रबी का समापन एकदम सुखद हो

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मौसम के अतिरेक से गुजरती रबी की गाड़ी अपने गन्तव्य पर पहुंचने को है। मीलों लम्बे-चौड़े लहलहाते गेहूं के खेतों को देखो तो मन प्रसन्नता से भर जाता है। रबी की अन्य फसलों के अलावा गेहूं समाज की आवश्यकता से अधिक जुड़ा नजर आता है। यही कारण है कि यदि उसकी फसल अच्छी आई है तो किसान भी गदगद नजर आता है। हर वर्ष ठंड पड़ती परंतु इस वर्ष कुछ अधिक पड़ी, पारा कुछ अधिक बार लुड़का, आंशिक क्षेत्रों में पाला भी पड़ा, कुछ नुकसान भी हुआ परंतु कुल मिलाकर स्थिति संतोषजनक दिखाई पड़ती है। चार माह से पाली-पोसी फसल से समुचित उत्पादन मिल सके इसके लिये भी सचेत रहने की बहुत आवश्यकता है मटर,बटरी और मसूर में तो हंसिया लगने भी लगा होगा यथा संभव खेत/खलिहान की तैयारी करके उसमें काम चलाऊ बागड़ बनाकर तैयार रखा जाये, खलिहान की गोबर से लिपाई, मिट्टी से छपाई आम बात है इस तरह की पूर्व तैयारी से आने वाले अनाज का रखरखाव अच्छा हो जाता है विशेषकर चूहों के बिलों की जांच और रोकथाम के उपायों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। प्रकृति का अद्भुत नियम है फसलों के पकने के क्रम से इस तरह अंतर रहता है कि एक फसल कटकर खलिहान में रखा जाये के बाद दूसरी का नम्बर आता है। कुछ दशक पहले खेत से फसल काटकर लाने में समय लगता था क्योंकि उस समय केवल हंसिया चलता था। हफ्तों कटाई तो महीनों गहाई/उड़ावनी और भंडारण, परंतु वर्तमान के इस मशीनी युग में ये सब कार्य उंगलियों पर गिने जाने वाले दिनों तक सीमित हो गये हैं। कटाई की तैयारी में अहम बात यह भी ध्यान में रखना पड़ेगी कि अनाज को किस तरह कहां भंडारण किया जाये। आज ही उसकी व्यवस्था पुख्ता करनी होगी। यथा सम्भव अनाज को भरने की कोठियाँ, बन्डों की अच्छी तरह से साफ-सफाई की जाये। बन्डों की गोबर से लिपाई की जाये। गेहूं के साथ घुन और उसका परिवार लुका/छिपा भंडार कोठियों, बोरों में रहता है तो पुराने बारदानों को धोकर सुखाना भी जरूरी होगा। भंडारण के लिये सागौन, नीम के पत्तों को तोड़कर सुखाने रख दिया जाये जो निकट भविष्य में बन्डों में रखने के काम आ सकते हैं। यथा सम्भव जो अनाज को बीज की तरह रखना है को नये बारदानों में रखने की तैयारी हो बाकी अनाज के लिये पुराने बारदाने ही चलेगें। मसूर कटाई के बाद चना, तेवड़ा आदि कटेगा उसके बाद अलसी, कुसुम तथा असिंचित गेहूं का नम्बर आयेगा। सोयाबीन की तरह रबी फसलों में दाने गिरने की प्रवृत्ति कम है कुछ सिंचित गेहूं में जरूर यह समस्या रही हो परंतु अन्य फसलों में यह स्थिति नहीं के बराबर है। कटाई के बाद ढुलाई दोनों कार्य में पूर्ण सावधानी रखना जरूरी है कटाई तथा ढुलाई के समय 0.5 प्रतिशत तक की हानि असावधानी होने पर होती है। सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह बात पता चली है। कहावत है बूंद-बूंद से सागर भर जाता है यदि ये छोटी-मोटी हानि पर ध्यान नहीं दिया गया हो तो आंकड़े करोड़ों पर पहुंच जाते हंै। खुले जानवरों से भी फसल की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना जरूरी होता है। कुछ क्षेत्र में जायद की फसल लेने की तैयारी भी किया जाना उतना ही जरूरी है, सो दोनों कार्य के लिये समय का निर्धारण जरूरी होगा। कटी फसल को खुले में बिखेर कर अच्छी तरह से सुखाना बहुत जरूरी है ताकि गहाई ठीक से हो सके बीज के उद्देश्य से गहाई, उड़ावनी, भंडारण अलग से पूर्ण सुरक्षा से की जाये ताकि सामान्य फसल में वो मिल नहीं सके। गेहूं की कटाई चैत के पहले सम्भव नहीं है। चेतुए तैयार रहते हैं गेहूं कटाई के पर्व के लिये। पिछले 4-5 माह में किये गये परिश्रम के यदि अच्छे परिणाम चाहिये तो छोटी-मोटी सावधानियाँ बरतना आवश्यक है। हमारी शुभकामनायें हंै कि रबी का समापन एकदम सुखद हो। अन्न के भंडार भर जायें ताकि सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो सके और कृषकों की समृद्धि भी हो सके।

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