फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की खेती में बंपर पैदावार चाहिए? अपनाएं ये वैज्ञानिक रोपाई तकनीक

24 जुलाई 2025, नई दिल्ली: धान की खेती में बंपर पैदावार चाहिए? अपनाएं ये वैज्ञानिक रोपाई तकनीक – धान, खरीफ मौसम की एक प्रमुख फसल, भारत के किसानों के लिए जीवन रेखा की तरह है। इस समय देश भर के किसान भाई-बहन धान की नर्सरी की देखभाल और रोपाई की तैयारी में जुटे हैं। फसल की पैदावार बढ़ाने और मेहनत को सफल बनाने के लिए पूसा संस्थान के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीकों की विस्तृत जानकारी साझा की है। आइए, इन तरीकों को करीब से समझें ताकि आप भी अपनी खेती को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें।

खेत की तैयारी: मजबूत नींव का पहला कदम

धान की अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी सबसे अहम है। सबसे पहले, खेत की मेंडबंदी को मजबूत करें ताकि बरसात का पानी खेत में रुके और बाहर न जाए। इसके बाद, लेजर लैंड लेवलर की मदद से खेत को समतल करें। इससे खेत की ऊंची-नीची जमीन एकसमान हो जाती है, जिससे पानी और खाद का बेहतर इस्तेमाल होता है।

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समतल खेत में 2-3 बार जुताई करें और फिर 6-8 सेंटीमीटर पानी भर दें। पानी भरने के बाद ट्रैक्टर माउंटेड पडलर, देसी हल या कल्टीवेटर से जुताई कर गाद तैयार करें। अंत में, पाटा लगाकर खेत को एकदम सपाट कर लें। ऐसा करने से आपका खेत रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

पोषक तत्व प्रबंधन: मिट्टी की सेहत का राज

फसल को पोषण देने के लिए मिट्टी का परीक्षण (Soil Test) करवाना जरूरी है। इससे आपको पता चलता है कि खेत में किन तत्वों की कमी है। खेत तैयार करते समय पूरी फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट की मात्रा डाल दें। लेकिन ध्यान रहे, रोपाई के समय नाइट्रोजन का प्रयोग न करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, नाइट्रोजन डालने से पौधों की जड़ें मजबूती से जमीन नहीं पकड़ पातीं।

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नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर दें: पहली खुराक रोपाई के एक सप्ताह बाद, दूसरी 20-25 दिन बाद और तीसरी 45-50 दिन के बीच। इससे नाइट्रोजन का सही उपयोग होगा और फसल को पूरा पोषण मिलेगा।

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रोपाई की तकनीक: सही तरीके से लगाएं कदम

धान की पौध जब 20-25 दिन की हो जाए और उसमें 4-6 पत्तियां निकल आएं, तब वह रोपाई के लिए तैयार होती है। नर्सरी में शाम को पानी भर दें, ताकि सुबह पौधों को आसानी से उखाड़ सकें और जड़ों को कम नुकसान हो। उखाड़ने के बाद पौधों की जड़ों को बहते पानी में साफ करें ताकि वे आपस में न उलझें।

मुख्य खेत में रोपाई के लिए लाइन से लाइन की दूरी 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें। एक जगह पर 2-3 पौधे लगाएं। ऐसा करने से अगर कोई पौधा मर भी जाए, तो उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा। इस तरह एक वर्ग मीटर में करीब 50 पौधे लगाए जा सकते हैं, जो अच्छी पैदावार की गारंटी देते हैं।

रोपाई के एक सप्ताह बाद नाइट्रोजन की पहली खुराक दें। इससे पौधे मजबूत होंगे और नाइट्रोजन का सही इस्तेमाल होगा। समय पर देखभाल से फसल की सेहत बनी रहती है और पैदावार में इजाफा होता है।
खेत की तैयारी से लेकर रोपाई और देखभाल तक, हर कदम पर ध्यान देकर आप अपनी मेहनत को सफलता में बदल सकते हैं। तो देर किस बात की? इन सुझावों को आजमाएं और अपनी खेती को नया आयाम दें

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