Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीकी

लेखक: डॉ. राकेश कुमार शर्मा

13 नवंबर 2024, भोपाल: टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीकी – भूमि- टमाटर की खेती के लिए जल निकास वाली तथा पोषक तत्व युक्त दोमट या बलुई दोमट उपयुक्त रहती है।

उन्नत किस्में- पूसा रूबी, पूसा-120, पूसा शीतल, अर्का सौरभ, अर्का अनन्या, अर्का आभा, काशी अमृत I

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

संकर किस्में- पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड-2, पूसा हाइब्रिड-4, पूसा हाइब्रिड-8, अविनाश-2, रश्मि, सोनाली।
इन किस्मों के अतिरिक्त कई अच्छी बीज उत्पादक कम्पनियों ने भी क्षेत्र के अनुसार अपनी किस्में विकसित की हैं। किसान कम्पनी की गुणवत्ता के अनुसार बीज खरीद सकता है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

बीज की मात्रा- उन्नत किस्म हेतु- 350-400 ग्राम बीज प्रति हक्टेयर तथा संकर किस्मों हेतु 150-200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।

नर्सरी तैयार करना- नर्सरी क्यारी एक मीटर चौड़ी, 5 मीटर लम्बी तथा 15 सेमी ऊंची क्यारियाँ बनायें। क्यारियाँ बनाने से पहले मिट्टी को भुरभुरी बनाकर गोबर की सड़ी खाद 10-15 किग्रा तथा मिट्टी उपचार हेतु 100 ग्राम फोरेट मिलायें। बीजों को कार्बेन्डाजिम 3 ग्राम/किलो बीज की दर से उपचारित कर बीजों को 5 सेमी की दूरी पर लाईनों में लगायें। बीज बोने के बाद क्यारी को पुआल या सरकंडा आदि की पलवार से ढंक देते हैं। इससे नमी संरक्षित रहती है, तथा अंकुरण जल्दी हो जाता है। अंकुरण के बाद पलवार हटा देते हैं। कीट व्याधि से पौधों को बचाने हेतु इमिडाक्लोप्रिड 1 मिली/3 लीटर पानी तथा 2 ग्राम मैन्कोजेब या कार्बेन्डाजिम प्रति लीटर पानी मे घोल कर छिड़काव करें।

खेत की तैयारी- मिट्टी की जुताई तथा पाटा लगाकर भुरभुरी व ढेले रहित बना लेें। खेत की तैयारी के समय उपयुक्त मात्रा में गोबर खाद तथा उर्वरक मिश्रण मिलायें।

 बुवाई का समय
 मौसम  नर्सरी बुवाई रोपाई समय
सर्द मौसम जुलाई-सितम्बर अगस्त-अक्टूबर
बसंत ग्रीष्म नवंबर-दिसंबर दिसंबर-जनवरी

नर्सरी में 40 मैश नेट का उपयोग- पत्ती मोड़क (लीफ कर्ल) वायरस से पौधों को बचाने हेतु बीज बुवाई के पश्चात क्यारी को 40 मैश की जालीदार नाइलोन नेट से ढंक देते हैं इसके लिए क्यारी के चारों तरफ एक फुट ऊंची लकड़ी गाड़ कर नेट लगा देते हैं।

खाद एवं उर्वरक- खाद एवं उर्वरक की मात्रा का निर्धारण मिट्टी परीक्षण के द्वारा किया जा सकता है। टमाटर की फसल हेतु निम्न खाद एवं उर्वरकों की आवश्यकता रहती है। गोबर खाद, फॉस्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा रोपाई से पहले खेत में दें तथा नत्रजन की शेष मात्रा 30 दिन वाद व 50 दिन बाद दो भागों में दें। सूक्ष्म पोषक तत्वों में बोरोन व जिंक की कमी पाये जाने पर इनका उपयोग करें। जिंक हेतु जिंक सल्फेट 25 किग्रा/हेक्टेयर का उपयोग करें।

पौध रोपण – साधारणतया टमाटर में पौध रोपण की दूरी लाईन से लाईन 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 45-60 से.मी. रखते हैं। पौधे लगाने हेतु समतल क्यारी या रेज्ड बेड विधि का प्रयोग किया जा सकता है। पौधों को नर्सरी से निकालने के बाद इनकी जड़ों को कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/लीटर पानी के घोल में 10 मिनट डुबोकर पौध रोपण करें। यथासम्भव पौध रोपण का कार्य शाम के समय करें तथा रोपण के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें।

सिंचाई– भूमि एवं मौसम की स्थिति को देखते हुए आवश्यकतानुसार 6-10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें।

निंदाई-गुड़ाई- पौध लगाने के 20-25 दिन बाद प्रथम निंदाई-गुड़ाई करें तथा उसके बाद 2-3 वार निंदाई-गुड़ाई आवश्यकतानुसार करके खेत को खरपतवार रहित रखें।

फलों की तुड़ाई – फलों की तुड़ाई इनके उपयोग पर निर्भर करती है, यदि टमाटर को नजदीक के बाजार में बेचना हो तो फल पकने के बाद तुड़ाई करें। तथा यदि फलों को दूर बाजार में भेजना हो तो जैसे ही उनके रंग में परिवर्तन होना प्रारंभ हो तो तुड़ाई प्रारम्भ करें।

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प)

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.global-agriculture.com