मिर्च के पर्णकुंचन रोग प्रतिरोधी 5 किस्में

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14 सितम्बर 2021, इंदौर ।  मिर्च के पर्णकुंचन रोग प्रतिरोधी 5 किस्में – भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु ने मिर्च की 5 ऐसी नई किस्में विकसित की हैं, जो मिर्च के प्रमुख पर्णकुंचन रोग प्रतिरोधी हैं। इसलिए किसानों द्वारा मिर्च फसल पर कीटनाशकों का छिडक़ाव का खर्च कम होने से खेती की लागत में कमी आएगी और मुनाफा बढ़ेगा।

बता दें कि भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई 5 नई किस्मों के नाम अर्का तेजस्वी, अर्का यशस्वी, अर्का सान्वी, अर्का तन्वी और अर्का गगन रखे गए हैं। इन सभी किस्मों की अपनी अलग विशेषता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्का तेजस्वी और अर्का यशस्वी किस्में सूखी मिर्च उत्पादन के लिए, तो अर्का गगन हरी मिर्च के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। जबकि अर्का सान्वी और अर्का तन्वी सूखी और हरी दोनों प्रकार की मिर्च उत्पादन के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है।

नई किस्मों का उत्पादन 

अर्का गगन (हरी मिर्च) का 100 क्विंटल /एकड़ उत्पादन हो सकता है, जबकि अर्का तन्वी और अर्का सान्वी का 30-35 क्विंटल सूखी मिर्च या 100 क्विंटल/एकड़ हरी मिर्च का उत्पादन हो सकता है। वहीं अर्का यशस्वी और अर्का तेजस्वी का 30-35 क्विंटल/ एकड़ सूखी मिर्च का उत्पादन हो सकता है। मिर्च की यह सभी किस्में विभिन्न रोगों की प्रतिरोधी हैं।

पर्णकुंचन रोग प्रतिरोधी किस्म 

इस रोग में वायरस के कारण पौधे की पत्तियां छोटी रहकर पीली पड़ जाती हैं और मुड़ जाती हैं। इससे पौधों का विकास रुक जाता है। लेकिन मिर्च की इन नई किस्मों ने किसानों को चिंतामुक्त कर दिया है। इन किस्मों में कीटनाशकों का प्रयोग कम करने से किसानों की लागत में कमी आएगी।

उत्पादन के साथ लाभ भी बढ़ेगा। देश में करीब साढ़े सात लाख हेक्टेयर में मिर्च की खेती की जाती है। जिसमें मिर्च के प्रमुख उत्पादक राज्यों में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

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