कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

भारत में पहली बार नॉन-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का के हाई-एक्सपैंशन हाइब्रिड बीज लॉन्च

26 अगस्त 2026, मुसुनुरु: भारत में पहली बार नॉन-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का के हाई-एक्सपैंशन हाइब्रिड बीज लॉन्च –  भारत के पॉपकॉर्न उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में गॉरमेट पॉपकॉर्निका ने देश के पहले हाई-एक्सपैंशन नॉन-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज लॉन्च किए हैं। कृष्णा459 और गोदावरी234 नाम से लॉन्च किए गए ये हाइब्रिड भारत में ही विकसित किए गए हैं और इन्हें भारतीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

इन हाइब्रिड बीजों को भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के मुसुनुरु स्थित गॉरमेट पॉपकॉर्निका के प्लांट में लॉन्च किया। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे। इस अवसर पर देश के आठ राज्यों के बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसानों और कंपनी के साझेदारों को सम्मानित किया गया।

पांच साल के परीक्षण के बाद तैयार हुए हाइब्रिड

कृष्णा459 और गोदावरी234 को भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से पांच फसल सीजन तक विकसित और परीक्षण किया गया है। गॉरमेट पॉपकॉर्निका के अनुसार, दोनों हाइब्रिड में प्रमुख आयातित पॉपकॉर्न किस्मों के समान दाने का आकार और बेहतर popping क्षमता है।

इन हाइब्रिड को भारतीय परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया गया है। इनमें कीटों के प्रति सहनशीलता, कम अवधि में फसल तैयार होने और अच्छी उपज जैसी विशेषताओं पर ध्यान दिया गया है।

भारत में प्रीमियम पॉपकॉर्न के लिए इस्तेमाल होने वाला मक्का और बीज लंबे समय से अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आयात किया जाता रहा है। नए हाइब्रिड के आने से किसानों को भारत में विकसित और तैयार किए गए पॉपकॉर्न बीज का विकल्प मिलेगा।

17,500 से अधिक किसानों को होगा फायदा

गॉरमेट पॉपकॉर्निका के साथ देश के आठ राज्यों में 17,500 से अधिक किसान करीब 40,000 एकड़ में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, नए हाइब्रिड से इन किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के अनुसार, किसानों को औसतन करीब 4.5 टन गीले भुट्टे प्रति एकड़ की उपज मिल सकती है। वहीं, फसल की popping quality को प्रोसेसिंग उद्योग की जरूरतों के अनुरूप रखा गया है।

गॉरमेट पॉपकॉर्निका किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत काम करती है। इसमें किसानों को फसल की सुनिश्चित खरीद और तय कीमत का विकल्प मिलता है। इससे किसानों को सामान्य मक्का की तुलना में अधिक मूल्य वाली विशेष फसल से जुड़ने का अवसर मिलता है।

11 साल में 50 हजार से 1.3 लाख टन हुआ बाजार

भारत में पॉपकॉर्न मक्का का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। गॉरमेट पॉपकॉर्निका के अनुसार, देश में पॉपकॉर्न की मांग 2014-15 में करीब 50,000 टन से बढ़कर 2025-26 में लगभग 1.3 लाख टन हो गई है।

घरेलू उत्पादन अब देश की करीब 70 प्रतिशत मांग पूरी कर रहा है। घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी से भारत ने 2025-26 में करीब 810 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचाई, कंपनी का अनुमान है।

कृष्णा459 और गोदावरी234 जैसे स्वदेशी हाइब्रिड के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के साथ भारत का लक्ष्य 2030 तक पॉपकॉर्न आयात को पूरी तरह खत्म करना है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में विकसित पॉपकॉर्न हाइब्रिड आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, स्वदेशी बीजों का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और इससे किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस पहल को स्वर्णांध्र 2047 विजन से जोड़ते हुए कहा कि कृषि तकनीक का उद्देश्य किसान को बदलना नहीं, बल्कि उसे मजबूत और अधिक सक्षम बनाना होना चाहिए।

भारत की वैश्विक पॉपकॉर्न बाजार में बढ़ सकती है हिस्सेदारी

गॉरमेट पॉपकॉर्निका के प्रबंध निदेशक एस. बी. पी. पट्टाभि रामा राव ने कहा कि कृष्णा459 और गोदावरी234 केवल कंपनी के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं जिन्होंने पॉपकॉर्न की खेती को अपनाया है।

अमेरिका की प्रीफर्ड पॉपकॉर्न के संस्थापक और CEO नॉर्म क्रुग ने भी भारत में विकसित हाइब्रिड की क्षमता की सराहना की। उनके अनुसार, भारत के पास अब बेहतर जेनेटिक्स, किसानों का बड़ा आधार और पर्याप्त कृषि क्षेत्र है, जिससे वह दुनिया के प्रमुख पॉपकॉर्न उत्पादक देशों में शामिल हो सकता है।

कृष्णा459 और गोदावरी234 का लॉन्च भारत को पॉपकॉर्न के बड़े आयातक से घरेलू उत्पादक और भविष्य में संभावित वैश्विक आपूर्तिकर्ता की ओर ले जाने वाला कदम हो सकता है।

सिनेमा हॉल में मिलने वाले पॉपकॉर्न का स्वाद और अनुभव भले ही वही रहे, लेकिन इसकी पूरी कहानी बदल सकती है—बीज भारत का, किसान भारत का और पॉपकॉर्न भी भारत का।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture