मूंगफली, उर्द, तिल एवं सोयाबीन फसलों का भ्रमण

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7 सितम्बर 2022, टीकमगढ़  मूंगफली, उर्द, तिल एवं सोयाबीन फसलों का भ्रमण – केन्द्र वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा ग्राम परखास, पठा, मुन्ड़ीखेरा, नारायणपुर आदि गांव में मूंगफली उर्द, तिल, एवं सोयाबीन फसलों का भ्रमण कर किसानों को फसलों के उत्पादन हेतु तकनीकी सलाह दी गई। टीकमगढ़ में विगत कुछ वर्षों में मूंगफली के क्षेत्रफल में काफी बढ़ोतरी हुई है। खरीफ के मौसम में नींदा एक प्रमुख समस्या रहती है इसलिए मूंगफली के अच्छे उत्पादन के लिए फसल की दो बार निराई गुड़ाई करें।

मूंगफली में रस चूसक कीट माहो, थ्रिप्स व सफेद मक्खी आदि दिखाई देने पर इमिडाक्लोप्रिड 80-100 मिली प्रति एकड़ या डाईमिथिएट 30 ईसी 400 मिली प्रति एकड़ और पत्ती सुरंगक, बिहार रोमिल इल्ली के नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस 25 ईसी 400 मिली या फ्लूबेंडिमाइड 39.35 एससी 60 मिली प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें । मूंगफली में टिक्का, कॉलर तथा तना गलन रोग के नियंत्रण के लिए डायथेन एम-45, 100 ग्राम प्रति एकड़ या कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करें। उड़द में सरकोस्पोरा पर्णदाग एवं एंथ्रेक्नोज रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 200 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें और पीला रोग फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 80-100 मिली प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें।

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