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फसल की खेती (Crop Cultivation)

जायद के लिए बेस्ट है तोरई की ये वैरायटी, सिर्फ 60-75 दिन में तैयार होगी फसल; कम लागत में मिलेगा बेहतर मुनाफा  

12 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: जायद के लिए बेस्ट है तोरई की ये वैरायटी, सिर्फ 60-75 दिन में तैयार होगी फसल; कम लागत में मिलेगा बेहतर मुनाफा – जायद सीजन में किसानों के लिए तोरई की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई तोरई की ‘काशी ज्योति’ वैरायटी कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम है। यह किस्म किसानों के लिए इसलिए भी फायदेमंद मानी जा रही है क्योंकि इसमें बीज की कीमत अपेक्षाकृत कम है और उत्पादन क्षमता अधिक है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है।

जनवरी के बाद शीतकालीन सब्जियों का सीजन समाप्त होने लगता है, जिसके बाद गर्मी की सब्जियों की बुवाई का क्रम शुरू होता है। इसी अवधि को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने यह उन्नत किस्म विकसित की है, जो किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में लाभकारी साबित हो रही है। बाजार में भी गर्मियों में ठंडी तासीर वाली सब्जियों की मांग बढ़ जाती है, जिससे तोरई की खेती किसानों को नियमित आय का अवसर देती है।

काशी ज्योति वैरायटी की खासियत

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी द्वारा विकसित काशी ज्योति तोरई एक उच्च उपज देने वाली किस्म है। इसके फल हल्के हरे रंग के, आकर्षक और बेलनाकार होते हैं। यह किस्म औसतन 15 से 19 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मात्र 60 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में फसल का लाभ मिल जाता है।

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खेती और उत्पादन से जुड़ी जानकारी

तोरई की खेती वर्ष में तीन बार—गर्मी, खरीफ और रबी—की जा सकती है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और पर्याप्त धूप इसकी खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। मचान विधि से खेती करने पर बेलों को सहारा मिलता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और कीटों से भी बचाव होता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि बुवाई से पहले 3-4 बार गहरी जुताई करें और अंतिम जुताई के साथ गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करें।

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कम लागत में बेहतर मुनाफा

तोरई की यह किस्म किसानों के लिए कम लागत में बेहतर मुनाफे का अवसर प्रदान करती है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है, जिससे कीटनाशकों पर खर्च कम होता है। 60-75 दिनों में तैयार होने के कारण किसान जल्दी अगली फसल की तैयारी भी कर सकते हैं, जिससे उनकी आय चक्र तेज हो जाता है।

बीज ऑनलाइन भी उपलब्ध

इस वैरायटी के बीज राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं। किसान घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर करके बीज मंगवा सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज के साथ यह फसल किसानों के लिए अधिक उत्पादन और बेहतर आय का साधन बन रही है।

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