टिड्डी का टहलना, सरकार का ऊंघना

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टिड्डी का टहलना, सरकार का ऊंघना

टिड्डी का टहलना, सरकार का ऊंघना – पिछले सप्ताह जयपुर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल के मंत्रालयों के चक्कर लगाती हुई टिड्डियां टहलती हुई देखी गंईं और इन मंत्रालयों में सरकार उंघती पायी गई । जिस दुश्मन को हमें सीमा पर रोकना था, वो ही हमें हमारे दफ़्तर में घुस कर चेतावनी दे रहा है, करो मेरा समूल नाश, तुम करोगे कैसे, तुम्हारे पास वो दवा नहीं, छिड़कने का स्प्रेयर है ही नहीं। फिर इठला कर टिड्डी बोली – मुझे मारने वाली दवाई पर प्रतिबंध लगा दिया, क्या अब चीन से मँगाओगे? वो देश जो तुम्हारे सिर पर बैठ कर तुम्हारी अर्थव्यवस्था को लगभग चौपट कर चुका है और अब सीधे हाथापाई कर रहा है । किसानों की फ़सल नष्ट नहीं होने देंगे । सरकार ने हुंकार भरी – टिड्डियां लंबे पेड़ों की ऊंची पत्तियों पर जाकर बैठ गई। फिर सरकार ने मैदानी अमले से रिपोर्ट मँगाई, जाँच की, भारतीय स्प्रेयर काम नहीं देंगे, इंग्लैंड से टिड्डियों के क़द के स्प्रेयर मंगाएंगे । टिड्डियों को भी अच्छा लगेगा। इंपोर्टेड मशीनों की हवा, दवा से वे मोक्ष प्राप्त करेंगी।

कीटों में किसानों का सबसे पुराना शत्रु है टिड्डी। अकेले होते हैं तो मासूम लगते हैं, झुंड में होते हैं तो आतंक मचा देते हैं, पेड़ -पौधे, फसल चट कर जाते हैं। अपने त्रिस्तरीय जीवन चक्र में अंडे से लेकर कोमल नौनिहाल और 30 दिन के भीतर जवान होकर फिर ये समूह में उडऩा शुरू कर वनस्पति को नुक़सान पहुँचाते हैं।

गुलाबी, पीले, भूरे रंग की टिड्डी जब एक साथ आसमान में घनघोर होती हंै तो काले बादलों सा घेरा बन जाता है। एक किलोमीटर के घेरे में 4 करोड़ टिड्डियां होती हैं, और कभी कभी तो 8 करोड़ की संख्या तक पहुँच जाती हैं। आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि ये कितना नुकसान पहुंचाने की ताकत रखती हैं। पूरे सब्ज बाग को रात भर में उजाड़ सकती हैं। टिड्डी नियंत्रण के लिए उनके बारे में समुचित जानकारी समय पर मिलना आवश्यक है। और ये तो इंटरनेशनल कीट है।

अफ्रीका से महीनों पहले उड़ान भर कर, अरब देशों में रूक कर तेल पानी वसूलता हुआ, हमारे चिर पड़ोसी पाकिस्तान से कानाफूसी कर हवा का रूख देखकर, नुकसान की साजिश करता है। और हम पलक पाँवड़े बिछा कर पतीली, थाली, चिमटे बजाकर स्वागत की तैयारी में ऊंघते, सोते जुट जाते हैं। ये गनीमत है कि इस समय हमारे खेतों में फसलों का घनत्व टिड्डियों के झुंड के मुक़ाबले कम था। इसलिए हाहाकार थोड़ा कम हुआ। इसके लिए विश्व खाद्य संगठन में एक पूरा विभाग है जो लोकस्ट वारनिंग ऑर्गेनाईजेशन के रूप में सभी देशों को चेतावनी देता है, आगाह करता है। उसका काम है, आक्रमण की आशंका होने पर समय पर चेतावनी देना, परंतु जिस प्रकार कोरोना महामारी की चेतावनी देने में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ज़ाहिर तौर पर राजनीति, कूटनीति की, संभवत: वैसा ही आचरण एफएओ का भी रहा।

टिड्डी सर्वेक्षण और नियंत्रण टिड्डी प्रभावित देशों में मुख्य रूप से कृषि मंत्रालय की जि़म्मेदारी है। जग ज़ाहिर है कि पड़ोसी पाकिस्तान का व्यवहार मोहल्ले में अबोला पाले पड़ोसी के आचरण जैसा ही है। वक्त आने पर अपने घर का कचरा पड़ोसी के आँगन में फेंक दें। और यही किया। अपनी हद में टिड्डी नियंत्रण किया नहीं और प्रोटीन के नाम पर पकडऩे की कवायद करते रहे। वैसे एफएओ की रिपोर्ट के मुताबिक मौसम उपग्रह और अन्य सेटेलाइट टिड्डियों के झुंड का पता नहीं लगा सकते, परंतु सेना के अति संवेदनशील उपग्रह इन टिड्डियों को देख सकते थे। परंतु कृषि मंत्रालय का काम रक्षा मंत्रालय कैसे करे ?

एफएओ ने यह भी चेतावनी दी है कि जुलाई में ये टिड्डी दल एक बार फिर भारत का सीधे रूख करेंगे। एफएओ के मुताबिक़ टिड्डियां अभी अपनी फ़ौज केन्या में तैयार कर रहीं हैं, अंडे देना शुरू कर दिए हैं। इसी के साथ ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में भी फल-फूल रही है ये टिड्डियां। अगर सीमा पर नहीं रोका गया तो जुलाई के मध्य तक ये भारत में खऱीफ़ की फ़सलों पर घमासान कर देंगे , और यदि इस बार भी हम उंघते रहे तो व्यापक नुक़सान की आशंका रहेगी। फिर सरकारें मुआवज़ा बाँटने का प्रिय कर्मकांड ज़रूर कर सकती हैं।

केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार को अब मुस्तैदी से टिड्डियों के नियंत्रण की तैयारी रखनी होगी। ड्रोन छिड़काव, जीप माउंटेड स्प्रेयर, हेलिकॉप्टर से स्प्रे , फ़ायर ब्रिगेड वाहनों से छिड़काव, कीटनाशकों का पर्याप्त भंडारण रखना होगा। थाली, पतीली बजाने का अवसर अब शायद न मिले। देश इस समय भीषण टिड्डी आक्रमण का सामना कर रहा है, जैसे संभवत: 25 वर्ष पूर्व हुआ था। खऱीफ़ को बचाइए, सरकार!

सुनील गंगराड़े

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