कपास एवं अरहर की नवीन किस्मों के बारे में जानें

Share

कपास फसल में अन्तरवर्तीय अरहर की खेती

10 जून 2022, बुरहानपुर । कपास एवं अरहर की नवीन किस्मों के बारे में जानें – कृषि विभाग द्वारा केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान नागपुर से बी टी कपास की सूरज किस्म एवं राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान भोपाल से अरहर की पूसा अरहर 16 किस्म बुलवाई गई  है। यह जानकारी उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने दी।

सूरज बी टी. 1 कपास की मध्य जोन क्षेत्र में उच्च सघनता पौध रोपण प्रणाली से बुवाई करने हेतु उपयुक्त किस्म है। इसकी बुवाई 15जून से 15 जुलाई के मध्य की जाती है। इसमें कतार से कतार की दूरी 60 से 75 से.मी. पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10 से 15 से.मी. रखना चाहिए। प्रति हेक्टर बीज दर 7 से 8 किलोग्राम लगता है। इसकी उपज 24 क्विंटल प्रतिहेक्टेयर है।

पूसा अरहर-16 अरहर की अर्द्ध बौनी और कम अवधि वाली किस्म है इस किस्म के पौधे के पकने की औसत अवधि 115-120 दिन है इसकी बीज दर 25-30 कि ग्रा प्रति हेक्टेयर है एवं बोने का समय जून के प्रथम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक है। इसके पौधे की लम्बाई जून के पहले सप्ताह में बुआई करने पर 120-125 सेमी और जुलाई के पहले सप्ताह में बुआई करने पर 90-95 सेमी होती है .इसकी औसत उपज 20-22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसके 100 दानों  का वजन 7.4 ग्राम है . इसमें प्रोटीन की मात्रा भी अधिक होती है तथा इसके दानों का रंग भूरा होता है।  

अरहर की राजेश्वरी किस्म की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी फसल 135 से 150 दिन में तैयार हो जाती है। अच्छी पैदावार के लिए इसकी बुवाई जून के द्वितीय पखवाड़़े से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक कर देना चाहिये। इसके पश्चात बुआई करने पर उत्पादन घटने लगता है ,इसकी बीज दर 4-5 केजी प्रति हेक्टेयर है. इस किस्म की औसत उपज 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह जल्दी पकने वाली मध्यम बोल्ड सीड वाली और उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधी क़िस्म है।

महत्वपूर्ण खबर: राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्पित

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.