राज्य कृषि समाचार (State News)फसल की खेती (Crop Cultivation)

ककून मार्केट में रेशम कोया बिक्री से कृषकों को दुगुनी आमदनी

25 दिसम्बर 2022, भोपाल ।  ककून मार्केट में रेशम कोया बिक्री से कृषकों को दुगुनी आमदनी रेशम उत्पादन एक ग्रामीण कृषि आधारित उद्योग है जो कि विश्व स्तर पर अपनाया जा रहा है। इससे बहुत ही अधिक मांग में रहा प्राकृतिक रेशम जो कि वस्त्रों की रानी भी कहलाता है। यह ग्रामीण कृषकों के लिए उत्तम है और निर्धनों को पर्याप्त आय व रोजगार का अवसर प्रदान करता है। जिससे कम समय में अधिक रोजगार और आकर्षक आय प्राप्त होती है। भारत लगभग 35,000 मी. टन वार्षिक उत्पादन करने के साथ दुनिया में द्वितीय स्थान पर है और रेशम का बड़ा उपभोक्ता भी है। रेशम का उत्पादन जम्मू व कश्मीर, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में परम्परागत रूप से हो रहा है। यह उद्योग दक्षिण भारत के राज्यों के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय हो रहा है। केन्द्रीय रेशम बोर्ड एवं राज्य रेशम विभाग के सुदृढ़ सहयोग से तथा कृषकों के अथक प्रयासों से भी देश के उत्तरी मध्य राज्यों में खासकर मध्यप्रदेश में विगत 20 वर्षों से कृषकों द्वारा रेशम कार्य अपनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य की विशेषता यह है कि भारत देश में पाया जाने वाला चारों प्रकार का वाणिज्यिकी फसल जैसे शहतूत, एरी, मूगा एवं तसर की पैदावार होशंगाबाद जिले में होती है।

बाजार की समस्या दूर हुई

मध्यप्रदेश के रेशम उत्पादक कृषकों के सामने मुख्य समस्या उचित कोया विक्रय बाजार की रही है। विगत वर्षों में मध्यप्रदेश सिल्क फैडरेशन द्वारा कोया खरीद चार्ट के अनुसार अनुमोदित (कोया की गुणवत्ता के आधार पर) द्विप्रज संकर रेशम कोया की अधिकतम दर प्रति किलोग्राम रूपये 350 एवं न्यूनतम दर रूपये 130 की दर से एवं बहुफसलीय कोया की दर रूपये 220/- व रूपये 90/- की दर पर खरीद की जा रही थी। अनुसंधान प्रसार केन्द्र, होशंगाबाद के अध्ययन के आधार पर एक किलोग्राम रेशम कोया उत्पादन के लिये न्यूनतम रूपये 220/- से रूपये 250/- तक की लागत खर्च का आकलन किया गया है। क्योंकि रेशम कृषकों ने विक्रय दर कम होने पर अपेक्षा अनुरूप आय/लाभ प्राप्त नहीं होने से समय-समय पर असंतोष प्रकट किया था। इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार के रेशम विभाग ने संज्ञान में लेते हुए रेशम कृषकों के हित में शासकीय ककून मार्केट, जिला रेशम कार्यालय परिसर मालाखेड़ी, नर्मदापुरम में व्यवस्थित रेशम कोया क्रय-विक्रय मार्केट की व्यवस्था को वर्तमान में चालू की गई है। उक्त ककून मार्केट में सरकार की ओर सभी सुविधायें के साथ रेशम उत्पादक कृषक एवं मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों के पश्चिम बंगाल, कर्नाटक के डीलर्स/ व्यापारियों द्वारा नीलामी प्रक्रिया में भाग लेकर रेशम कोया की खरीद की जा रही हैं। विगत माह में खुले बाजार में द्विप्रज संकर रेशम कोया का औसत दर प्रति किलोग्राम लगभग रूपये 500 की दर से व्यापारियों द्वारा खरीद की गई है। कोया बाजार में रेशम उत्पादक कृषक अपना उत्पादित रेशम कोया को उचित दर पर विक्रय कर अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं। रेशम कृषकों को दुगुना (डबल आय) लाभ मिलने से रेशम उत्पादक कृषकों में नई उमंग के साथ उत्साह का संचार हुआ है। इस व्यवस्था का खुले मन से रेशम कृषकों ने स्वागत कर प्रशंसा व्यक्त की है। आगे रेशम कृषक नये ढंग से रेशम की खेती करने में और अधिक रूचि दिखाएंगे। इस संबंध में पूर्व आयुक्त, श्री विशेष गढ़पाले, (आईएएस) ने संज्ञान में लेकर कोया मार्केट की व्यवस्था में अपना योगदान देकर मार्केट को सफलतापूर्वक संचालन कराने में अहम भूमिका का निर्वहन किया।

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वैज्ञानिक-डी अनुसंधान प्रसार केन्द्र, केन्द्रीय रेशम बोर्ड, होशंगाबाद ने समस्त रेशम कृषकों से आग्रह किया कि शहतूत बगीचे का उचित रखरखाव के साथ ही रेशम कीटपालन कार्य में नवीन प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर अधिक से अधिक मात्रा में गुणवत्तायुक्त रेशम कोया उत्पादन कर और अधिक आय अर्जित कर सकते हंै। उन्होंने बताया कि कृषक दो एकड़ शहतूत बगीचे से हर माह 250 डीएफएल का कीटपालन कर लगभग 200 किलोग्राम कोया उत्पादित कर उक्त विक्रय दर से प्रति माह लगभग एक लाख रूपये की कमाई की जा सकती है जो कि शुद्व लाभ प्रतिमाह लगभग रूपये 60,000 से 70,000 तक मिल सकता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें- मो. : 9488400952

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