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कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

कृषि रसायनों पर डेटा संरक्षण का सीसीएफआई ने किया विरोध

भारतीय निर्माताओं का कहना है कि प्रमुख मुद्दा डेटा संरक्षण की कमी नहीं, बल्कि पेटेंट वाले नए अणुओं का भारत में देर से पंजीकरण और उपलब्धता है; अतिरिक्त विशिष्टता से जेनेरिक विनिर्माण प्रभावित हो सकता है

02 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: कृषि रसायनों पर डेटा संरक्षण का सीसीएफआई ने किया विरोध – क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) ने कृषि रसायनों के लिए डेटा संरक्षण लागू किए जाने का विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है कि ऐसी नीति से किफायती फसल सुरक्षा उत्पादों की उपलब्धता में देरी हो सकती है और भारत के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को मिलने वाला प्रतिस्पर्धात्मक लाभ कमजोर हो सकता है।

क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) की 63वीं वार्षिक आम बैठक में अध्यक्ष दीपक शाह ने कहा कि डेटा संरक्षण पर बहस को भारत में नए अणुओं के पंजीकरण और बाजार में आने के समय के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पेटेंट वाले फसल सुरक्षा उत्पाद अक्सर अन्य बाजारों की तुलना में भारत में काफी देर से पेश किए जाते हैं।

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यदि किसी उत्पाद को देश में देर से पेश किए जाने के बाद उस पर अतिरिक्त डेटा संरक्षण दिया जाता है, तो पेटेंट समाप्त होने के बाद भारतीय निर्माताओं के पास उसके जेनेरिक संस्करण बाजार में लाने के लिए बहुत कम समय बच सकता है।

शाह ने कहा कि भारतीय निर्माताओं के पास उच्च गुणवत्ता वाले फसल सुरक्षा उत्पादों का काफी कम लागत पर उत्पादन करने की तकनीक और क्षमता है। उन्होंने बताया कि पेटेंट समाप्त होने के बाद भारत में किसी अणु का विनिर्माण करने से उत्पादन लागत पहले की लागत की लगभग एक-तिहाई या एक-चौथाई तक आ सकती है, जिससे किसानों को सीधे लागत लाभ मिलता है।

शाह ने कहा, “यदि कोई कंपनी भारत में किसी उत्पाद को देर से पेश करती है और उसे डेटा संरक्षण दिया जाता है, तो किसानों को प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण से मिलने वाले लागत लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा कि डेटा संरक्षण से भारतीय कंपनियों के लिए अणुओं के पंजीकरण के बाद बाजार में पर्याप्त समय और व्यावसायिक अवसर सीमित हो सकते हैं। इससे उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रभावित होने के साथ-साथ कृषि रसायन विनिर्माण में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी कमजोर हो सकती है। सीसीएफआई के अनुसार, देश में कृषि रसायन विनिर्माण का बुनियादी ढांचा करीब ₹45,000 करोड़ का है।

सीसीएफआई ने अतिरिक्त विशिष्टता की जरूरत पर उठाए सवाल

सीसीएफआई के उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय निर्माता भारतीय किसानों के लिए शोध और लागत प्रभावी फसल सुरक्षा उत्पाद विकसित करने में लगातार निवेश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नए अणु विकसित करने वाली कंपनियां पेटेंट संरक्षण की अवधि के दौरान ही उन्हें भारत में पंजीकृत क्यों नहीं करतीं।

अग्रवाल ने कहा, “जब कंपनियां नए अणुओं का आविष्कार करती हैं, तो वे पूरी दुनिया के लिए डेटा तैयार करती हैं। फिर वे इन अणुओं को पेटेंट की अवधि के दौरान भारत में पंजीकृत क्यों नहीं करतीं?”

उन्होंने कहा कि डेटा संरक्षण से जेनेरिक प्रतिस्पर्धा में देरी हो सकती है और किसानों के लिए उपलब्ध उत्पादों की संख्या सीमित हो सकती है। अग्रवाल के अनुसार, भारत में बढ़ता शोध और विनिर्माण आधार यह दर्शाता है कि घरेलू उद्योग अतिरिक्त विशिष्टता अवधि के बिना भी प्रभावी फसल सुरक्षा उत्पाद विकसित और उपलब्ध करा सकता है।

सीसीएफआई ने हाल के वर्षों में भारत में हुए नए पंजीकरण को भी इस दावे के विरुद्ध एक उदाहरण बताया कि डेटा संरक्षण के अभाव में नए उत्पाद देश में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। महासंघ के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भारत में 36 नए कीटनाशी अणुओं का पंजीकरण हुआ है, जिसे वह एक रिकॉर्ड बताता है।

अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा पंजीकरण व्यवस्था उभरती कीट और रोग संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से ही नए उत्पादों को उपलब्ध करा रही है। उनके अनुसार, डेटा संरक्षण लागू करना “प्रतिगामी” कदम होगा और यह सरकार के मेक इन इंडिया उद्देश्यों के अनुरूप नहीं होगा।

भारत के जेनेरिक कृषि रसायन उद्योग पर असर

सीसीएफआई का कहना है कि भारत की ताकत उच्च गुणवत्ता वाले जेनेरिक और पेटेंट समाप्त हो चुके अणुओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण रूप से निहित है। अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक कृषि रसायन बाजार का लगभग 90% हिस्सा जेनेरिक उत्पादों का है और भारतीय निर्माताओं ने इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता दिखाई है।

उन्होंने 2021 में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। सीसीएफआई के अनुसार, समिति ने मौजूदा 20 वर्ष की पेटेंट अवधि को पर्याप्त एकाधिकार अवधि माना था और प्रौद्योगिकियों के लिए इससे अधिक संरक्षण को प्रोत्साहित करने के प्रति सावधानी बरती थी।

महासंघ का कहना है कि अतिरिक्त डेटा संरक्षण भारत के जेनेरिक विनिर्माण तंत्र से पैदा होने वाले प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को कमजोर कर सकता है। इसका असर घरेलू किसानों के साथ-साथ वैश्विक कृषि रसायन बाजार में भारत की स्थिति पर भी पड़ सकता है।

सीसीएफआई का मत है कि नीतिगत ध्यान नए अणुओं के समय पर पंजीकरण और भारत में उनके शीघ्र परिचय पर होना चाहिए, जबकि प्रतिस्पर्धा और पेटेंट समाप्त होने के बाद किफायती उत्पादों के घरेलू विनिर्माण की क्षमता को बनाए रखा जाना चाहिए।

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