फसल की खेती (Crop Cultivation)

पूसा संसथान ने धान की सीधी बुवाई की दी सलाह, पैदावार में बढ़ोतरी का आश्वासन

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13 मई 2024, नई दिल्ली: पूसा संसथान ने धान की सीधी बुवाई की दी सलाह, पैदावार में बढ़ोतरी का आश्वासन- पूसा संस्थान (IARI) की ओर से समय-समय पर खेती किसानी सम्बन्धी जानकारी साझा की जाती है। धान की बुआई का समय आ रहा है और पूसा संस्थान की ओर से धान की सीधी बिजाई की विस्तृत जानकारी जारी की है। पूसा संस्थान के निदेशक डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने धान की सीधी बिजाई के लाभ बताते हुए कहा की “धान की सीधी बिजाई के तीन प्रमुख फायदे हैं पहला पानी की बचत दूसरा श्रम की बचत और तीसरा ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी। किसानो को अपने खेत मैं पानी की वयस्था, निवेश की क्षमता के हिसाब से धान की किस्म का चुनाव करना चाहिए।”

कम अवधि में ज्यादा पैदावार देने वाली बासमती किस्म

अशोक कुमार सिंह, निदेशक, पूसा संस्थान (ICAR-IARI)

बासमती धान की प्रमुख किस्में जो कम अवधि यानि 120 से 125 दिन के अंदर पक कर  तैयार हो जाती है वे है पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1692 और पूसा बासमती 1847। 140 दिन के अंदर पक कर तैयार होने वाली किस्मों में पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1718 और पूसा बासमती 1885 शामिल है। इसके अलावा लंबी अवधि की किस्में हैं जो कि 155 से 160 दिन के अंदर पक कर तैयार होती हैं उसमें पूसा बासमती 1401, पूसा बासमती 1728, पूसा बासमती 1886 शामिल है । पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1885 और पूसा बासमती 1886 पत्ती का झुलसा और झोंका रोग के लिए रोधी किस्में हैं यह सभी किस्में धान की सीधी विजाई के लिए उपयुक्त पाई गई हैं ।    

बुआई के लिए कैसे तैयार करें बीज (बीज उपचार)

जीरी बिजाई ड्रिल या लुक्की सीड ड्रिल के अनुसार 8 किलोग्राम धान का बीज प्रति 1 एकड़ खेत में लगता है। बुआई के लिए बीज तैयार करने के लिए 1 किलोग्राम नमक 10 लीटर पानी में घोल लीजिए और इसमें 8 किलोग्राम बीज डाल कर के थोड़ी देर एक डंडे से हिलाते जाईये। हल्के बीज ऊपर तैरने लग जाएँगे। हल्के बीजों को निकाल कर बाहर फेंक दीजिए। डूबे हुए बीज को निकालकर पानी से तीन चार बार अच्छी तरह से धो लीजिए ताकि नमक का प्रभाव समाप्त हो जाए। इसके बाद बीज उपचार के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन की 2 ग्राम मात्रा और बाविस्टीन की 20 ग्राम मात्रा 10 लीटर पानी में घोल कर 8 किलो छठे हुए बीज को इस घोल में डुबो कर 24 घंटे रखिए। 24 घंटे के बाद बीज को बाहर निकालिए और उसको छाय में अच्छी तरह से सुखा लीजिए। अब यह बीज बुआई के लिए तैयार है। 

धान की बुआई

धान की सीधी बिजाई के दो प्रमुख तरीके हैं। पहला तरबतर विधि जिसमें कि गेहूं की कटाई के बाद खेत की जुताई कर देते हैं। जुताई करने के बाद उसको लेजर लेवेलेर से लेवलिंग करते हैं। फिर खेत में पानी लगाए। पानी लगाने के बाद जब खेत मैं बत्तर आजाता है तोह उसकी फिर जुताई करे। २-३ बार जुताई करने के बाद लाज़र से फिर लेवेलिंग करे ताकि मिटटी अच्छी तरह से दब जाए और सॉलिड हो जाए। ऐसा करने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है। 

लक्की ड्रिल से धान की बुआई

जीरी ड्रिल और लक्की ड्रिल के वक़्त कतार से कतार की दूरी करीब 8 से 9 इंच के आसपास होती है। और इस विधि में बीज की गहराई हम तकरीबन डेढ़ इंच के आसपास रखते हैं। बिजाई करने के बाद फिर हल्का पाटा चलाते हैं। इस विधि से सात से आठ दिन के अंदर अंकुरण हो जाता है। अजर लक्की ड्रिल से बुआई कर रहे है तोह उसमे वयस्था होती है की साथ मैं शाकनाशी पेंडिमेथालिन दवा आप दाल सकते है। 

दूसरा तरीका बुवाई के लिए प्रयोग करते हैं उसमें गेहूं की कटाई के बाद खेत की जुताई करके लेजर लेवेलर चलाते हैं। लेजर लेवेलर चलाने के बाद ड्रिल से धान की बिजाई कर देते हैं। फिर पानी लगाते है। पानी लगाने के 4 से 5 दिन के अंदर अंकुरण हो जाता है। इसमें विधि में ध्यान रखना चाहिए कि बीज की गहराई थोड़ी कम रखे करीब आधा पौना इंच के आसपास रखें। काम गहराई रखना ज़रूरी है क्योकि जब पानी लगेगा तो ज्यादा गहराई वाले बीज के अंकुरण में दिक्कत होगी और बीज नीचे दब कर सड़ भी सकता है । 

तरबतर विधि से बुआई के तुरंत बाद जब खेत चलने लायक होजाए तोह खरपतवार नाशी पेंडिमेथालिन दवा का उपजोग करे। इसके लिए 1200 से  लेकर के 1500 मिलीलीटर दवा आप 200 से 250 लीटर पानी में घोल कर बुआई के तुरंत बाद छिलकाव करते हैं।  

समझिए दोनों विधियों में अंतर

दोनों विधियों में अंतर है। अगर तरबतर विधि से धान की सीधी बिजाई करते हैं तो इसमें खरपतवार का नियंत्रण बहुत अच्छी तरह से हो जाता है क्योंकि पहली बार पानी लगाते  ही उसके तुरंत बाद चार से पांच दिन में अंकुरण हो जाता है। जुताई करने के साथ-साथ वो खरपतवार समाप्त हो जाते हैं। अगर धान की पिछले साल की फसल के बीज अगर खेत में अंदर रह जाते हैंतो व भी पहली बार पानी का छिड़काव के साथ ही बीज जम जाते हैं और जब जुताई करते हैं तो वो सब पौधे मर जाते हैं। अगर आप इस बात का ध्यान रखें कि पहले जिस किस्म का प्रयोग किया गया था उसी किस्म का प्रयोग करे तो कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर किस्म आप बदल रहे हैं तो इस बात का जरूर ध्यान रखें पेंडिमेथालिन दवा का छिड़काव करे इससे काफी खरपतवार का शुरू की अवस्था में नियंत्रण हो जाता है।    

कैसे करे खरपतवार नियंतरण 

दोनों ही तरीकों में धान की बिजाई  तरबतर विधि से हो या जीरी ड्रिल और लकी ड्रिल उसमें बुवाई के तुरंत बाद पेंडिमेथालिन नामक दवा प्रयोग करते है। अगर लकी ड्रिल प्रयोग कर रहे हैं तो उसमें व्यवस्था होती है कि तुरंत छिड़काव कर सकते है। इसके लिए 1200 से  लेकर के 1500 मिलीलीटर दवा आप 200 से 250 लीटर पानी में घोल कर बुआई के तुरंत बाद छिलकाव करते हैं। यह प्री इमरजेंस हरबसाइड का काम करता है खरपतवार मर जाते हैं। इसी तरह से हम अगर पानी का छिड़काव बुवाई के बाद करते हैं तो एक दो दिन बाद खेत में चलने लायक हो जाये तो उस समय  खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव कर लेना चाहिए । 

करीब 20 से 22 दिन बाद पहली बार खेत में पानी छिड़काव करते है। जब खेत चलने लायक हो जाता है तो उसमें नॉमिनी गोल्ड दवा का छिड़काव करते हैं। जिसमें करीब 80-100 मिलीलीटरी मात्रा को 200 से 250 लीटर पानी में घोल करके उसका छिड़काव करते हैं। तो इससे जो खरपतवार उगे होते हैं वो नष्ट हो जाते हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखें तो हम धान की सीधी बिजाई से अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं।

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