कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

नकली कृषि-इनपुट से किसानों की बढ़ी चिंता, 35% ने पिछले एक साल में किया सामना

25 अगस्त 2026, नई दिल्ली: नकली कृषि-इनपुट से किसानों की बढ़ी चिंता, 35% ने पिछले एक साल में किया सामना – देश में नकली कृषि-इनपुट की समस्या किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस और ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (ASPA) की ‘स्टेट ऑफ काउंटरफीटिंग इन इंडिया 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, 35% उत्तरदाताओं ने पिछले 12 महीनों में नकली कृषि उत्पाद का सामना करने की बात कही। किसानों की धारणा के अनुसार, बाजार में करीब 30% कृषि-इनपुट नकली हो सकते हैं, जबकि 82% किसानों का मानना है कि पिछले एक साल में नकली कृषि उत्पादों की समस्या बढ़ी है।

कृषि क्षेत्र में नकली उत्पादों का असर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि-इनपुट की गुणवत्ता सीधे फसल की उत्पादकता, लागत और किसान की आय को प्रभावित कर सकती है।

स्थानीय कृषि दुकानों से सबसे ज्यादा सामना

रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय कृषि-इनपुट विक्रेता नकली उत्पादों के लिए प्रमुख बिक्री चैनल बने हुए हैं। 75% उत्तरदाताओं ने स्थानीय कृषि-इनपुट रिटेलर्स के माध्यम से नकली उत्पाद मिलने की बात कही, जबकि 18% ने अनौपचारिक सप्लाई चेन का उल्लेख किया।

रिटेलर्स के सर्वेक्षण से यह भी सामने आया कि नकली एग्रोकेमिकल्स की सप्लाई स्थानीय और अंतरराज्यीय दोनों स्रोतों से होती है। 40% रिटेलर्स ने स्थानीय सोर्सिंग और 48% ने दूसरे राज्यों से सोर्सिंग की जानकारी दी।

असली उत्पाद के लिए 14% अधिक कीमत देने को तैयार किसान

नकली कृषि उत्पादों को उत्तरदाताओं ने असली उत्पादों की तुलना में औसतन करीब 24% सस्ता माना। लेकिन कीमत के बावजूद किसान असली उत्पाद को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, किसान गारंटीड असली कृषि-इनपुट के लिए औसतन 14% प्रीमियम देने को तैयार हैं। यह अध्ययन में शामिल प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक प्रीमियम में से एक है।

पहचान में अभी भी बड़ी चुनौती

नकली उत्पादों की पहचान किसानों के लिए आसान नहीं है। केवल 58% उत्तरदाताओं का मानना है कि वे नकली कृषि उत्पादों की पहचान कर सकते हैं। इनमें 63% पैकेजिंग और लेबलिंग को पहचान का आधार बनाते हैं, जबकि सिर्फ 26% होलोग्राम या ट्रेसेबिलिटी कोड जैसे ऑथेंटिकेशन फीचर्स की जांच करते हैं।

इससे स्पष्ट है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद किसानों के पास खरीद के समय उत्पाद की प्रामाणिकता जांचने के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल अभी सीमित है।

नकली एग्रोकेमिकल के 276 मामले

ASPA के काउंटरफिट न्यूज रिपॉजिटरी के अनुसार, 2018 से 2025 के बीच नकली एग्रोकेमिकल उत्पादों के 276 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं में 2018 की तुलना में करीब 2.5 गुना वृद्धि हुई। इनमें लगभग 40% मामले उर्वरकों से जुड़े थे।

मीडिया में दर्ज कृषि-उत्पाद काउंटरफिटिंग मामलों की संख्या 2018 में 50, 2019 में 51, 2020 में 47, 2021 में 38, 2022 में 33, 2023 में 21, 2024 में 19 और 2025 में 17 रही। ये आंकड़े केवल मीडिया में दर्ज घटनाओं को दर्शाते हैं और नकली उत्पादों के वास्तविक बाजार आकार का अनुमान नहीं हैं।

ट्रेसेबिलिटी और जागरूकता पर जोर जरूरी

रिपोर्ट के निष्कर्ष कृषि-इनपुट क्षेत्र में उत्पाद प्रमाणीकरण, सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी, अधिकृत वितरण नेटवर्क और किसान जागरूकता को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

खास बात यह है कि किसान असली उत्पाद की गारंटी के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को तैयार हैं। ऐसे में आसान डिजिटल ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी कोड और प्रभावी जागरूकता अभियान किसानों को नकली कृषि-इनपुट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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