फसल की खेती (Crop Cultivation)

सफेद मूसली की खेती: बीज से सजीव पौधे तक

24 जून 2024, भोपाल: सफेद मूसली की खेती: बीज से सजीव पौधे तक – सफेद मूसली (क्लोरोफाइटम बोरिविलियनम) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में ‘सफेद सोना’ कहा जाता है। इसकी जड़ें आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा में विशेष स्थान रखती हैं। जाने सफेद मूसली के प्रवर्धन की विधियों और इसके लाभ।

प्रवर्धन की विधियाँ

सफेद मूसली का प्रवर्धन लैंगिक (बीजों द्वारा) और अलैंगिक (जड़ों द्वारा) दोनों तरीकों से किया जा सकता है। बीजों द्वारा प्रवर्धन की दर कम होती है, इसलिए वानस्पतिक प्रवर्धन अधिक उपयुक्त है। अलैंगिक प्रवर्धन पिछली फसल से संग्रहित जड़ों द्वारा किया जाता है। ये जड़ें मार्च-अप्रैल में संग्रहित की जाती हैं और अगले सीजन के लिए भंडारित की जाती हैं।

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सफेद मूसली का सही प्रवर्धन स्वस्थ और ऊर्जावान पौधों को सुनिश्चित करता है। यह पौधों की गुणवत्ता और उपज को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा प्राप्त होता है।

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