फसल की खेती (Crop Cultivation)

आम की फसल पर 6 खतरनाक कीटों का खतरा, ऐसे करें समय पर नियंत्रण और बचाएं फसल  

15 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: आम की फसल पर 6 खतरनाक कीटों का खतरा, ऐसे करें समय पर नियंत्रण और बचाएं फसल – आम की फसल में फूल आने से लेकर फल बनने तक का समय बेहद संवेदनशील होता है। इसी दौरान कई हानिकारक कीट तेजी से फैलते हैं और फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार किसान इन कीटों की सही पहचान नहीं कर पाते, जिससे समय पर नियंत्रण नहीं हो पाता और उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए जरूरी है कि किसान इन प्रमुख कीटों और उनके वैज्ञानिक नियंत्रण के तरीकों को अच्छी तरह समझें।

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में आम की उन्नत किस्में जैसे दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, बाम्बे ग्रीन, मल्लिका, सुन्दरजा, तोतापरी, नीलम, महमूद बहार और नंदीराज उगाई जाती हैं। बेहतर उत्पादन के लिए सही किस्म के साथ-साथ कीट प्रबंधन भी बेहद जरूरी है।

1. आम का फुदका (भुनगा)

यह आम का सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला कीट है। इसके निम्फ (शिशु) और वयस्क कीट कोमल पत्तियों, प्ररोहों और पुष्पक्रमों का रस चूसते हैं, जिससे फूल और छोटे फल झड़ने लगते हैं।

नियंत्रण:

तोतापरी किस्म इस कीट से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है, इसलिए इसका चयन लाभकारी है। जब प्रति बौर 5–10 कीट दिखें, तब इमिडाक्लोप्रिड 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर पहला छिड़काव करें (पुष्प गुच्छ 1–10 सेमी होने पर)। दूसरा छिड़काव पुष्प खिलने से पहले या फल बनने के बाद आवश्यकता अनुसार प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (1–1.5 मिली/लीटर) या थायोमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी (0.5 ग्राम/लीटर) से करें।

2. गुजिया (मिली बग)

इस कीट के निम्फ और वयस्क कोमल भागों और फूलों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां और फूल गिर जाते हैं और फल नहीं बन पाते।

नियंत्रण:

नवंबर के अंतिम सप्ताह में पेड़ के तने से लगभग 1 मीटर ऊंचाई पर एल्काथीन (प्लास्टिक) शीट के साथ चिपचिपा बैंड लगाएं, ताकि कीट ऊपर न चढ़ सके। क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी का घोल (निर्धारित मात्रा में) बनाकर छिड़काव करें।

3. आम शाखा बेधक (स्टेम बोरर)

यह कीट पेड़ के तने और शाखाओं में टेढ़े-मेढ़े सुरंग बनाता है, जिससे शाखाएं सूखने लगती हैं और पेड़ कमजोर हो जाता है।

नियंत्रण:

छेद को साफ कर कीट की गंदगी निकालें। छेद में 5 मिली मिट्टी तेल/पेट्रोल/क्लोरोफॉर्म डालकर कपास या कीचड़ से बंद कर दें, जिससे लार्वा अंदर ही नष्ट हो जाता है।

4. गुठली का घुन

इस कीट का लार्वा और वयस्क फल के अंदर ही रहकर गूदे को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे फल का विकास रुक जाता है और गुणवत्ता खराब हो जाती है।

नियंत्रण:

फलों को 46°C पर 160 मिनट या 50°C पर 120 मिनट तक गर्म उपचार देने से कीट नष्ट हो जाते हैं। जब फल नींबू के आकार के हों (लगभग 2.5–5 सेमी), तब ऐसीफेट 75 एसपी 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

5. आम फल भेदक

यह कीट फल और बीज दोनों को नुकसान पहुंचाता है। प्रभावित फलों पर काले या भूरे चिपचिपे धब्बे दिखाई देते हैं और बाद में फल सड़ने लगते हैं।

नियंत्रण:

फल विकास की शुरुआती अवस्था में लेम्डा सायलोथ्रिन 5 ईसी (1 मिली/लीटर) या क्विनालफॉस 25 ईसी (1.5 मिली/लीटर) का छिड़काव करें। 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें और हर बार दवा बदलते रहें, ताकि प्रतिरोधक क्षमता न बने। सूखी टहनियों और संक्रमित फलों को एकत्र कर नष्ट कर दें।

6. पुष्प गुच्छ मिज

यह कीट आम के बौर (फूल गुच्छ) और छोटे फलों को तीन चरणों में नुकसान पहुंचाता है—कली अवस्था, फल बनने की अवस्था और पत्तियों के पास। इससे बौर सूख जाते हैं और फल बनना रुक जाता है।

नियंत्रण:

गर्मियों में बाग की गहरी जुताई करें, जिससे मिट्टी में मौजूद लार्वा और प्यूपा नष्ट हो जाएं। अप्रैल-मई में क्लोरोपाइरीफॉस 1.5% चूर्ण 250 ग्राम प्रति वृक्ष मिट्टी में मिलाएं। कली निकलने की अवस्था (फरवरी) में डायमिथोएट 30 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें।

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