सोयाबीन में बीमारी-कीट का नियंत्रण

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बैक्टीरियल पस्च्यूल की समस्या होने पर कासुगेमेसिन 0.2 प्रतिशत, कॉपर आक्सीक्लोराइड 0.2 प्रतिशत, या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 200 पी.पी.एम. का छिड़काव करें।
गेरूआ रोग से बचाव के लिये हेक्जाकोनेजोल 5 ई.सी. या प्रोपाकोनेजोल 5 ई.सी. या ट्राईएडमिफान 25 डब्ल्यू. पी. या कापर आक्सीक्लोराइड 20 ई.सी. रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत 0.1 प्रतिशत की दर से 40-45 दिन की फसल होने पर छिड़काव करें। इस छिड़काव से पौधे पूरी तरह भींगने चाहिए तथा 500-700 लीटर पानी प्रति हे. प्रयोग करना चाहिए। आवश्यकतानुसार 15-20 दिन में छिड़काव दोहराना चाहिए।
कीट नियंत्रण
सोयाबीन फसल में कई कीटों का प्रकोप विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है। इन कीटों में तने की मक्खी व चक्रभृंग (तना छेदक कीट), अर्ध कुन्डलक इल्ली, कम्बल कीट, तम्बाखू की इल्ली, अलसी की इल्ली, चने की फली छेदक (पत्ती भक्षक कीट), एवं सफेद मक्खी, जेसिड्स माइटस् और थ्रिप्स (रस चूसक) प्रमुख हैं।
इनके नियंत्रण के उपाय निम्नलिखित हैं
1. फेरोमोन ट्रैप्स लगाने से वयस्क कीट (उडऩे वाले) आकर्षित होकर ट्रैप में गिर जाते हैं जिससे इल्लियों जैसे कीटों का नियंत्रण संभव है।
2. तम्बाखू की इल्ली, एवं कम्बल कीट के नियंत्रण के लिये प्रभावित पौधों से अंडगुच्छ एवं लार्वीगुच्छ वाली पत्तियों को एकत्र कर नष्ट कर दें। जब हम खेत का निरीक्षण करते हैं तब कागज की तरह या जालीदार पत्तियां जैसे ही दिखें वहां पत्तियों के नीचे अंड गुच्छ या लार्वीगुच्छ मिल जायेंगे, इस प्रकार की पत्तियों या पूरे पौधे को धीरे से इकट्ठा करें एवं बोरी में डालते जायें तथा अन्त में खेत से बाहर लाकर नष्ट कर दें। जिस जगह पर इस प्रकार की पत्तियाँ मिलें उसके चारों तरफ कीटनाशक का छिड़काव तुरंत करें।

तना छेदक मक्खी एवं सफेद मक्खी
फोरेट 10 जी. दानेदार दवा को 10 कि.ग्रा. प्रति हे. के हिसाब से जुताई के समय मिटटी में मिला दें। या थायोमेथोक्जाम 70 डब्ल्यू. एस. 3 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से बोनी पूर्व बीज उपचारित करें।

गर्डल बीटल (चक्रभृंग एवं पत्ती छेदक)
ट्रायजोफास 40 ई.सी. दवा 800 मि.ली. प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें। या इंडोक्साकार्ब 14.5 एस.सी., 300 मि.ली. प्रति हे. या इथोफेनप्राक्स 10 ई.सी. 1 लीटर प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें।
पत्ती भक्षक कीट
स्पायनोसेड 45 एस.सी. 125 मि.ली. प्रति हे. या रायनेक्सीपीर 20 एस.सी. 100 मि.ली. प्रति हे. या क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. या क्यूनालफास 25 ई.सी. 1500 मि.ली. प्रति हे. या इंडोक्साकार्ब 15 ई.सी. 300 मि.ली. प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें।

जेसिडस, एफिड, माइट्स
इथियान 50 ई.सी. दवा की 1.5 लीटर मात्रा प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें।

तना मक्खी एवं सफेद मक्खी
थायामेथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी.100 ग्राम प्रति हे. या इथोफेनप्राक्स 10 ई.सी. की 1 लीटर मात्रा प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें।
जैविक कीटनाशक:
1. बैवेरिया बेसियाना या बीटी, 1 लीटर प्रति हे. की दर से छिड़काव करने से पत्ती भक्षक इल्लियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
2. एच.ए.एन.पी.व्ही. या एस.आई.एन.पी.व्ही. की 250 एल.ई. प्रति हे. की दर से छिड़काव करने से भी पत्ती भक्षक कीटों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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