रबी सम्मेलन में केंद्र ने 10 राज्यों को कृषि विकास निधि दी, दलहन खरीद पर बड़ा ऐलान
01 अक्टूबर2026, नई दिल्ली: रबी सम्मेलन में केंद्र ने 10 राज्यों को कृषि विकास निधि दी, दलहन खरीद पर बड़ा ऐलान – नई दिल्ली में चल रहे राष्ट्रीय रबी कृषि सम्मेलन 2026-27 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 10 राज्यों को कुल मिलाकर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कृषि विकास निधि मंजूर करने की जानकारी दी।
यह जानकारी 29 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक में सामने आई, जिसमें देशभर के राज्यों के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसी मंच से मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए “खेत बचाओ अभियान” के नए चरण और दलहन खरीद की नई नीति का भी ऐलान हुआ।
किस राज्य को कितनी निधि
मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा 290 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद हरियाणा को 198 करोड़, छत्तीसगढ़ को करीब 181 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ और बिहार को 114 करोड़ रुपये की निधि दी गई है।
कर्नाटक को 104 करोड़, मिज़ोरम को 75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़, झारखंड को 58 करोड़ और पंजाब को 43 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि राज्यों में कृषि बुनियादी ढांचे, सिंचाई और उत्पादकता बढ़ाने वाली परियोजनाओं पर खर्च होगी।
सम्मेलन में मंत्री चौहान ने कहा कि सरकारें और राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं, लेकिन देश और किसान स्थायी रहते हैं, इसलिए कृषि के मंच पर राजनीति की जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राज्यों के साथ मासिक समीक्षा बैठकें करने की भी बात कही।
खेत बचाओ अभियान और दलहन खरीद पर जोर
सम्मेलन में मिट्टी की सेहत पर केंद्रित “खेत बचाओ अभियान” का नया चरण 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में चलाने की घोषणा हुई। इस अभियान में मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक इस्तेमाल और खेतों में मददगार कीटों को बचाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में तुअर, उड़द और मसूर जैसी दलहनी फसलें उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की योजना बताई गई। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि इन तीनों दलहनों की खरीद पूरी तरह MSP पर होगी और किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर किया जाएगा।
यह ऐलान उसी रबी सम्मेलन की कड़ी में हुआ है जिसका पहला दिन 28 सितंबर को रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों, बीज उपलब्धता और मौसम पूर्वानुमान पर केंद्रित था। दूसरे दिन का फोकस राज्यों को दी जाने वाली सीधी वित्तीय मदद और दलहन खरीद नीति पर रहा।
मंत्री चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से कहा कि केंद्र अब हर महीने राज्यों के साथ समीक्षा बैठक करेगा, ताकि रबी सीजन की तैयारियों में कोई देरी न हो और खाद, बीज व सिंचाई से जुड़ी दिक्कतें समय रहते सुलझाई जा सकें।
भारत हर साल बड़ी मात्रा में तुअर, उड़द और मसूर जैसी दलहनें विदेश से मंगाता है, जिससे किसानों को घरेलू बाजार में वाजिब दाम मिलने में दिक्कत आती रही है। यही वजह है कि धान कटाई के बाद खाली खेतों में दलहन बोने के इस अभियान को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे रबी सीजन में एक अतिरिक्त फसल चक्र जोड़कर घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। 48 घंटे में भुगतान की गारंटी का मकसद यह भरोसा दिलाना है कि किसान बिना देरी की चिंता किए धान के बाद इन दलहनी फसलों की तरफ रुख कर सकें, जो आमतौर पर परती पड़े खेतों में एक अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती हैं।
दलहन की शत-प्रतिशत MSP खरीद और 48 घंटे में भुगतान का भरोसा उन किसानों के लिए राहत की बात है जो अक्सर फसल बेचने के बाद महीनों भुगतान का इंतजार करते हैं। वहीं राज्यों को मिली कृषि विकास निधि से आने वाले महीनों में सिंचाई, भंडारण और मिट्टी सुधार से जुड़े काम तेज होने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर खाद, बीज और कृषि उपकरण कारोबार पर भी पड़ेगा।
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