फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में फुदका कीट से फसल बचाएं, पूसा संस्थान की ये तकनीकें बढ़ाएंगी पैदावार

17 सितम्बर 2025, नई दिल्ली: धान में फुदका कीट से फसल बचाएं, पूसा संस्थान की ये तकनीकें बढ़ाएंगी पैदावार –  धान की फसल उत्तर भारत के किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है, लेकिन ब्राउन प्लांट हॉपर और व्हाइट बैक प्लांट हॉपर जैसे फुदका कीट इसकी पैदावार को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान IARI, पूसा के विशेषज्ञों ने इन कीटों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी उपाय सुझाए हैं। अगर आप धान की खेती करते हैं, तो ये जानकारी आपकी फसल को सुरक्षित रखने और पैदावार बढ़ाने में मददगार होगी। आइए जानते हैं, फुदका कीट से कैसे निपटें और अपनी फसल को कैसे बचाएं।

फुदका कीट: धान का रस चूसने वाला दुश्मन

फुदका कीट, विशेष रूप से ब्राउन प्लांट हॉपर और व्हाइट बैक प्लांट हॉपर, धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख रस चूसक कीट हैं। पूसा संस्थान के वैज्ञानिक बताते हैं कि इन कीटों के शिशु (निम्फ) और व्यस्क दोनों ही पौधों से रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं। इससे पौधे पीले पड़ जाते हैं, और अगर प्रकोप बढ़ जाए, तो पौधे पूरी तरह सूख जाते हैं। इस स्थिति को हॉपर बर्न कहा जाता है, जो फसल को 20-30% तक नुकसान पहुंचा सकता है।

फुदका कीट से बचाव के वैज्ञानिक उपाय

ICAR के विशेषज्ञों ने फुदका कीट को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

  1. प्रकाश ट्रैप का उपयोग: व्यस्क फुदकों को पकड़ने के लिए खेत में प्रकाश ट्रैप (लाइट ट्रैप) लगाएं। एक प्लास्टिक टब में पानी और थोड़ा कीटनाशक मिलाएं, फिर इसके ऊपर बल्ब जलाएं। कीट रोशनी की ओर आकर्षित होकर पानी में गिरकर मर जाएंगे। यह पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी तरीका है।
  2. खेत का जल प्रबंधन: अगर खेत में फुदका दिखाई दे, तो खेत को सूखने दें और उसके बाद ही सिंचाई करें। इससे कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  3. निगरानी और आर्थिक दहलीज स्तर: जब प्रति पौधा 5-10 फुदके दिखाई दें, तो यह आर्थिक दहलीज स्तर (Economic Threshold Level – ETL) माना जाता है। इस स्तर पर कीटनाशकों का उपयोग जरूरी हो जाता है।
  4. कीटनाशकों का सही उपयोग: जब फुदका कीट का प्रकोप आर्थिक दहलीज स्तर तक पहुंच जाए, तो निम्नलिखित कीटनाशकों का उपयोग करें:
    • त्रिफ्ल्यमेज़ोप्यिम 10% SC: 94 मिलीलीटर प्रति एकड़।
    • फ्लुप्यरिमिन 10% SC: 300 मिलीलीटर प्रति एकड़।
    • प्रमेट्रोज़िन 50% WG: 120 ग्राम प्रति एकड़।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

पूसा संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि फुदका कीट से बचाव के लिए खेतों की नियमित निगरानी जरूरी है। पौधों के निचले हिस्सों की जांच करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही उपाय शुरू करें। कीटनाशकों का उपयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

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  • एक ही कीटनाशक बार-बार न इस्तेमाल करें: इससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है।
  • सुरक्षा उपाय अपनाएं: कीटनाशकों का उपयोग सही मात्रा में करें और छिड़काव के दौरान मास्क, दस्ताने जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें।
  • पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को प्राथमिकता दें: प्रकाश ट्रैप जैसे उपाय रासायनिक कीटनाशकों की निर्भरता को कम करते हैं।

धान की फसल न केवल किसानों की आजीविका का आधार है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पूसा संस्थान की इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर आप अपनी फसल को फुदका कीट से बचा सकते हैं और पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं। 

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