अरहर की यह तीन किस्में किसानों को कर सकती है मालामाल
12 मई 2026, नई दिल्ली: अरहर की यह तीन किस्में किसानों को कर सकती है मालामाल – देश में रबी फसलों की खरीद चल रही है ओर खरीफ सीजन की शुरुआत हो गई है. यानी की किसान भाइयों को तलाश है. ऐसी खरीफ सीजन फसलों की जिनकी खेती कर अच्छी कमाई होना संभव हो सकें. किसान अगर इस मौसम में अरहर की इन टॉप 3 पूसा अरहर 16, पूसा अरहर 151( पूसा श्रीजीता), पूसा अरहर 2017-1 की बुवाई करते हैं, तो अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं.
.पूसा अरहर 16
किसानों के लिए पूसा अरहर 16 किस्म किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. अगर किसान भाई इस फसल की बुवाई करते हैं, तो मात्र 120 दिनों के अंदर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह किस्म किसानों को 120 दिनों में 19-21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम किस्मों में से एक किस्म है.
साथ ही बता दें कि इस फसल की कटाई के बाद किसान भाई सरसों, गेहूं, आलू की फसलों की खेती कर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
पूसा अरहर 151( पूसा श्रीजीता)
पूसा अरहर 151 जिसे पूसा श्रीजीता के नाम से भी जाना जाता है. अगर किसान भाई इस खरीफ सीजन में इस किस्म का चुनाव करते हैं, तो अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. यानी की ICAR द्वारा विकसित अरहर की यह किस्म किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. अगर इन राज्यों- बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम इन क्षेत्रों में भी यह किस्म अच्छा उत्पादन देने में सक्षम किस्म है.
इसके अलावा, किसान अपने खेतों में इस किस्म की बुवाई करते हैं, तो वह मात्र 241 दिनों में 20.8 से 27.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही इसमें 23.6% प्रोटीन होता है और यह उकटा (Wilt) रोग प्रतिरोधी है किस्म है, जो किसानों के लिए मुनाफे वाली किस्म साबित हो सकती है.
पूसा अरहर 2017-1
पूसा अरहर 2017-1 किस्म जल्दी पकने वाली किस्मों में से एक किस्म है. अगर किसान भाई इस किस्म का चुनाव करते हैं तो कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. अरहर की यह किस्म राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के किसानों के लिए उचित विकल्प साबित हो सकती है. इससे किसान 122 दिनों के भीतर ही 21.2 – 21.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं.
बुवाई के लिए उचित समय
अगर आपने इस खरीफ सीजन इन किस्मों की खेती करने की मन बना लिया है तो आप इन किस्मों की बुवाई जून के दूसरे पखवाड़े (15 जून के बाद) से जुलाई के पहले सप्ताह तक कर सकते हैं. अगर इस दौरान इन फसलों को मानसून की बारिश की बौछार मिल जाए, तो अरहर की यह किस्म जल्दी पककर तैयार हो जाती है.
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