धान की खेती में समन्वित प्रबंधन लाभकारी

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फसलों को संतुलित आहार की आवश्यकता

धान की खेती में समन्वित प्रबंधन लाभकारी – धान की फसल को अमोनियम उर्वरक एवं ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। इच्छित फसल के लिए हरेक अवस्था में प्रति इकाई उत्पादन वृद्धि के लिए भोजन की निश्चित मात्र की आवश्यकता होती है। इसके साथ-साथ धान की फसलों को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। कृषि वैज्ञानिक आर्नन ने इसके संबंध में एक सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसके द्वारा यह साबित पाया कि न्यूनतम मात्र में उपस्थित भोज्य पदार्थ सबसे ज्यादा मात्र में पदार्थ की उपलब्धता को प्रभावित एवं सुनिश्चित करता है। जिसे भोज्य पदार्थ की उपलब्धता के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है। अगर हम उपयोग किये उर्वरक के ऊपर नजर डालें तो पायेंगे कि फॉस्फेट एवं पोटाश की उपलब्धता घुलनशीलता एवं तापक्रम के कारण बहुत ज्यादा होती है बशर्ते की धान की जड़ अधिक गहराई तक गयी है। ज्यादा घुलनशील होने के कारण भोज्य पदार्थ मिट्टी के नीचली सतह में जड़ों के प्रभावी क्षेत्र के नीचे जमा रहता है।

नाइट्रोजन की भूमिका धान की फसलों में सर्वाधिक है, जिसका उपयोग के पश्चात विभिन्न क्रियाओं के द्वारा मिट्टी से क्षय हो जाती है, जिसमें जल का नीचे की ओर रिसाव, वायुमंडल में उड़ जाना, सतहों पर एक जगह से दूसरे जगह बह जाना एवं डी नाइट्रीफिकेशन प्रक्रिया मुख्य एवं ध्यानाकर्षण है। धान की फसलों में नाइट्रोजन की भूमिका कल्लों की संख्या में वृद्धि, फ्लेग पत्ती की लंबाई एवं चौड़ाई में वृद्धि, बाली की लंबाई में वृद्धि, प्रत्येक बाली में दोनों की लंबाई एवं चौड़ाई में वृद्धि, बाली की लंबाई में वृद्धि, प्रत्येक बाली में दोनों की संख्या के साथ-साथ दानों के भराव को भी सुनिश्चित करता है। इतनी बहुतायत मात्र में नाइट्रोजन, यूरिया के रूप में व्यवहार होने के बावजूद धान की फसलों को मिलने के बजाय ज्यादा बीमारियों एवं कीड़ों को आकर्षित करता है। धान की फसलों में नाइट्रोजन की इतनी मात्र को प्रत्येक अवस्था में सुनिश्चित करने हेतु कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा बताये गये विभिन्न उपायों जैसे-नीमयुक्त यूरिया, मिट्टी यूरिया, लोहयुक्त यूरिया, प्रील्ड यूरिया आदि को किसानों ने नकार दिया है। इस स्थिति में हमारे पास एक ही उपाय बचा हुआ है कि इसकी उपलब्धता धान के सारे क्रांतिक अवस्था जो उपज में भागीदारी करता है, सुनिश्चित करने के लिए 2.2 प्रतिशत भार/भार ऐरामेटिक नाइट्रोजन का उपयोग किया जाये। यह बूम फ्लावर धान स्पेशल के रूप में उपलब्ध है, जिसमें ढेर सारे वानस्पतिक विटामिन, एमाइनो एसिड एवं अन्य तत्व मिले हुए हैं, जो धान की फसलों की हरेक जरूरत की पूर्ति करता है, उपयोग किये गये उर्वरक की उपयोग क्षमता को बढ़ाता है, साथ ही साथ उपज एवं गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले सभी कारकों को समन्वित करता है। इसके कारण उपज में वृद्धि होती है।

रोग से बचाना अतिआवश्यक

धान फसल के स्वस्थ विकास के बाद समन्वित पौधा संरक्षण की भूमिका अहम होती है, जिसके कारण उपज में 30-90 प्रतिशत तक ह्रास होता है। वैज्ञानिकों की अनुशंसा है कि बायोलोजिकल उत्पाद का उपयोग कर धान फसल की सुरक्षा पूर्व में ही की जा सकती है। जबकि हम रसायनिक दवाओं के द्वारा नुकसान शुरू हो जाने के बाद रोकथाम करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ‘धान को रोगमुक्त रखना सदा फायदेमंद है रोग लगने के बाद यदि सही समय पर उपचार किया जाय। जिसके तहत धान की फसलों के लिए बूम मोनास पूर्णतया कृषि विज्ञान में अनुशंसित है। बूममोनस में स्युडोमोनास फ्लोरेसेंस 0।5 प्रतिशत अतिप्रभावी रूप में वर्तमान है जो धान की फसलों में लगने वाले विभिन्न प्रकार के फफूंद एवं बैक्टेरियल रोगों जैसे सुरक्षा प्रदान करती है यानी कहें तो रोगों से मुक्त रखता है। धान की खेती मुख्यतया सिंचित भूमि में की जाती है। अत: मिट्टी के लक्षणों को समझना होगा, ताकि धान की अच्छी पैदावर हेतु खाद एवं उर्वरक का प्रबंधन अच्छे ढंग से किया जा सके। धान के खेतों में पानी की अधिकता के कारण विभिन्न प्रकार की विद्युतीय एवं रसायनिक क्रियाएं होती हैं, जो उपयोग किये गये उर्वरकों की उपलब्धता को प्रभावित करती है। यही कारण है कि कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा हमेशा समन्वित उर्वरक प्रबंधन एवं समन्वित फसल सुरक्षा की अनुशंसा की जाती है।

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