवाल करते हैं कि क्या टीएल, टीएफएल, ट्रुथफुल लेवल या लेबल सीड भी सील बंद होने चाहिए? प्रत्येक कम्पनी को अपनी कम्पनी के लोगो के साथ सीलिंग प्लायर खरीद कर सील लगानी चाहिए परंतु यह जानकर हैरानी होगी कि आज तक किसी निजी बीज उत्पादक कम्पनी ने सीलिंग प्लायर भी नहीं खरीदा होगा। यही हाल सरकारी बीज निगमों तथा सहकारी बीज उत्पादक संस्थाओं का है। विगत में केवल नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन लेबल सीड के पात्रों को सील करने के लिए एनएससी के लोगो का सीलिंग प्लायर प्रयोग में लाती थी और अभी तक इसका पालन हो रहा है।

बीज प्रमाणीकरण अधिकारी :- प्रमाणित बीज उत्पाiदन में बिना सील लगे बीज प्रमाणित होने के लिए बीज प्रमाणीकरण अधिकारी उत्तरदायी है क्योंकि बीज नियम 1968 के नियम 6(द्द) एवं 6(द्ब) में प्रमाणित बीज पर टैग, सील, लेबल, सुनिश्चित करना राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था का दायित्व है परंतु ये केवल टैग लगाना सुनिश्चित करते हैं। सील लगी हो न लगी हो, ढंग से लगी हो बारे में कोई सरोकार नहीं। यह कार्य बीज उत्पादक का है कह कर टाल दिया जाता है जो बिल्कुल अनुचित है। लेबल बीज के पात्रों पर सील सुुनिश्चित कराना जिम्मेदार व्यक्ति का काम है। आज तक किसी भी बीज प्रमाणीकरण अधिकारी ने बीज पात्रों पर सील लगाने के लिए कोई राय, सूचना, पत्र, परिपत्र, आदेश बीज उत्पादकों को दी हो का कोई प्रमाण नहीं है अर्थात् इस आपराधिक कार्य में बीज प्रमाणीकरण     अधिकारी बराबर के भागीदार हैं। 

बीज कानून लागू करना:- वर्तमान में बीज अधिनियम 1966 बीज नियम 1968 बीज नियंत्रण आदेश 1983 एवं भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक (1971, 1988, 2013) बीज नियामक है और इनको लागू करने (श्वठ्ठद्घशह्म्ष्द्गद्वद्गठ्ठह्ल) का दायित्व कृषि विभाग में बीज निरीक्षक की शक्तियों में निहित है। बीज निरीक्षक कोई पद नहीं बल्कि शक्तियां है जो विभिन्न राज्यों में विभिन्न पदाधिकारियों में निहीत है। हरियाणा में जिला स्तर पर ये शक्तियां उपकृषि निदेशक, उप मंडल कृषि अधिकारी, एवं गुण नियंत्रण अधिकारी में निहीत है। बीज अधिनियम 1966 की धारा 19(ड्ड) में स्पष्ट उल्लेख है कि बीज अधिनियम की किसी धारा या बीज नियम 1968 के किसी नियम का उल्लंघन होने पर बीज निरीक्षक दोषी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन  दावा दायर करने की कार्यवाही कर सकता है। परंतु ऐसा अनुभव किया है कि कृषि अधिकारियों का अर्जुन के चक्षु भेदन की तरह एक मात्र लक्ष्य होता है कि दिये गये टारगेट के अनुसार सैम्पल लेकर परीक्षण कराये और परिणाम अधोस्तर होने पर वाद अभियोजन  कर अपने आपको और साथ ही बीज विक्रेता को वर्षों के लिए कानूनी पचड़े में फंसा देना। 

किसी भी बीज निरीक्षक ने आज तक कोई अभियोजन सील न लगाने या सील तरीके से न लगवाने के लिए दायर किया हो? प्रमाणित बीज के फेल लॉट (अधोस्तर लॉट) आने पर कार्यवाही मात्र बीज उत्पादक एवं बीज विक्रेता पर ही की जाती है जबकि बीज प्रमाणीकरण अधिकारी बराबर का भागीदार होता है। उसे अभियोजन या किसी उपभोक्ता सरंक्षण वाद में पक्ष नहीं बनाया जाता। बीज पात्रों (मोहर छाप) न लगाने के विषय में बीज प्रमाणीकरण अधिकारी के बराबर के पक्ष है परंतु बीज निरीक्षक उन्हें वाद में पक्ष नहीं बनाते।

बीज विक्रेता :- बिना सील लगा बीज बेचने में बीज विक्रेता भी भागीदार है क्योंकि वे बिना सील लगा बीज बेचने का प्रतिरोध नहीं करते है। यह उनकी विवशता है या लालच। विक्रेता व्यक्तिगत रूप में इस विषय पर विरोध करे तो उनका व्यापार प्रभावित हो सकता है परंतु यह विरोध संघटना द्वारा किया जाए तो लाभ मिलेगा। कीटनाशी उद्योग में पिछले सालों में उच्च न्यायालयों के विभिन्न निर्णय आए जिनमें कीटनाशी का सैम्पल सीलबंद पैकेट से लेने पर और परिणाम अधोस्तर (Substandard) होने पर निर्माता उत्तरदायी ठहराया गया। इसी प्रकार बीज पात्र सीलबंद होने पर बीज की गुणवत्ता का दोष बीज विक्रेता पर नहीं लगेगा बल्कि उत्पादक दोष पर स्थानांतरित हो जायेगा।

कृषक :- बीज नियामक कृषकों को उपलब्ध होने वाले बीज की गुणवत्ता को नियंत्रित करते हैं परंतु कृषक भोला, अशिक्षित, अर्ध शिक्षित होने के कारण बीज कानून नहीं जानता और इन आपराधिक कार्यों का विरोध नहीं कर पाता। यदि कोई कृषक संघटन जैसे किसान यूनियन इस विषय को उठाए तो ये विसंगतियां, आसानी से हल हो जाएगी और उपरोक्त सभी एजेंसीज एक साथ हाजिर भी हो जायेगी।

सील और मंडी टैक्स :- बीज को मंडीकर मुक्त किया गया है कि यदि वह सील बंद अवस्था में हो अन्यथा टैक्स अदा करना पड़ेगा।

सील के प्रति जागरूकता :- सोये हुए व्यक्ति को जगाया जा सकता है परंतु जो सोने का उपक्रम/ नाटक कर रहा हो उसे जगाना मुश्किल है पिछले 8-9 साल से मैंने कई लेख लिखे कि उत्पादक ध्यान दे विभिन्न राज्यों के कृषि विभाग को विभिन्न स्तरों पर अवगत कराया। बीज निरीक्षक की यह मजबूरी हो सकती है कि वह बिना सील के बीज बिकने की अनुमति दे या परोक्ष समझौता भी हो सकता है। कृषि विभाग से जन सूचना के अधिकार, के अंतर्गत भागी सूचना में सूचित किया की सील न लगी होने पर कोई दावा दायर नहीं किया गया और न ही बीज की बिक्री रोकी गई।

पाउच पैकिंग एवं सील :- पैकेजिंग 2 तरह की होती है साधारण पैकिंग एवं वाष्परोधी पैकेजिंग पाऊच पैकेजिंग, टिन पैकेजिंग आदि वाष्परोधी पैकेजिंग में साधारण पैकेजिंग की अपेक्षा कम नमी पर पैकेजिंग की जाती है। परंतु पाऊच पैकेजिंग में सुई से सुराख कर बीज विक्रेता अपनी सहुलियत के लिए बीज बेचते है जो न तो साधारण पैकेजिंग रही और न ही पाऊच पैकेजिंग या यंू कहे वेपर प्रूफ पैकेजिंग तथा उस पर न्यूनतम नमी का मन चाहा मानक लिख कर बाजार में उतारा जाता है जो अवैधानिक है परंतु ‘Seed Law Enforcement’ सोया पड़ा है। पाऊच पैकिंग में बीज प्रमाणित करने हेतु प्लास्टिक के टैग प्रयोग में हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रत्येक पाऊच पैकिंग पर भी कम्पनी की प्लास्टिक सील लगी होनी चाहिए।

  • आर.बी. सिंह एरिया मैनेजर 

(सेवा निवृत्त) नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन लि. सम्प्रति: ”कला निकेतन” ई -70 विथिका-11, जवाहर नगर हिसार-हरियाणा 
दूरभाष 9466746625,8607275991 
ईमेेल-rbsinghiffdc@gmail.com

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