समस्या – समाधान (Farming Solution)

इन 12 फसलों में बीज उपचार क्यों है ज़रूरी ? बीज उपचार करके अंधाधुंध रसायनों के इस्तेमाल से बचें 

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27 मई 2024, खरगोन: इन 12 फसलों में बीज उपचार क्यों है ज़रूरी ? बीज उपचार करके अंधाधुंध रसायनों के इस्तेमाल से बचें  – खरीफ में बोई जाने वाली फसलों में धान, बाजरा, मक्की, ग्वार, मूंग, उड़द, लोबिया, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, तिल एवं अरण्ड शामिल  हैं। फसलों में अधिक पैदावार लेने के लिए उन्न्त किस्म के बीजों के साथ-साथ बीज का स्वस्थ होना भी अत्यंत आवश्यक है। इनमें से कुछ फसलों में कुछ ऐसी बीमारियां आती हैं जो रोगग्रस्त बीजों द्वारा फसलों में फैलती हैं और काफी नुकसान पहुंचाती हैं। इसके इलावा फसल की गुणवत्ता पर भी इन बीमारियों का विपरीत असर पड़ता है। अतः अच्छी पैदावार के लिए  अच्छी किस्मों के साथ-साथ रोग-रहित बीज का प्रयोग अति आवश्यक है। बीज का उपचार करने में बिल्कुल ही कम लागत आती है। अधिक से अधिक 50-70 रुपये में एक एकड़ बिजाई के लिए प्रयोग किये जाने वाले बीज का उपचार किया जा सकता है।

यदि किसान भाई किसी विश्वसनीय स्त्रोत जैसे राज्यों के  बीज विकास निगम, राष्ट्रीय बीज विकास निगम, केन्द्रीय राज्य फार्म व कृषि विश्वविद्यालय से बीज की खरीद करते हैं तो बीज का उपचार करने की कोई आवश्यकता नहीं। लेकिन यदि आप किसी निजी बीज विक्रेता से बीज की खरीद करते हैं तो बीज को एक बार अवश्य जांच लें कि बीज उपचारित है या नहीं। कुछ कम्पनियों की बीज की थैलियों में बीज उपचार सामग्री दवाई व टीके डालती हैं। इसलिए इसकी भी जांच कर लेनी चाहिए तथा उसका उपयोग उसी बीज को उपचारित करने के लिए करें। परन्तु यदि आप अपना स्वयं का बीज ले रहे हैं तो बाजार से बीज उपचार सामग्री खरीद कर बीज का उपचार अवश्य करें। प्रमाणित, साफ व स्वस्थ बीजों को भी फफूंद रोगों व दीमक से सुरक्षित रखने के लिए फफूंदनाशक एवं कीटनाशक दवा से बीज उपचार करना आवश्यक है।

बीज उपचार जरूरी क्यों?

1.  मिट्टी को अंधाधुंध रसायनों के प्रकोप से बचाने के लिए बीज उपचार जरूरी है।

2. कुछ भयंकर बीमारियां ऐसी हैं, जो केवल बीज उपचार के द्वारा ही रोकी जा सकती हैं, जिनका बाद में कोई ईलाज नहीं जैसे- धान में पौध गलन, आभासी कंडुआ, जड़-गलन, जीवाणु पत्ता अंगमारी, पदगलन व बकानी, जीवाणु पत्ता रेखा इत्यादि तथा कपास में पौध रोग, झुलसा रोग एवं जड़-गलन आदि।

3. थोड़ी मात्रा में दवाई का प्रयोग करके अंधाधुंध रसायनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए।

4. बीज व भूमि जनित बीमारियों तथा दीमक के रोकथाम के लिए बीज उपचार जरूरी है।

5. फसलों में दीमक, सफेद लट तथा बीमारियां पौधों को बिजाई के तुरन्त बाद से ही हानि पहुंचाने लगते हैं। और  पैदावार में भारी कमी आ जाती है। उपचारित बीज बोने से यह प्रकोप कम किया जा सकता है। अतः फसल की शुरू की अवस्था में कीड़ों व बीमारियों से बचाव के लिए बीज का उपचार करना जरूरी है।

6. बढ़ती हुई महंगाई के दौर में थोड़े खर्च में ज्यादा मुनाफे  के लिए बीज उपचार करना जरूरी है ।

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